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मुकेश सहनी: कभी मायानगरी के लिए छोड़ा था घर-बार, शाहरुख खान की ‘देवदास’ के सेट से सियासी जमीन तक का किया सफर, ‘सन ऑफ मल्लाह’ है दूसरा नाम

बाद में मुकेश का काम प्रधानमंत्री मोदी की नजर में आया। 2014 में सहनी ने BJP को समर्थन दिया और प्रचार भी किया। हालांकि, समर्थन देने के बाद भी वह बीजेपी से अलग हो गए, क्योंकि पार्टी ने उनके वादे (Schedule Caste में उनकी जाति को मंजूरी) को पूरा नहीं किया।

Bihar Elections 2020, Bihar Elections, Who is VIP Chiefबिहार में मछुआरों और नाविकों (जाति) में मल्लाह, साहनी, निषाद, बिंद सरीखी OBC की आबादी लगभग पांच फीसदी है। चूंकि, बिहार में मुख्य रूप से पहले इनका कोई बड़ा नेता था, इसलिए अब मुकेश सहनी इनके बड़े प्रतिनिधि के तौर पर देखे जाते हैं। (फोटोः फेसबुक)

Bihar Elections 2020 से पहले महागठबंधन में बड़ा सियासी बम फूटा। शनिवार को मौका था सीटों की घोषणाओं का, तभी Vikassheel Insaan Party (VIP) ने करीब आधे घंटे में भाई चारे की बात को माइक हाथ में आते ही बिगाड़ दिया। भरी पीसी में बागी तेवर दिखा कहा, “मेरे साथ धोखा हुआ है। पीठ पर खंजर घोपा गया है।” हैरत की बात है कि ऐसा कहने और करने से आधे घंटे पहले तक सब कुछ ठीक था। वह तेजस्वी के साथ होटल तक आए थे और तेज प्रताप के पास बैठे भी थी, पर उनके दिमाग में शायद कुछ और ही कहानी चल रही थी।

बहरहाल, फिलहाल सहनी भले ही राजनीति कर रहे हों, पर वे असल में सियासत के आदमी नहीं हैं। पेशे से वह बॉलीवुड के सेट डिजाइनर रहे हैं और जाने-माने सुपरस्टार शाहरुख खान की फिल्म देवदास का सेट की डिजाइनिंग कर चुके हैं। बताया जाता है कि वह जब 19 बरस के थे, तब मायानगरी यानी कि मुंबई के लिए घर-बार छोड़कर चले गए थे। सहनी के पास न तो तब पैसे थे और न ही जान पहचान।

मुकेश मूलतः दरभंगा जिले के सुपौल बाजार के रहने वाले हैं। मुंबई जाने के बाद उन्होंने वहां एक कॉस्मेटिक शॉप में काम किया। बतौर सेल्समैन। यही वह दौर था, जब उनके ख्यालों में हिंदी/बॉलीवुड फिल्में, टीवी सोप्स और शो के सेट डिजाइन करने का आइडिया कौंधा। मन था, कोशिश की तो बाद में मौका भी मिला और नितिन देसाई ने उन्हें देवदास का सेट बनाने का ऑफर दिया।

काम में सफल हुए तो उन्होंने अपने नाम से एक कंपनी बना ली। नाम दिया- ‘Mukesh Cineworld Private Limited’ (MCPL)। उन्होंने इसके अलावा इवेंट मैनेजमेंट का काम भी किया। देखते ही देखते उन्होंने इंडस्ट्री में काम के साथ नाम और पैसा भी कमा लिया। हालांकि, सामाजिक कार्य और राजनीति में दिलचस्पी के कारण उन्होंने इस फर्म को चलाने के लिए कुछ रिश्तेदार इसमें रखे, ताकि वह ‘सियासी हसरतों’ को भी वक्त दे सकें।

Bihar Election 2020 LIVE

साल 2010 में उन्होंने बिहार में Sahani Samaj Kalyan Sanstha की स्थापना की। दरभंगा और पटना में एक-एक दफ्तर खोले। इस फाउंडेशन के जरिए उन्होंने लोगों से कहा कि वे पढ़ें-लिखें और आगे बढ़ें। साथ ही सियासत में भी रुचि लें। 2015 में उन्होंने Nishad Vikas Sangh बनाया, जो कि जिला स्तर पर लोगों के लिए काम करता था।

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बाद में मुकेश का काम प्रधानमंत्री मोदी की नजर में आया। 2014 में सहनी ने BJP को समर्थन दिया और प्रचार भी किया। हालांकि, समर्थन देने के बाद भी वह बीजेपी से अलग हो गए, क्योंकि पार्टी ने उनके वादे (Schedule Caste में उनकी जाति को मंजूरी) को पूरा नहीं किया। फिर नवंबर, 2018 में उन्होंने खुद की पार्टी (VIP) बनाई। 2019 के आम चुनाव उनकी पार्टी महागठबंधन के हिस्से के तौर पर लड़ी, मगर वह जीत हासिल करने में नाकामयाब रही।

चूंकि, सहनी मल्लाह (मछुआरों) के नेता के तौर पर देखे जाते हैं, इसलिए उनका दूसरा नाम ‘सन ऑफ मल्लाह’ भी है। उनकी शादी कविता सहनी से हुई है, जो कि गृहिणी हैं और इनका एक बेटा (रणवीर) और एक बेटी (मुस्कान) है। मुकेश ‘चाय पर चर्चा’ की तर्ज पर ‘माछ पर चर्चा’ भी कराने को लेकर सुर्खियों में रहें। हेलीकॉप्टर्स से सफर करते हैं।

बता दें कि सूबे में मछुआरों और नाविकों (जाति) में मल्लाह, सहनी, निषाद, बिंद सरीखी OBC की आबादी लगभग पांच फीसदी है। चूंकि, बिहार में मुख्य रूप से पहले इनका कोई बड़ा नेता था, इसलिए अब मुकेश सहनी इनके बड़े प्रतिनिधि के तौर पर देखे जाते हैं।

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