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बिहार चुनाव परिणाम: जानिए चिराग ने कैसे 75 सीटों पर बिगाड़ा नीतीश का खेल, बनवा दिया गठबंधन का छोटा भाई

बिहार में करीब 30 ऐसी सीट रहीं जहां लोजपा ने 10 हजार से 50 हजार के बीच वोट जुटाए और जदयू को सीधा नुकसान पहुंचाया।

Bihar Election 2020, Chirag Paswanलोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने भाजपा को विधानसभा चुनाव में जीत की बधाई दी है।

बिहार चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। एनडीए राज्य में सबसे बड़े दल के तौर पर उभरा है। भाजपा, जदयू, हम और वीआईपी जैसी पार्टियों के गठबंधन से बने इस दल ने महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां) को हरा दिया। वहीं, इस चुनाव से पहले बिहार में एनडीए के साथ रही लोजपा को बड़ा नुकसान हुआ है। रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके बेटे चिराग के हाथ में आई इस पार्टी ने बिहार चुनाव में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है। हालांकि, अगर सीटवार आंकड़ों को देखा जाए तो सामने आता है कि लोजपा ने करीब 75 सीटों पर जदयू के जीतने के मौकों को खराब किया।

बता दें कि लोजपा ने 2015 में भाजपा के साथ ही चुनाव लड़ा था, तब उसे दो सीटें मिली थीं, जबकि इससे पहले 2010 में उन्हें तीन सीटें मिली थीं। लोजपा को सबसे ज्यादा 29 सीटें फरवरी 2005 को हुए विधानसभा चुनाव में मिली थीं। इस बार लोजपा को सीट भले ही एक मिली है, पर उसका वोट प्रतिशत पिछली बार के 4.83 फीसदी के मुकाबले 5.7 फीसदी पहुंच गया है।

लोजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव में जदयू उम्मीदवारों को हराने की बात कही थी। इसके अलावा उसने भाजपा के खिलाफ भी पांच सीटों पर प्रत्याशियों को टिकट दिए थे। लोजपा ने जिन नेताओं को टिकट दिए, उनमें कई नेता भाजपा से ही टूटकर चिराग के साथ जुड़े थे। इसके बावजूद उनकी पार्टी चुनाव में कोई खास फायदा नहीं उठा पाई।

जिस एकमात्र सीट पर लोजपा ने जीत दर्ज की, वुह है मैथानी की, जहां राजकुमार सिंह ने जदयू के विधायक नरेंद्र कुमार सिंह को 333 वोटों के अंतर से हरा दिया। हालांकि, इस एक जीत के साथ ही करीब 30 ऐसी सीट रहीं जहां लोजपा ने 10 हजार से 50 हजार के बीच वोट जुटाए और जदयू को नुकसान पहुंचाया। बिहार की 89 सीटों पर लोजपा ने 10 हजार से ज्यादा वोट हासिल कर वोटकटवा पार्टी की भूमिका साबित की।

किन सीटों पर जदयू को सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा?: जिन सीटों पर जदयू को लोजपा के चुनाव लड़ने की वजह से सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा, उनमें दिनारा की एक सीट शामिल रही। हां पर जदयू के जय कुमार सिंह चुनाव लड़ रहे थे। लोजपा ने यहां से भाजपा छोड़कर शामिल हुए राजेंद्र सिंह ने 51 हजार वोट हासिल किए, जबकि राजद के विजय मंडल को 59 हजार वोट मिले। इसके चलते यह सीट जदयू के हाथ से निकल गई और जयकुमार को 27 हजार वोट ही मिले।

दूसरी तरफ नोखा सीट पर लोजपा प्रत्याशी को 12 हजार वोट मिले। यहां जदयू प्रत्याशी 48 हजार वोट आए, जबकि विजेता राजद उम्मीदवार 65 हजार वोट पा गए। इसी तरह महाराजगंज सीट पर लोजपा के डॉ. देवरंजन सिंह 18 हजार वोट पाए। जदयू के हेमनारायण शाह यहां 46,849 वोट पाए और कांग्रेस के विजय शंकर दुबे ने 48,825 वोट पाकर यहां से जीत हासिल कर ली।

इसके अलावा रघुनाथपुर से लोजपा के मनोज कुमार सिंह ने 49,792 वोट प्राप्त किए। यहां जदयू नेता राजेश्वर चौहान को 26,162 वोट मिले, जबकि राजद प्रत्याशी हरिशंकर यादव 67,757 वोट पाकर विजेता रहे। सासाराम में जदयूके अशोक कुमार 56,880 वोट जीते, राजद के अशोक कुमार गुप्ता यहां 83,303 वोट पाकर जीते, जबकि लोजपा नेता रामेश्वर चौरसिया यहां 21 हजार से ज्यादा वोट पाकर वोटकटवा की भूमिका में रहे। गयघाट में भी राजद के विजेता प्रत्याशी को 48 हजार वोट मिले, जबकि जदयू के एमपी यादव 43 हजार वोट ही पा सके। लोजपा की कोमल सिंह ने यहां 30 हजार वोट हासिल किए और जदयू के जीतने का सपना चूर किया।

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