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मिशन 2019: हिन्दी हार्टलैंड में हार की आशंका से भाजपा अलर्ट, 9 राज्यों पर फोकस, बनाया नया प्लान

पूर्वोत्तर के सात राज्यों के अलावा भाजपा का फोकस पश्चिम बंगाल पर भी है, जहां पार्टी 'गणतंत्र बचाओ रथ यात्रा' निकालने के लिए ममता बनर्जी सरकार से सियासी लड़ाई लड़ रही है।

Author December 20, 2018 4:29 PM
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भाजपा सांसद और महासचिव भूपेंद्र यादव से बात करते हुए। (फोटो-PTI)

हिन्दी हार्टलैंड के तीन बड़े राज्यों में भाजपा की हार ने पार्टी नेतृत्व को आगामी लोकसभा चुनाव में संभावित हार के खतरों से आगाह कर दिया है। इसलिए पार्टी आलाकमान ने उन नौ राज्यों पर विशेष फोकस करना शुरू कर दिया है, जहां से इन राज्यों में होने वाले घाटे को पाटा जा सके। दरअसल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार के बाद यह आशंका घर करने लगी है कि यहां की कुल 65 लोकसभा सीटों में से करीब 30 सीट पर भाजपा का 2019 में हार का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए पार्टी नेतृत्व 30 अतिरिक्त सीटों का जुगाड़ करने के लिए पूर्वोत्तर के सभी सात राज्यों समेत पश्चिम बंगाल और ओडिशा पर विशेष नजरें गड़ाए हुई है।

पूर्वोत्तर के सात राज्यों (अरुणाचल प्रदेश-02, मेघालय-02, मिजोरम-01, त्रिपुरा-02, मणिपुर-02, नगालैंड-01 और सिक्किम-01) में कुल 11 लोकसभा सीटें हैं। फिलहाल इनमें से एक सीट पर भाजपा का कब्जा है लेकिन विधान सभा चुनावों में पूर्वोत्तर को कांग्रेस मुक्त बनाने के बाद भाजपा को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में उसे सात अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। यानी 11 सीटों में से 08 पर भाजपा को जीत का भरोसा है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से पांच सीटों पर फिलहाल कांग्रेस और दो पर सीपीएम का कब्जा है। यानी भाजपा कांग्रेस और सीपीएम कोटे की सीटों पर बाजी मार सकती है।

सात राज्यों के अलावा भाजपा का फोकस पश्चिम बंगाल पर भी है, जहां पार्टी ‘गणतंत्र बचाओ रथ यात्रा’ निकालने के लिए ममता बनर्जी सरकार से सियासी लड़ाई लड़ रही है। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने भाजपा के रथ यात्रा की इजाजत दे दी है। भाजपा इससे गदगद है। भाजपा को उम्मीद है कि पार्टी अध्यक्ष की रथ यात्रा से राज्य में भगवा लहर पैदा होगी जो लोकसभा में अधिक सीटों पर जीत दिलाने में कारगर हो सकता है। राज्य में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं। इनमें से 34 पर टीएमसी, दो पर भाजपा, दो पर सीपीएम और चार पर कांग्रेस 2014 में जीती थी। भाजपा को उम्मीद है कि 2019 में पश्चिम बंगाल में 23 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। यानी 21 अतिरिक्त सीटें जीतने के लिए भाजपा एड़ी-चोटी एक कर रही है। इसके लिए भाजपा ने ममता के करीबी सांसद मुकुल रॉय को भी तोड़कर अपने पाले में किया है। टीएमसी ने भी भाजपा के चंदन मित्रा को अपने पाले में कर लिया है।

इनके अलावा भाजपा की नजर ओडिशा पर भी है। वहां भी भाजपा केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में जी-तोड़ मेहनत कर रही है। 2014 के मोदी लहर में पार्टी ने वहां की 21 सीटों में से मात्र एक सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन मौजूदा दौर में भाजपा को उम्मीद है कि वहां जीत का आंकड़ा डबल डिजिट में पहुंच सकता है। इस तरह भाजपा पूर्वोत्तर की आठ, पश्चिम बंगाल की 21 और ओडिशा की 10 अतिरिक्त (कुल 39) सीटों पर जीत का आस लगाए हुई है। अगर ऐसा होता है तो तीन राज्यों में नए समीकरण और चुनावी पैटर्न से होने वाले घाटे (30 सीट) को आसानी से पाटा जा सकता है। हालांकि, लोकसभा चुनाव होने में अभी चार-पांच महीने का वक्त शेष है, इसलिए राजनीतिक उथल-पुथल से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

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