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भंडारा-गोंदिया उपचुनाव 2018: 12 गांवों का ऐलान- पानी की समस्या दूर करो तब डालेंगे वोट

दर्जन भर गांवों के ग्रामीण लंबे अरसे से सिंचाई और पेयजल की माकूल व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन राजनेताओं ने आज तक उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया। इसके विरोध में ग्रामीणों ने उपचुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया में हिस्सा न लेने का फैसला किया है। भाजपा सांसद नाना पटोले के इस्तीफे से यह सीट खाली हुई थी।

Author Published on: May 22, 2018 5:55 PM
लातूर और पास के गांवों में पानी की सप्लाई करने वाला सूखा पड़ा मंजरा डैम। (Photo Source: AP)

महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर 28 मई को उपचुनाव होने वाले हैं। लेकिन, संसदीय क्षेत्र के 12 गांवों के फैसले ने राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दर्जन भर गांवों के ग्रामीण लंबे अरसे से सिंचाई और पेयजल की माकूल व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन राजनेताओं ने आज तक उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया। इसके विरोध में ग्रामीणों ने उपचुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया में हिस्सा न लेने का फैसला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, वे किसी भी तरह के चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे। ग्रामीणों की आवाज उठाने के लिए बावनथाडी प्रकल्प संधर्ष समिति नाम से स्थानीय संगठन का गठन किया गया है। संस्था ने ग्राम सभा की एक बैठक में प्रस्ताव पास किया था, जिसमें मांग पूरी होने तक इस क्षेत्र में होने वाले किसी भी तरह के चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया गया था। भंडारा-गोंदिया लोकसभा उपचुनाव भी उसमें एक है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष बालकृष्ण गढ़वे ने बताया कि इस मार्च में उन्होंने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें बावनथाडी सिंचाई परियोजना के तहत संबंधित गांवों में पर्याप्त मात्रा में जल की आपूर्ति करने की मांग की गई थी। उनका दावा है कि स्थानीय प्रशासन के साथ सरकार ने भी ग्रामीणों की मांग पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद 23 मार्च को गोबरवाही गांव में प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद 12 गांवों के मतदाताओं ने उपचुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया था। ये गांव तुमसर तालुका के अंतर्गत आते हैं।

30 हजार है आबादी: उपचुनाव का बहिष्कार करने वाले गांवों में गणेशपुर, पवनारखारी, गोबरवाही, येदारबुची, सुंदर टोला, सीतासवांगी, गुदरी, खंदाल, सोधेपुर, हेती, भाम्नेवाड़ा और खैर टोला शामिल हैं। संघर्ष समिति उपाध्यक्ष शरद खोबरागडे ने बताया कि 12 गांवों की कुल आबादी तकरीबन 30,000 है। इन गांवों के लोग सिंचाई के अलावा पेयजल की समस्या से भी जूझ रहे हैं। भंडारा जिले का भी कामकाज देख रहे गोंदिया के कलेक्टर अभिमन्यु काले ग्रामीणों की बात से इत्तफाक नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित ग्रामीणों की मांग पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जा रहा है।

बीजेपी सांसद के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट: वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी नाना पटोले ने जीत हासिल की थी। उनका विभिन्न मुद्दों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मतभेद था। आखिरकार उन्होंने लोकसभा की सदस्यता त्याग दी और दोबारा से कांग्रेस में शामिल हो गए। ऐसे में यहां उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया था। भंडारा-गोंदिया लोकसभा उपचुनाव में इस बार 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। लेकिन, मुख्य मुकाबला भाजपा के हेमंत पाटले और राष्ट्रवादी कांग्रेस के मधुकर राव कुकड़े के बीच है। मधुकर राव भाजपा की टिकट पर तुमसर विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं।

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