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लोकसभा चुनाव 2019: बिहार के बांका में दिग्गजों का दंगल- मौजूदा और दो पूर्व सांसदों में टक्‍कर

कभी समाजवादियों का गढ़ रहा बांका लोकसभा क्षेत्र आज तिकोने चुनावी संघर्ष में फंसा है। यहां वर्तमान सांसद राजद के जयप्रकाश नारायण यादव, पूर्व सांसद व बेलहर से जद (एकी) विधायक गिरधारी यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की पत्नी पूर्व सांसद पुतुल देवी के बीच मुकाबला है।

Author बांका | Updated: April 16, 2019 2:35 PM
बिहार के बांका में वर्तमान सांसद राजद के जयप्रकाश नारायण यादव, पूर्व सांसद व बेलहर से जद (एकी) विधायक गिरधारी यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की पत्नी पूर्व सांसद पुतुल देवी के बीच मुकाबला है।

कभी समाजवादियों का गढ़ रहा बांका लोकसभा क्षेत्र आज तिकोने चुनावी संघर्ष में फंसा है। यहां वर्तमान सांसद राजद के जयप्रकाश नारायण यादव, पूर्व सांसद व बेलहर से जद (एकी) विधायक गिरधारी यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की पत्नी पूर्व सांसद पुतुल देवी के बीच मुकाबला है। मसलन लड़ाई वर्तमान व पूर्व सांसदों के बीच ही है। वैसे यहां कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। यहां के 16 लाख 87 हजार 940 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग दूसरे चरण यानी 18 अप्रैल को करेंगे। बांका का चुनाव हमेशा बांका ही रहा है। तभी 2009 में बतौर निदर्लीय उम्मीदवार दिग्विजय सिंह को यहां के मतदाताओं ने विजयमाला पहनाई। फिर उनके आकस्मिक निधन के बाद 2010 में हुए उपचुनाव में इनकी पत्नी पुतुल देवी को सांसद चुना। वे तब निर्दलीय ही उम्मीदवार बनी थीं। फिर बाद में भाजपा में शामिल हो 2014 का चुनाव लड़ीं। मगर राजद के जयप्रकाश नारायण यादव से मोदी लहर के बावजूद हार गईं। इस बार ये बागी बन चुनाव लड़ रही है। जिसका सीधा नुकसान जदयू के गिरधारी यादव को हो सकता है।

पुतुल देवी के चुनावी कामकाज संभाल रहे अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह लड़ाई बांका के सम्मान और दादा के मान की है। बांका के लोग दिवंगत दिग्विजय सिंह का नाम बड़े गर्व और सम्मान से लेते हैं। इन्हें ये प्यार से दादा कहकर पुकारते हैं। बांका इन्हें भूल नहीं सकता। इनका किया काम बोलता है।

खड़हरा गांव के पुरुषोत्तम मिश्र हाथ से इशारा कर बताते हैं कि यह रेलवे लाइन दिग्विजय सिंह की देन है। यहां बांका-पटना इंटरसिटी ट्रेन रोजाना चलती है। मगर साथ ही यह भी कहते है कि यह गांव पीने के पानी की किल्लत से बेहाल है। राज्य के राजस्व व भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल का कहना है कि बांका में विकास काफी हुआ है। कई काम हुए हैं। वे 1990 में पहली दफा विधायक बने थे। पंजवारा माराटिकर गांव के सिराजुद्दीन कहते हैं राजद के पक्ष में माई समीकरण दरकने वाला नहीं है। वे बाराहाट मदरसा में शिक्षक है।

वैसे 2014 के चुनाव में मिले वोटों पर सरसरी निगाह डालें तो इस बार के हालात की तस्वीर कुछ साफ नजर आती है। उस वक्त भी तिकोना संघर्ष था। राजद के जयप्रकाश नारायण यादव 285150 मत हासिल कर जीते थे। पुतुल कुमारी भाजपा को 275006 मत मिले थे। वे दूसरे स्थान पर थी। तीसरे नंबर पर भाकपा के संजय कुमार यादव थे। जिन्हें 220708 वोट प्राप्त हुए थे। मसलन जातीय हिसाब-किताब से देखे तो दो यादव उम्मीदवार होते हुए भी फायदा राजद को ही हुआ था। इस दफा भी दो यादव जद (एकी) के गिरधारी यादव और राजद के जयप्रकाश नारायण यादव हैं। पुतुल देवी निर्दलीय हैं। पुतुल देवी की बेटी श्रेयसी सिंह भी गांव-गांव घूम वोट मांग रही हैं। दादा के सम्मान की दुहाई देती है। ध्यान रहे श्रेयसी सिंह ने निशानेबाजी में राष्ट्रमंडल खेल में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता है।

राजग के जद (एकी) उम्मीदवार गिरधारी यादव 1996 और 2004 में यहां से जीत कर सांसद बन चुके हैं। तीन दफा 1998 और 1999 और 2009 में दिग्विजय सिंह भी जीते हैं। 1952 में सुषमा सेन यहां से पहली सांसद बनीं। 1957 में शकुंतला देवी, 1967 में जनसंघ के बेनी शंकर शर्मा, 1971 में शिवचन्द्रिका, 1977 में मधु लिमये, 1973 में हुए उपचुनाव में भी मधु लिमये को ही विजयश्री मिली थी। पर वे 1980 का चुनाव हार गए थे। दो दफा जार्ज फर्नांडिस ने भी 1985 के आम चुनाव और 1986 के उपचुनाव में अपनी किस्मत यहां आकर आजमाई थी। मगर उन्हें सफलता नहीं मिली। 1980 में चंद्रशेखर सिंह और 1984 में उनकी पत्नी मनोरमा सिंह जीती। 1989 में प्रताप सिंह ने बाजी मारी थी। चंद्रशेखर सिंह केंद्र में मंत्री और बिहार में मुख्यमंत्री बने।

बांका संसदीय क्षेत्र केे जातीय समीकरण की बात करें तो यहां तीन लाख के करीब यादव मतदाता हैं। दो लाख मुसलिम हैं। सवर्ण मतदाता साढ़े तीन लाख हैं। इनमें सवा लाख राजपूत हैं। साढ़े तीन लाख पिछड़ी व दलित-महादलित मतदाता हैं। छह विधानसभा क्षेत्र सुलतागंज, अमरपुर, धोरैया, बांका, कटोरिया, बेलहर इस संसदीय क्षेत्र में आते हैं। इनमें चार विधानसभा सीटों पर बीजेपी की सहयोगी जेडी(यू) का कब्जा है। बांका सीट भाजपा और कटोरिया सीट राजद के पास है।

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