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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 ग्राउंड रिपोर्ट: राजनांदगांव में रमन सिंह को हराने के लिए कांग्रेस उम्मीदवार भी ले रहीं अटलजी का सहारा

करुणा शुक्ला पिछले 34 साल तक भाजपा में रही हैं और भाजपा की लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं लेकिन साल 2013 में पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गई थीं।

Author November 8, 2018 12:29 PM
छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव में लगा भाजपा का पोस्टर।

छत्तीसगढ़ में पहले चरण का चुनाव होने में अब मात्र चार दिन बचे हैं। ऐसे में सभी दलों के नेताओं ने चुनाव प्रचार का सिलसिला तेज कर दिया है। इस बीच राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम के भरोसे चुनावी बैतरणी पार करने में जुटी है। दरअसल, राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह राजनांदगांव से चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने अपने विधान सभा क्षेत्र में जो पोस्टर चिपकवाए हैं, उनमें पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का फोटो है। इसके साथ ही उनके पोस्टर पर एक नारा लिखा गया है, रमन पर विश्वास, कमल दांग विकास। यानी सीएम रमन सिंह पर विश्वास करना और कमल का मतलब विकास करना है।

उधर, उनके खिलाफ मैदान में उतरी कांग्रेस प्रत्याशी करुणा शुक्ला हैं जो पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी हैं। करुणा ने भी अपने चुनावी प्रचार में वाजपेयी जी का सहारा लिया है। करुणा शुक्ला पिछले 34 साल तक भाजपा में रही हैं और भाजपा की लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं लेकिन साल 2013 में पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। हालांकि, तब से करुणा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है। कांग्रेस में आते ही करुणा शुक्ला भाजपा पर हमलावर रही हैं। उन्होंने भाजपा में अटलजी के साथ हुए व्यवहार पर भी तीखा हमला बोला था।

16 अगस्त को जब पूर्व पीएम वाजपेयी जी का निधन हुआ और उनका अस्थि कलश देशभर में घुमाया गया तब भी उन्होंने भाजपा पर हमला बोला था और कहा था कि भाजपा अटलजी की मौत पर पॉलिटिकल स्टंट कर रही है। भाजपा के प्रति उनका यह गुस्सा अब राजनंदगांव में भी दिख रहा है। विधान सभा क्षेत्र के मोहल्ला दर मोहल्ला जाकर चुनाव प्रचार कर रही करुणा लोगों से कहती हैं कि जो लोग अपने सीनियर और पथ प्रदर्शक का सम्मान नहीं कर सकते, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में करुणा कहती हैं, “अटल जी वोट बैंक नहीं हैं, जैसा कि भाजपा सोचती है। वह एक विचारधारा हैं और राजनीतिक सिद्धांतों की पूंजी हैं। दस सालों तक जब वो बेड पर पड़े थे और बीमार थे, तब भाजपा के लोगों ने उन्हें देखने तक की जहमत नहीं उठाई। छत्तीसगढ़ में भी राज्योत्सव के मौके पर रमन सिंह ने एक भी पोस्टर में उन्हें नहीं दिखाया लेकिन चुनाव आते ही उन्हें वाजपेयी जी की याद आने लगी। यही बात मैं जनता को बता रही हूं।”

उधर, सीएम रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह, जो राजनांदगांव से सांसद हैं, ने आरोप लगाया कि करुणा शुक्ला ने वाजपेयी जी की नीति और सिद्धांतों को उसी वक्त भुला दिया था जब उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की थी। वाजपेयी जी को चुनावी एंगल से बाहर निकाल दें तो कुछ मतदाताओं को लगता है कि करुणा शुक्ला बाहरी हैं और कांग्रेस ने बेवजह सीएम रमन सिंह के खिलाफ उनकी पैराशूट लैंडिंग कराई है। राजनांदगांव के मेन बाजार में किराना दुकान चलाने वाले रामेश्वर सिंह कहते हैं, “मैं इस बार भाजपा सरकार के खिलाफ वोट करना चाह रहा था मगर शुक्ला बाहरी हैं और वो जीत नहीं सकती हैं। ऐसे में मुझे अपने फैसले पर दोबारा विचार करना होगा।”

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