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इस मुस्लिम बहुल इलाके में नीतीश को संभल कर खोलनी पड़ रही जुबान, बस एक उम्मीदवार उतारा मुसलमान

किशनगंज के कोचाधामन से विधायक जेडीयू के मास्टर मुजाहिद ने कहा, 'हम इस इलाके को दूसरा कश्मीर नहीं बनने देंगे।' उनका आरोप है कि एआईएमआईएम के प्रत्याशी इस क्षेत्र में ऐसे अलग राज्य की वकालत कर रहे हैं, जिसे कश्मीर की तरह विशेष दर्जा हासिल हो।

Author April 13, 2019 2:11 PM
बिहार के सीएम और जदयू मुखिया नीतीश कुमार।

स्कूली किताबों में कश्मीर को ‘धरती पर जन्नत’ की संज्ञा दी जाती है। हालांकि, इसका जिक्र चुनावों में भी जमकर हो रहा है। जेडीयू नेता बिहार के ‘सीमांचल इलाके’ में अपने चुनावी भाषणों में कश्मीर और हैदराबाद का जिक्र बार-बार करते नजर आते हैं। पार्टी का मकसद राज्य के उत्तर-पूर्व में स्थित इस अहम इलाके में अपना जनाधार मजबूत करना है। राज्य के इस हिस्से के पूर्व में पश्चिम बंगाल जबकि उत्तर में नेपाल है। यह 4 लोकसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है, जहां बड़े पैमाने पर मुस्लिम आबादी रहती है। हालांकि, बीजेपी के साथ गठजोड़ कर चुनावी मैदान में उतरी जेडीयू इस क्षेत्र में सियासी रणनीति को लेकर दुविधा में है। खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले लोग, जो न तो खुलकर बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं और न ही पीएम नरेंद्र मोदी का।

ऐसे लोग जेडीयू प्रमुख और सीएम नीतीश कुमार को ‘विकास पुरुष’ के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनका मानना है कि नीतीश पर ऐसे नेता के तौर पर भरोसा किया जा सकता है, जो जाति, धर्म, समुदाय से ऊपर उठ चुका है। किशनगंज से जेडीयू के प्रत्याशी सैयद मोहम्मद अशरफ और लोकजनशक्ति पार्टी के खगड़िया से प्रत्याशी महबूब अली पूरे राज्य में एनडीए की ओर से दो मुस्लिम कैंडिडेट हैं। अशरफ के मुताबिक, ‘भारत बाहरियों को हमें चलाने की इजाजत नहीं देगा। न ही इस देश को जाति, धर्म और सांप्रदायिक आधार पर बांटा जा सकता है।…मोदी जब 2014 में पीएम बने तो उन्होंने हिंदुओं की बात नहीं की, बल्कि उन्होंने 125 करोड़ भारतीयों के बारे में सोचा और उनकी ही बात की।’

अगले ही पल वह सऊदी शेखों के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं। वह कहते हैं, ‘उनकी हिम्मत नहीं कि वे यहां आकर हमारी बेटियों से शादी करें और फिर उन्हें तलाक दे दें।’ उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर एआईएमआईएम और उसके प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी हैदराबाद में चुनाव नहीं लड़ सकते। अशरफ का दावा है कि पहली बार किसी स्थानीय को किशनगंज में प्रत्याशी बनाया गया है। उनके मुताबिक, इससे पहले तक मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले ‘बाहरियों’ मसलन एमजे अकबर और सैयद शहाबुद्दीन को यहां प्रत्याशी बनाया गया था। बता दें कि कांग्रेस की ओर से मोहम्मद जावेद को अशरफ के खिलाफ किशनगंज में प्रत्याशी बनाया जा सकता है।

वहीं, किशनगंज के कोचाधामन से विधायक जेडीयू के मास्टर मुजाहिद ने कहा, ‘हम इस इलाके को दूसरा कश्मीर नहीं बनने देंगे।’ उनका आरोप है कि एआईएमआईएम के प्रत्याशी इस क्षेत्र में ऐसे अलग राज्य की वकालत कर रहे हैं, जिसे कश्मीर की तरह विशेष दर्जा हासिल हो।

वहीं, इस इलाके में प्रचार कर रहे नीतीश कुमार भी बहुत सोच समझकर शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह इस क्षेत्र में शुक्रवार को चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे। नीतीश ने अपने 13 साल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का फुल क्रेडिट लिया। उन्होंने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी पर निशाना साधते हुए ‘पति-पत्नी के 15 साल से ज्यादा के भ्रष्ट शासन’ का जिक्र किया। मंच पर मौजूद नेता एक-एक करके नीतीश की तारीफ करते रहे। अपने चुनावी प्रचार में नीतीश ने बीजेपी को उसके सहयोग के लिए शुक्रिया कहा। हालांकि, उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन को यह कहते हुए वाजिब ठहराने की कोशिश की कि सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर समझौता नहीं किया जा सकता।

बता दें कि अररिया से आरजेडी के सरफराज आलम मैदान में हैं। उनके खिलाफ बीजेपी के प्रदीप सिंह मैदान में हैं। नजदीक स्थित पूर्णिया में बीजेपी के संतोष कुशवाहा और कांग्रेस के उदय सिंह में टक्कर है। वहीं, कटिहार में कांग्रेस के तारिक अनवर और जेडीयू के दुलाल गोस्वामी के बीच मुकाबला है। किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में 18 अप्रैल को वोटिंग है, जब अररिया में 23 अप्रैल को मतदान होगा।

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