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यूपी: आज लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 20 से भी कम सीटों का अनुमान, ये है मोटा गणि‍त

हालिया चुनावों के आधार पर चैनल ने बताया है कि अभी एनडीए के खाते में 35 फीसदी वोट जबकि सपा और बसपा गठजोड़ को 46 फीसदी वोट मिल सकते हैं। कांग्रेस को 12 फीसदी और अन्य को तीन फीसदी वोट मिल सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ।(फाइल फोटो)

यूपी की कैराना सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वहां रालोद की जीत हुई है। नूरपुर विधान सभा सीट भी बीजेपी के खाते से निकलकर सपा के खाते में जा पहुंची। इसके बाद से सियासी चर्चा का बाजार गर्म है। एबीपी न्यूज चैनल ने उप चुनाव नतीजों के बाद ‘देश का मूड’ नाम से एक प्रोग्राम पेश किया है जिसमें पिछले चुनावों में मिले वोट परसेन्ट के आधार पर आंकलन किया है कि अगर वोटिंग का यही पैटर्न रहा तो बीजेपी की राह मुश्किल हो सकती है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। 2014 के आम चुनावों में एनडीए को 73 सीटें मिली थीं जबकि मात्र पांच सीट पर सपा और दो सीट पर कांग्रेस की जीत हुई थी। बसपा और रालोद को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। तब एनडीए को कुल 43 फीसदी वोट मिले थे जबकि सपा और बसपा के वोट परसेंट को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 42 फीसदी हो जाता है। 2014 में कांग्रेस को 12 फीसदी और अन्य के खाते में 7 फीसदी वोट गए थे।

2017 के चुनावी पैटर्न पर आंकलन: हालिया चुनावों के आधार पर चैनल ने बताया है कि अभी एनडीए के खाते में 35 फीसदी वोट जबकि सपा और बसपा गठजोड़ को 46 फीसदी वोट मिल सकते हैं। कांग्रेस को 12 फीसदी और अन्य को तीन फीसदी वोट मिल सकते हैं। यानी चार सालों में बीजेपी को कुल आठ फीसदी वोट का नुकसान होते दिखाया गया है जबकि सपा-बसपा गठजोड़ को चार फीसदी वोट का इजाफा होता दिखाया गया है। अगर सपा-बसपा और कांग्रेस तीनों का गठजोड़ यूपी में होता है तो इस गठबंधन को करीब 60 फीसदी वोट मिल सकते हैं। चैनल ने 2017 के विधान सभा चुनावों में वोटिंग परसेन्ट के आधार पर अनुमान लगाया है कि अगर विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ें तो उन्हें 80 संसदीय सीटों में से 61 पर जीत हासिल हो सकती है जबकि बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए मात्र 19 सीटों पर सिमट सकता है।

बता दें कि कर्नाटक में जीतकर भी सरकार से बेदखल हो चुकी बीजेपी को एक पखवाड़े के अंदर दूसरा झटका लगा है। 11 विधान सभा और चार लोकसभा की सीटों पर हुए मतदान में बीजेपी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। चार में से केवल एक संसदीय सीट (महाराष्ट्र के पालघर) पर बीजेपी उम्मीदवार की जीत हुई है जबकि एक (नगालैंड) पर उसके समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई है। 11 विधान सभा सीटों पर हुए उप चुनावों में भी बीजेपी सिर्फ एक पर जीत दर्ज कर सकी है। शेष 10 सीटें विपक्षी दलों ने जीती हैं। चुनावी नतीजों से सियासी चर्चा का बाजार गर्म है कि क्या बीजेपी की लोकप्रियता और वोट परसेन्टेज में गिरावट हुई है? अगर हां तो क्या अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार होगी?

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