Bihar Elections 2020: महादलितों के टोले में तांडव मचा था, बहू-बेटियों पर अत्याचार, जबरन जेल में ठूंसा- CM नीतीश पर हमले का केस झेलने वालों की आपबीती

बिहार में एक ऐसा भी गांव है जहां के दलितों पर सीएम नीतीश कुमार पर जानलेवा हमले का मुकदमा चल रहा है। साल 2018 में सीएम नीतीश नंदन गांव गए थे। यह गांव बक्सर में है। आरोपियों के परिजन इस बात को लेकर बहुत परेशान हैं। आपबीती बताते-बताते बुजुर्गों की आंखों से आंसू झरने लगते हैं।

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नीतीश कुमार पर हमले के आरोप में इन महादलितों पर चल रहा है मुकदमा।

एक तरफ जोर-शोर से बिहार चुनाव का हल्ला है और दूसरी तरफ वे लोग भी हैं जो सालों से मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जानलेवा हमले का मुकदमा झेल रहे हैं। राजधानी पटना से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर बक्सर के नंदन गांव की आबादी लगभग 5000 है और यहां महादलितों के भी कई परिवार रहते हैं। जनवरी 2018 में इसी गांव में सीएम नीतीश कुमार पर पत्थरबाजी की घटना हुई थी। इसके बाद 2100 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया जिनमें से 91 नामजद हैं।

इसी मामले में अभियुक्त की बूढ़ी मां मन्ना देवी का कहना है कि वे लोग बदनाम हो गए हैं और इस घटना में सरकार के ही लोगों का हाथ था। उन्होंने कहा कि सच सामने आने के बाद भी उनके खिलाफ मुकदमा वापस नहीं लिया गया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक मन्ना देवी के बेटे और बहु दोनों ही मामले में अभियुक्त हैं। मन्ना देवी ने बताया, ‘हमें याद है कि प्रशासन ने कितना परेशान किया था। घर की बहू-बेटियों पर अत्याचार किया गया। उन्हें जबरदस्ती जेल में ठूंस दिया गया। कई ऐसे लोगों पर भी मुकदमा किया गया जो या तो विदेश में रहते हैं या मर चुके हैं।’

मन्ना देवी ने बताया, ‘हम कोर्ट कचहरी के चक्कर काट-काटकर परेशान हो गए हैं। हम गरीबों पर आखिर मुकदमा क्यों चलाया जा रहा है?’ नंदन गांव में महादलितों के टोले में आरा मशीन चलाने वाले रामजी पर मुख्य साजिशकर्ता के रूप में मुकदमा दर्ज है। रामजी का कहना है, मेरा आरजेडी से कोई रिश्ता नहीं है। उन्होंने कहा, अगर कोई घऱ की बहू-बेटी पर हाथ उठाएगा तो विरोध करना ही पड़ेगा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्रियों के करीबियों ने ही साजिश की थी। वे दलितों को बुलाकर ले गए और कहा कि मुख्यमंत्री से मिलवाएंगे। नंदन टोला के लोग सिर्फ मुख्यमंत्री को बताना चाहते थे कि सात निश्चय योजना के तहत उनके इलाके में काम नहीं हुआ है।

जेडीयू की तरफ से जांच करने वाले विद्यानंद विकल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को निर्दोषों से मुकदमा वापस लेने और जेल में बंद लोगों को रिहा करने पर विचार करना चाहिए। हालांकि अब तक उनकी रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री की तरफ से कोई अमल नहीं किया गया है।

नंदन गांव के रहने वाले जमुना राम पत्नी रामरती सहित मामले में आरोपी हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उनकी पत्नी की बहुत पिटाई की थी। तब से वह बीमार ही रहती हैं। दूसरे आरोपी संजय राम का कहना है कि घटना के बाद टोला सबके निशाने पर है। विकास का काम रुक गया है। वहीं एक और बुजुर्ग महिला कहती हैं कि अब विकास का नाम लेकर दोबारा आग में घी नहीं डालना है। यह आग वोट देकर ही बुझाई जा सकती है।

कैसे हुई पत्थरबाजी?
मुख्यमंत्री के काफिले पर पत्थरबाजी के मामले में पुलिस अब भी जांच कर रही है। विकल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि स्थानीय विधायक ददन पहलवान और मंत्री संतोष निराला को मुख्यमंत्री से पहले ही लोगों ने अपनी समस्याएं बता दी थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विधायक और मंत्री स्थिति को संभालने में नाकामयाब रहे। अगर ठीक से उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनी होतीं तो साजिश करने वालों को मौका ही न मिलता।

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