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Lok Sabha Election 2019: नतीजा पूर्व सर्वे से बेपरवाह विपक्ष जुटा कवायद में

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): बीते तीन-चार दिनों में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, शरद यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई अन्य दलों के नेताओं से बातचीत की है।

Author May 22, 2019 1:46 AM
विपक्षी दल (फाइल फोटो)

अजय पांडेय

Lok Sabha Election 2019: अपनी जीत के प्रति आश्वस्त कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने न केवल नतीजा पूर्वानुमानों को सिरे से खारिज किया है, बल्कि केंद्र में अपनी सरकार कायम करने की कवायद और तेज कर दी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक तमाम विपक्षी नेताओं ने इन पूर्वानुमानों को विपक्ष बीच हताशा कायम करने की कोशिश करार दिया है।

विपक्षी दलों की एका के पैरोकार और सूत्रधार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री व तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू चुनाव होने के बाद सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। बीते तीन-चार दिनों में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, शरद यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई अन्य दलों के नेताओं से बातचीत की है। वे बार-बार यह दावा भी करना नहीं भूल रहे कि विपक्षी दलों की जीत तय है और केंद्र में साझा सरकार का गठन भी निश्चित है।

विपक्षी एकजुटता की कवायद के बारे में कहा गया है कि कांग्रेस समेत तमाम अन्य दलों ने भी अपने अपने सर्वे और नतीजा पूर्व सर्वे करा रखे हैं। दूसरी ओर जहां-जहां विपक्षी दलों की सरकारें हैं, वहां से उन्हें यह जानकारी भी है कि असल में कितनी सीटें मिल सकती हैं। मसलन, कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में पार्टी को अपने दम पर 125 से 140 सीट तक मिलने का भरोसा जताया गया है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को 200 तक सीटें मिलने का अनुमान है। पार्टी ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, पंजाब आदि अपने शासन वाले तमाम राज्यों सहित देश भर से अपनी रिपोर्ट भी मंगवा ली है।

कांग्रेस नेता मुतमईन हैं कि यूपीए के लिए कुछ अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाना कोई मुश्किल काम नहीं होगा। इसी प्रकार ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में, नायडू आंध्र प्रदेश में और कांग्रेस की अगुआई वाला विपक्षी दलों का विभिन्न राज्यों का गठबंधन भी मानकर चल रहा है कि उसे पर्याप्त सीटें मिलने वाली हैं। कांग्रेस ने भले बाद में अपने बयान में थोड़ी तब्दीली कर ली लेकिन एक बार को यह जरूर कहा कि यदि भाजपा को रोकने के लिए जरूरी हुआ तो कांग्रेस प्रधानमंत्री पद के अपने दावे को भी छोड़ सकती है।

पार्टी कर्नाटक में ऐसा करके दिखा भी चुकी है। उसने ज्यादा सीटें होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद जनता दल (सेकु) को दे दिया। हालांकि अब गुलाम नबी आजाद और अन्य पार्टी नेता कह रहे हैं कि वे प्रधानमंत्री पद पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। कहा यह भी जा रहा है कि दिल्ली से लेकर कोलकाता तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू की भागदौड़ का असली मकसद कांग्रेस की अगुआई में विपक्ष की सरकार बनाने के लिए संबंधित दलों को तैयार करना है।

विपक्षी दलों की उम्मीदें उत्तर प्रदेश पर टिकी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर पार्टी के तमाम नेता यह कह चुके हैं कि कांग्रेस भले सपा-बसपा-रालोद गठबंधन का हिस्सा न हो लेकिन भाजपा को हराने के मुद्दे पर इन सभी दलों की विचारधारा एक है और चुनाव बाद ये सभी दल एक मंच पर आ सकते हैं। ऐसा अनुमान है कि यूपी का यह महागठबंधन बहुत बेहतर नतीजे ला सकता है। शायद यही वजह है कि नायडू ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती से भी मुलाकात की है।

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