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उपेंद्र कुशवाहा के आने से कितना मजबूत हुआ यूपीए, जानिए

अगर वोटिंग पैटर्न नहीं बदला तो भाजपा को इन दर्जनभर सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है।

Author Updated: December 21, 2018 5:44 PM
कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल और राजद नेता तेजस्वी यादव का हाथ थामे रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा। (फोटो-PTI)

एनडीए से अलग होकर उपेंद्र कुशवाहा के यूपीए (बिहार का महागठबंधन) में शामिल हो जाने से बिहार में विपक्ष का गठबंधन मजबूत हुआ है। माना जाता है कि कोइरी समुदाय का करीब सात-आठ फीसदी वोट अब महागठबंधन के पक्ष में जाएगा। इसके मद्देनजर 2019 लोकसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदलने के पूरे आसार हैं। अगर वोटिंग पैटर्न नहीं बदला तो भाजपा को इन दर्जनभर सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है।

गया: गया लोकसभा सीट से हरि मांझी दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। 2014 में उन्हें कुल 3,26, 230 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर राजद के रामजी मांझी थे। उन्हें कुल1,31,828 वोट मिले थे। तीसरे नंबर जीतनराम मांझी थे जिन्हें कुल 1,31,828 वोट मिले थे। उस वक्त जीतनराम मांझी जेडीयू कैंडिडेट थे लेकिन अब वो अपनी पार्टी (हम) बनाकर विपक्षी महागठबंधन के साथ हैं। मांझी इस सीट पर दावा कर रहे हैं।

उजियारपुर: बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय 2014 में उजियारपुर से सांसद चुने गए थे। उन्हें कुल 3,17, 352 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद के आलोक मेहता थे जिन्हें कुल 2,56,883 मत मिले थे। सीपीआई के रामदेव वर्मा को कुल 53,044 वोट मिले थे। इस तरह यहां भी भाजपा को महागठबंधन से कड़ी चुनौती है।

सीवान: 2014 में भाजपा के टिकट पर ओम प्रकाश यादव संसद पहुंचे। उन्हें कुल 3,72,670 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद की हीना शहाब थीं। उन्हें कुल 2,58,823 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर सीपीआई (एमएल) के अमरनाथ थे जिन्हें 81,006 वोट मिले थे। यहां भी भाजपा को मुश्किल हो सकती है।

जहानाबाद: जहानाबाद के मौजूदा सांसद अरुण कुमार रालोसपा के टिकट पर जीतकर आए थे लेकिन अब वो उपेंद्र कुशवाहा के साथ नहीं हैं। माना जाता है कि वो भाजपा के टिकट पर यहां से फिर ताल ठोकेंगे। 2014 में उन्हें कुल 3,22,647 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद के सुरेंद्र यादव थे जिन्हें 2,80,307 वोट मिले थे। सीपीआई (एमएल) के रामाधार सिंह को 34,365 वोट मिले थे। यहां भी मुकाबला कड़ा हो सकता है।

झंझारपुर: झंझारपुर से भाजपा ने वीरेंद्र चौधरी को उतारा था। उनके परफॉर्मेन्स से पार्टी खुश नहीं है। वहां उनके खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है। 2014 में चौधरी को कुल 3,35,481 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद के मंगनी लाल मंडल थे। उन्हें 2,80,073 वोट मिले थे। यादव बहुल क्षेत्र होने की वजह से राजद का गढ़ रहा है। लिहाजा, माना जा रहा है कि यहां भी भाजपा को मुश्किल हो सकती है । और किन सीटों पर भाजपा मुश्किल में पड़ सकती हैं, जानने के लिए क्लिक करें..

दरभंगा पर भी खतरा है क्योंकि तीन बार सांसद रहे कीर्ति झा आजाद संभवत: 2019 का चुनाव भाजपा के टिकट पर ना लड़ें क्योंकि पार्टी ने उन्हें सस्पेंड कर रखा है जबकि वो खुद बगावत का झंडा बुलंद किए हुए हैं। मधुबनी और सारण में भी भाजपा को विपक्षी महागठबंधन से कड़ी टक्कर मिल सकती है।

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