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Lok Sabha Election 2019: पिछड़ा वर्ग और दलित गोलबंदी पर टिका चुनाव

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): मतदान के लिए महज चंद रोज बाकी हैं और भाजपाई जिला पार्षद के तौर पर सियासत की शुरुआत करने वाले दूसरी बार के कांग्रेसी विधायक काजल की भलमनसाहत भी कपूर की अंदरूनी दिक्कतें बढ़ा रही है।

Author Published on: May 16, 2019 5:39 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। (Photo: PTI)

सुभाष मेहरा

Lok Sabha Election 2019: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा-चंबा संसदीय चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार पवन काजल के लिए पिछड़ा वर्ग और दलित तबके की गोलबंदी का चमत्कार ही भाजपा उम्मीदवार किशन कपूर के लिए चुनौती बन सकता है, वरना कमजोर प्रचार का खतरा काजल की दहलीज पर मंडरा रहा है। बेशक चुनाव प्रचार अभियान में कपूर से पिछड़ने और भाजपा नेताओं के धुआंधार हमले सह रहे काजल के इस अभियान को जातिगत समीकरणों से काट कर वीरभद्र ने मुकाबले को कांटे का बनाया जरूर है। मगर निर्वतमान सांसद शांता कुमार की कारगुजारी पर वोट मांगने की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भाजपाई प्रचार ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें भी खड़ी की हैं।

राष्ट्रवाद और सेना के लक्षित हमले को चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही भाजपा कम से कम उन शांता की कारगुजारियों को लेकर भी रक्षात्मक मुद्रा में है जिन्होंने पालमपुर से बाहर निकल कर संसदीय क्षेत्र की दिक्कतें जानने की कभी जहमत ही नहीं उठाई। जाहिर है इतनी नाराजगी के बीच भी अब वोट के लिए गिड़गिड़ा रहे शांता के प्रति लोग अभी भी अंदरूनी तौर पर प्रचंड गुस्से में है, तो किसी को फ टकार देने के लिए मशहूर कपूर की बदजुबानी भी जनता के दिलों से निकली नहीं है।

मतदान के लिए महज चंद रोज बाकी हैं और भाजपाई जिला पार्षद के तौर पर सियासत की शुरुआत करने वाले दूसरी बार के कांग्रेसी विधायक काजल की भलमनसाहत भी कपूर की अंदरूनी दिक्कतें बढ़ा रही है। कहना न होगा कपूर के कड़क रवैये की जानकारी हासिल करने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को चंबा की रैली में यह खुद तसदीक करने की नौबत आ गई कि कपूर केसभी कामों को नजरअंदाज करके आप मुझे वोट दीजिए।

लिहाजा वीरभद्र पर आश्रित काजल को चक्रव्यूह में घेरने के लिए शाह के बाद पालमपुर में स्मृति ईरानी की रैली के बाद दूसरे प्रदेशों के कई भाजपा नेताओं समेत जयराम सरकार के वजीरों ने हलका स्तर पर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चेबंदी कर रखी हैं। चौदह बरसों में चार चुनावी लड़ाइयां फ तह करने के बाद पांचवी जंग के लिए काजल के सामने दिक्कत यह है कि राहुल और प्रियंका गांधी जैसे बड़े नेता का चुनावी साथ उन्हें मिला नहीं और सामने भाजपा की फ ौज खड़ी है।

बहरहाल काजल का संसदीय भविष्य तय करने के लिए वीरभद्र का जोर पिछड़ों और दलितों की तकरीबन 55 फीसद वोट हिस्सेदारी को कांग्रेस के पक्ष में तबदील करने में है। सब जानते हैं कि प्रचार के अति विश्वास में आगे बढ़ रही भाजपा की अंदरूनी परेशानियों में इन दोनों समुदाय के संभावित ध्रुवीकरण ने इजाफ ा कर रखा है। कांग्रेस बनाम भाजपा उम्मीदवारों के मध्य मिलनसारिता और कड़क बर्ताव को लेकर चल रहे इस चुनाव के सियासी परीक्षण में भी लोगों को फ तवा सुनाना है।

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