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टिकट देकर बीजेपी नेता को नीतीश ने बनाया अपना, जेडीयू में शामिल करते ही बनाया सीतामढ़ी का उम्मीदवार

सुनील कुमार पिंटू ने बुधवार को ही भाजपा छोड़कर जदयू का दामन थामा था। इसके कुछ देर बाद ही जदयू ने पिंटू को सीतामढ़ी से उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर दिया।

Author Published on: April 4, 2019 10:09 AM
सीतामढ़ी से जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार पिंटू।

बिहार की सीतामढ़ी लोकसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार डॉक्टर बरुण कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया। डॉक्टर बरुण कुमार का कहना है कि उन्हें एनडीए कार्यकर्ताओं का पूरा समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला किया है। वहीं जदयू ने बुधवार को पूर्व भाजपा नेता और बिहार सरकार में मंत्री रहे सुनील कुमार पिंटू को अपना नया उम्मीदवार घोषित कर दिया। बता दें कि सुनील कुमार पिंटू ने बुधवार को ही भाजपा छोड़कर जदयू का दामन थामा था। इसके कुछ देर बाद ही जदयू ने पिंटू को सीतामढ़ी से उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर दिया। जब सुनील कुमार पिंटू से यह पूछा गया कि उन्होंने भाजपा क्यों छोड़ी? पीटीआई की खबर के अनुसार, इसके जवाब में सुनील कुमार पिंटू ने निजी कारणों से भगवा पार्टी छोड़ने की बात कही।

सुनील कुमार पिंटू ने बताया कि जदयू ने उन्हें सीतामढ़ी से उम्मीदवार बनाने का ऑफर दिया था, जिसके बाद उन्होंने जदयू में शामिल होने का फैसला किया। पिंटू के अनुसार, उन्होंने करीब डेढ़ दशक से बतौर विधायक और मंत्री सीतामढ़ी और इसके लोगों की सेवा की है। गौरतलब है कि सीट बंटवारे के तहत सीतामढ़ी लोकसभा सीट जदयू के खाते में गई थी। जिस पर पार्टी ने पेशे से सर्जन डॉक्टर बरुण कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं अब अपना नाम बतौर उम्मीदवार वापस लेने के बाद डॉ. बरुण कुमार ने मीडिया को बताया कि उन्हें एनडीए के संगठन और कार्यकर्ताओं से पूरा समर्थन नहीं मिल रहा था। जिसके चलते उन्हें लगा कि नाम वापस लेने में ही भलाई है। इसके साथ ही डॉक्टर बरुण कुमार ने अपने मेडिकल पेशे से जुड़ी प्रतिबद्धताओं के चलते भी अपना नाम वापस लेने का फैसला किया है।

जदयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि डॉक्टर बरुण कुमार को एक नौकरशाह से नजदीकी के चलते यह टिकट मिला था, क्योंकि डॉक्टर बरुण कुमार के नजदीकी नौकरशाह एक वरिष्ठ जदयू नेता के करीबी हैं। चूंकि टिकट वितरण के समय सीतामढ़ी में पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई, इसलिए डॉक्टर बरुण कुमार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। बता दें कि बीते लोकसभा चुनावों में सीतामढ़ी से रालोसपा के राम कुमार शर्मा को जीत मिली थी। वैसे सीतामढ़ी पारंपरिक तौर पर राजद की सीट मानी जाती है और साल 2004 और 2009 में भी सीतामढ़ी लोकसभा सीट पर राजद का कब्जा था। आगामी 6 मई को सीतामढ़ी लोकसभा सीट पर वोट डाले जाएंगे।

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