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नीतीश से सीटों के समझौते पर अमित शाह को झेलनी पड़ सकती है बगावत, कुछ सांसदों के पाला बदलने का भी खतरा

मुजफ्फरपुर से भाजपा सांसद अजय निषाद के भी बागी होने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि यह सीट पारंपरिक तौर पर जेडीयू की रही है।

अमित शाह और नीतीश कुमार। (फोटो सोर्स: अनिल शर्मा, इंडियन एक्‍सप्रेस)

बिहार में बीजेपी और जेडीयू द्वारा 2019 के लोकसभा चुनाव में बराबर- बराबर सीटों पर लड़ने के ऐलान के बाद भाजपा खेमे में बेचैनी है। बेचैनी इसलिए क्योंकि अब भाजपा को इससे 30 फीसदी यानी करीब छह सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। 2014 के चुनावों में बिहार में भाजपा को 22 सीटें मिली थीं लेकिन जेडीयू के साथ आने के बाद और एनडीए में संभावित सीट बंटवारे के बाद आशंका जताई जा रही है कि भाजपा को करीब छह सीटें जेडीयू के लिए छोड़नी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में जो सीटें जेडीयू खाते में जा सकती हैं, वहां के मौजूदा भाजपाई सांसद पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर सकते हैं या पाला बदल सकते हैं। भाजपा के दो पुराने सांसद पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा और दरभंगा से कीर्ति झा आजाद पहले ही बागी रुख अख्तियार कर चुके हैं। सिन्हा तो यहां तक कह चुके हैं कि वो पटना साहिब सीट छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे, वो यहीं से चुनाव लड़ेंगे, भले ही पार्टी कोई और हो।

मुजफ्फरपुर से भाजपा सांसद अजय निषाद के भी बागी होने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि यह सीट पारंपरिक तौर पर जेडीयू की रही है। लिहाजा, माना जा रहा है कि भाजपा मुजफ्फरपुर सीट जेडीयू को देगी। अजय निषाद से पहले उनके पिता कैप्टन जयनारायण निषाद 1998, 1999 और 2009 में यहां से सांसद चुने जा चुके हैं। 1998 में उन्होंने राजद से जबकि 1999 और 2009 में जेडीयू से चुनाव लड़ा था। 2014 के चुनाव से पहले उन्होंने पाला बदल लिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्होंने नरेंद्र मोदी को पीएम बनवाने के लिए यज्ञ भी किया था। बाद में बीजेपी ने उनकी जगह उनके बेटे अजय को मुजफ्फरपुर से उम्मीदवार बनाया। सीट खतरे में पड़ता देख खुद अजय निषाद ने जेडीयू से भी नजदीकियां बढ़ा दी हैं। संभव है कि जेडीयू से उन्हें टिकट मिल जाए क्योंकि इस लोकसभा क्षेत्र में अगड़ी जाति के मतदाताओं के अलावा निषादों की भी अच्छी आबादी है।

इनके अलावा आरा संसदीय सीट पर भी जेडीयू ने अपना दावा ठोका है। वहां से केंद्रीय राज्यमंत्री आर के सिंह भाजपा के मौजूदा सांसद हैं। लेकिन दावेदारी खत्म होने की सूरत में राजकुमार सिंह पाला बदलकर नीतीश कुमार का हाथ थाम सकते हैं। राजकुमार सिंह आईएएस अधिकारी रहे हैं। इनके अलावा छपरा से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूढी, पश्चिमी चंपारण से संजय जायसवाल, वाल्मीकि नगर से सतीश चंद्र दूबे, झंझारपुर से बीरेंद्र कुमार चौधरी और सीवान से ओमप्रकाश यादव का भी टिकट काटे जाने की चर्चा है। अगर इनका भी टिकट कटता है तो भाजपा आलाकमान को इन नेताओं का विरोध झेलना पड़ सकता है।

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