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कहीं मिली छाछ, तो कहीं पहनाई गई डॉक्टर हर्षवर्धन को पगड़ी

स्वागत की तैयारी हो रही है और इंतजार हो रहा है केंद्रीय मंत्री व चांदनी चौक के भाजपा प्रत्याशी डॉक्टर हर्षवर्धन का। सुबह के करीब साढ़े दस का वक्त होगा, ढोल-नगाड़ों की आवाज चौपाल के करीब सुनाई पड़ने लगती है और इसके कुछ ही समय बाद केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन पदयात्रा करते हुए चौपाल की दो-चार सीढ़ियां चढ़ने लगते हैं।

Author May 9, 2019 4:09 AM
बारादरी की बैठक में हर्षवर्धन। (सभी फोटो : आरुष चोपड़ा)

अजय पांडेय

ग्रेनाइट पत्थरों की चमक से आकर्षित करती पक्की चौपाल पर रखी खाटों और वहीं कोने में रखे हुक्के को छोड़ दें तो यकीन करना मुश्किल होता है कि हम दिल्ली के किसी गांव में खड़े हैं। पक्की सड़कें, पक्की गलियां, चार मंजिला इमारतें, मध्यमवर्गीय सुविधाओं की मौजूदगी से रौनक बाजार यह गवाही देंगे कि आप किसी गांव में नहीं, बल्कि शहर में खड़े हैं। यह दीगर है कि तकनीकी तौर पर दिल्ली का वजीरपुर गांव सरकारी खातों में बाकायदा एक गांव के रूप में ही दर्ज है। मुख्य सड़क से मुड़कर जैसे ही गांव की ओर मुड़ते हैं कि ढोल-नगाड़ों की आवाज सुनाई देने लगती है।

कमल फूल और फिर मोदी सरकार का नारा लिखे टी-शर्ट पहने कुछ युवकों की आवाजाही बता रही है कि यहां पर कोई सियासी जलसा होने वाला है। चौपाल पर कुछ बुजुर्ग और स्थानीय लोग बैठे हैं, महिलाएं भी हैं, युवा भी। स्वागत की तैयारी हो रही है और इंतजार हो रहा है केंद्रीय मंत्री व चांदनी चौक के भाजपा प्रत्याशी डॉक्टर हर्षवर्धन का। सुबह के करीब साढ़े दस का वक्त होगा, ढोल-नगाड़ों की आवाज चौपाल के करीब सुनाई पड़ने लगती है और इसके कुछ ही समय बाद केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन पदयात्रा करते हुए चौपाल की दो-चार सीढ़ियां चढ़ने लगते हैं।

नारेबाजी के शोर से उत्साहित ढोल वाले और भी जोर लगा देते हैं। शोर सुनकर चार मंजिला इमारत की छतों व बालकोनियों से भी कुछ लोग झांकने लगते हैं। चौपाल के भीतर कुर्सियां लगी हैं। वहां मौजूद नेता पहले तो क्षेत्र के लिए डॉ हर्षवर्धन की ओर से किए गए कामों का ब्योरा देते हैं। बताते हैं कि किस तरह रामपुरा गांव का रेलवे फाटक वर्षों से लटका पड़ा था। वहां पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी थीं लेकिन ‘डाक्टर साहब’ की सक्रियता से वह फाटक तैयार हुआ और बनकर चालू भी हुआ। तालियां बजती हैं और चुनाव प्रचार की थकान से बोझिल डॉ हर्षवर्धन का चेहरा मानों एकदम से खिल जाता है।

दिल्ली और आसपास के तमाम गांवों में सम्मान की सबसे बेहतरीन परंपरा पगड़ी पहनाना है और एक रस्म की तरह इसकी अदायगी अब भी जारी है। स्थानीय बुजुर्ग, हर्षवर्धन को पगड़ी बांधते हैं और वादा करते हैं कि गांव का एक-एक वोट उनके नाम पर डाला जाएगा। लोग कहते भी हैं कि पारंपरिक रूप से दिल्ली के गांव कांग्रेस के समर्थक रहे हैं लेकिन अब नया जमाना है और नई पीढ़ी भाजपा के साथ है।

मुंबई में मशहूर अदाकारा और कांग्रेस प्रत्याशी उर्मिला मातोंडकर के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी गोपाल शेट्टी भी यहां पहुंचे हैं। वे भी लोगों से डॉ हर्षवर्धन को वोट देने की अपील करते हैं। अंत में हर्षवर्धन के संबोधन के साथ जलसा खत्म होता है। इस बीच वे छाछ पीकर अपना गला तर करना नहीं भूलते। इससे पहले नीमड़ी कॉलोनी में टीचर्स पार्क से सुबह करीब नौ बजे डॉ हर्षवर्धन की पदयात्रा शुरू हुई।

यहां पर भाजपा कार्यकर्ता अच्छी खासी संख्या में जुटे और स्थानीय लोगों ने भी जगह-जगह रोक कर उनका स्वागत किया। हर्षवर्धन सबसे बड़ी गर्मजोशी से मिलते हैं। ढोल-नगाड़े की आवाज दूर-दूर तक चुनावी पदयात्रा का संदेश दे रही है तो फूल-मालाओं से अटी गलियां बता रही हैं कि भाजपा ने इस पूरे क्षेत्र में कितना जोर लगा रखा है। बुजुर्ग महिलाएं उनके सिर पर हाथ फेर कर आशीर्वाद देती हैं तो नौजवान उन्हें फूलमालाओं से लाद देते हैं। बहरहाल, हर्षवर्धन अपनी पदयात्राओं में लोगों से खूब गर्मजोशी से मिल रहे हैं बदले में उन्हें भरपूर समर्थन का भरोसा भी मिल रहा है।

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