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बिहार: कुशवाहा के आने से महागठबंधन मजबूत, 2019 में कम हो सकती हैं भाजपा की 10 सीटें

हालांकि, बदले सियासी समीकरण और मोदी लहर में आई कमी की वजह से भाजपा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। साथ ही कुछ सीटों पर भाजपा और जेडीयू भी पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।

Author Updated: December 22, 2018 8:28 AM
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव। (फोटो-PTI)

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के महागठबंधन में शामिल होने से बिहार में विपक्ष मजबूत हुआ है। माना जाता है कि कोइरी समुदाय का करीब सात-आठ फीसदी वोट अब महागठबंधन के पक्ष में जाएगा। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी महागठबंधन ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर सकेगा। हालांकि, अभी तक महागठबंधन के दलों के बीच सीटों को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है लेकिन सभी दल जीत की संभावनाओं वाली सीटों की तलाश में जुटे हैं ताकि उन पर दावेदारी ठोकी जा सके। इधर, विपक्षी महागठबंधन से करीब दर्जन भर सीटों पर भाजपा के मौजूदा सांसदों को हार का सामना करना पड़ सकता है। इनमें से अधिकांश वैसी सीटें हैं जिस पर पहली बार भाजपा की जीत हुई थी। बता दें कि 2014 में 40 सीटों में से भाजपा 22, लोजपा 6, राजद 04, रालोसपा 03, जेडीयू 02, कांग्रेस-02 और एनसीपी-01 पर जीती थी।

इस बार विपक्षी महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के अलावा जीतनराम मांझी की हम, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और शरद यादव के लोकतांत्रिक जनता दल के साथ-साथ सीपीआई और सीपीआईएम भी शामिल है। इसलिए पिछले चुनावों में इन दलों को मिले वोट को अगर महागठबंधन का वोट मान लिया जाय और पिछले ही चुनाव की तरह वोटिंग पैटर्न मान लिया जाय तब भी करीब एक दर्जन सीटों पर भाजपा की हार हो सकती है। हालांकि, बदले सियासी समीकरण और मोदी लहर में आई कमी की वजह से भाजपा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। साथ ही कुछ सीटों पर भाजपा और जेडीयू भी पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।

पाटलिपुत्र: 2014 के आम चुनाव में राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और लालू यादव के भरोसेमंद रहे रामकृपाल यादव ने जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 3,83,262 वोट मिले थे। इस सीट पर दूसरे नंबर राजद अध्यक्ष लालू यादव की बेटी की मीसा भारती रही थीं। उन्हें कुल 3,42,940 वोट मिले थे। सीपीआई (एमएल) के रामेश्वर प्रसाद को 51,623 वोट मिले थे। इस तरह अगर महागठबंधन का वोट जोड़ा जाय तो पिछले चुनावी पैटर्न पर भाजपा को मिले कुल वोट से ज्यादा होता है। ऐसे में रामकृपाल यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्हें हार का भी सामना करना पड़ सकता है।

बेगूसराय: अभी हाल ही में बेगूसराय के सीटिंग सांसद भोला सिंह का निधन हो गया। 2014 में उन्हें नवादा की जगह यहां से उतारा गया था। तब उन्हें 4,28,229 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद के तनवीर हसन थे, उन्हें कुल 3,69,892 वोट मिले थे। सीपीआई के राजेंद्र प्रसाद सिंह को 1,92,639 वोट मिले थे। महागठबंधन को वोट जोड़ दिया जाय तो बेगूसराय में भाजपा उम्मीदवार के लिए जीत मुश्किल हो सकती है।

आरा: पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व गृह सचिव राजकुमार सिंह ने 2014 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर न केवल राजनीति में एंट्री मारी बल्कि सीधे जीतकर संसद पहुंचे और बाद में ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए। आरा सीट पर 2014 में उन्हें कुल 3,91,074 वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर राजद के श्रीभगवान सिंह कुशवाहा रहे। उन्हें कुल 2,55,254 वोट मिले थे। सीपीआई (एमएल) के राजू यादव को कुल 98,805 वोट मिले थे। यानी 2019 में आर के सिंह की राह मुश्किल लगती है। और बाकी बची जिन सीटों पर है भाजपा को हार का खतरा, उनका समीकरण जानने के लिए क्लिक करें..

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