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वाराणसी से चुनाव लड़ने पर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने क्यों लिया यू-टर्न? BJP एजेंट कहे जाने पर दिया जवाब

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने यू-टर्न लेते हुए पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। वहीं आजाद ने खुद को भाजपा एजेंट कहे जाने पर भी जवाब दिया है।

चन्द्रशेखर आजाद, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

 Lok Sabha Election 2019:  2019 लोकसभा चुनाव के चलते सियासत गरमाई हुई है। ऐसे में एक तरफ बयानों का तीखा सिलसिला देखने को मिल रहा है तो दूसरी ओर सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर भी खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में अब भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। अपने फैसले से यू-टर्न लेते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए दलित वोट संगठित रहना चाहिए और उनका संगठन सपा-बसपा-रालोद गठबंधन का समर्थन करेगा। बता दें कि करीब एक महीने पहले चंद्रशेखर आजाद ने पीएम मोदी को चुनावी मैदान में टक्कर देने का ऐलान किया था।

क्या बोले आजाद: चंद्रशेखर आजाद ने यू-टर्न के बाद कहा कि यदि सपा-बसपा-रालोद गठबंधन सतीश चन्द्र मिश्रा को वाराणसी सीट से टिकट देती है तो भीम आर्मी गठबंधन का समर्थन करेगी। मिश्रा बसपा के महासचिव और पार्टी का ब्राह्मण चेहरा हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि यदि सपा-बसपा गठबंधन वाराणसी से मिश्रा को उम्मीदवार बनाता है तो उन्हें अगड़ी जातियों का भी कुछ वोट मिल सकता है।

भाजपा के एजेंट: बता दें कि चंद्रशेखर आजाद ने पीएम मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में न उतरने का फैसला बुधवार (17 अप्रैल) को लिया। लेकिन वहीं हाल ही में बसपा सुप्रीमो मायावती ने आजाद को भाजपा का एजेंट बताते हुए उन पर दलित वोट बांटने का आरोप लगाया था।

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सतीश चन्द्र मिश्रा पर आजाद का आरोप: गौरतलब है कि इससे पहले चंद्रशेखर ने सतीश चन्द्र मिश्रा पर मायावती को गुमराह करने और दलित संगठन के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया था। मायावती की आलोचना पर चंद्रशेखर ने कहा, ‘मैं 16 महीने तक जेल में था। जेल में रहते हुए मैं रोज सोचता था कि बहनजी हमारा पक्ष लेंगी, हमारे लिए लड़ेंगी, लेकिन उन्होंने एक शब्द नहीं बोला। रिहाई के बाद मैंने उन्हें फोन करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।’ इसके बाद उन्होंने कहा, ‘हमारे अपने लोग हमें भाजपा का एजेंट बता रहे हैं, लेकिन मैं अभी भी चाहता हूं कि वह (मायावती) प्रधानमंत्री बनें। मैं मायावती के साथ यह वाकयुद्ध अब हमेशा के लिए खत्म करना चाहता हूं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमने भाजपा के लिए भीम आर्मी का गठन नहीं किया है।’

सपा-बसपा पर आजाद का वार: बता दें कि आजाद ने हाल ही में मध्य प्रदेश के मऊ में भीम राव आंबेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान 14 अप्रैल को चंद्रशेखर ने कहा था कि मायावती नहीं, बल्कि भीम आर्मी दलितों की ‘शुभेक्षु’ है। वहीं, इससे पहले उन्होंने दलितों के खिलाफ अत्याचार करने वाले अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की आलोचना की था। आजाद ने कहा था- उनके (अखिलेश) पिता संसद में कहते हैं कि वह मोदी को फख्र से प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। वह भाजपा के एजेंट हैं, हमारे नहीं।’

चंद्रशेखर के सवाल: इसके बाद चंद्रशेखर ने कहा, ‘उनसे सवाल करता हूं, इसलिए वे मुझे एजेंट कहते हैं। हां, मैं भीमराव आंबेडकर का एजेंट हूं… अगर मेरे अपने लोग मेरा रास्ता न रोकें, तो मैं आपको (अखिलेश) दिखा दूंगा कि सत्ता में आने पर हम आपको भी आपकी औकात बता सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है क्योंकि मैं नहीं चाहता कि इस फैसले से किसी भी रूप में भाजपा या मोदी को लाभ हो। हम सभी भाजपा की हार चाहते हैं।’

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