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छोटी बहू अपर्णा यादव बोलीं- ससुर मुलायम और सास साधना गुप्ता के चलते लड़ रही हूं चुनाव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को अपर्णा यादव को लखनऊ कैंट से टिकट दिया है।

पति प्रतीक यादव के साथ अपर्णा यादव। (Photo Source: Indian Express Archive)

अपर्णा यादव राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, वह सामाजिक कार्य करके ही खुश थीं, लेकिन उनके ससुर मुलायम सिंह यादव और सास साधना गुप्ता ने उन पर राजनीति में सक्रिय होने के लिए दबाव बनाया। अपर्णा मुलायम के दूसरे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। एनडीटीवी ने अपर्णा के हवाले से लिखा है, ‘उन्होंने मुझ पर बहुत दबाव बनाया, तब मैंने कहा कि मुझे कहीं से भी टिकट दे दो मैं जीत जाऊंगी।’ मुलायम सिंह के छोटे बेटे की पत्नी अपर्णा इस साल प्रदेश के विधानसभा चुनाव से राजनीति में अपना डेब्यू करने जा रही हैं। अपर्णा इस बार लखनऊ कैंट सीट से चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर उनके सामने भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी चुनाव लड़ रही हैं। अपर्णा यादव परिवार की 22वीं सदस्य हैं, जो राजनीति में कदम रख रही हैं।

अपर्णा यादव को पिछले साल मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ कैंट से उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने भी उन्हें लखनऊ कैंट से टिकट दे दिया। अपर्णा ने कहा, ‘केवल यादव परिवार पर ही सवाल क्यों उठा जा रहे हैं? नेताओं के कई बेटे और बेटियां राजनीति में सक्रिय हैं। जब वकील का बेटा वकील बनता है और इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बनता है तो कोई कुछ नहीं कहता।’

मुलायम सिंह यादव की जगह अखिलेश के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद लखनऊ कैंट से उन्हें टिकट दिए जाने को लेकर संशय बना हुआ था। क्योंकि अपर्णा अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव के गैंग की समझी जाती रही हैं। यह भी खबरें आई थीं कि शिवपाल समर्थक गैंग अपर्णा यादव को अखिलेश यादव की जगह पार्टी के युवा चेहरे के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा था कि अपर्णा यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित किया जा सकता है।

शिवपाल यादव की तारीफ करते हुए अपर्णा ने उन्हें समाजवादी पार्टी की रीढ़ की हड्डी बताया। उन्होंने कहा, ‘नेताजी(मुलायम सिंह यादव) मेरे रोल मॉडल हैं। अखिलेश भईया यूथ आईकॉन हैं। लेकिन शिवपाल चाचा समाजवादी पार्टी की रीढ़ की हड्डी हैं।’ सूत्रों के मुताबिक मुलायम सिंह यादव अपने बेटे प्रतीक को राजनीति में नहीं लाना चाहते थे, क्योंकि वे चाहते थे कि अखिलेश उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी बने। साधना गुप्ता ने कथित तौर पर मुलायम सिंह यादव पर दबाव बनाया कि कम से कम अपर्णा यादव को पार्टी में लाया जाए।

अपर्णा के लिए राजनीति में डेब्यू थोड़ा मुश्किल रहेगा। अपर्णा ऐसी सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जहां से समाजवादी पार्टी कभी नहीं जीती। उनके सामने भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी हैं, जो कि पहले कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रही हैं। उन्होंने चार महीने पहले ही भाजपा ज्वाइन की है। अभी वे लखनऊ सीट से विधायक भी हैं। अपर्णा ने रीता के बारे में कहा, ‘रीता जी मेरी सीनियर हैं। मेरे उनके साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन जब से मुझे वहां का उम्मीदवार बनाया गया है, वे मुझ पर निशाने साधने के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे मुझे दुख हुआ।’

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