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‘दिलों’ का गठबंधन है हमारा : अखिलेश यादव

'नेताजी और मायावती एक साथ आए यह बड़ा संदेश है और रालोद के साथ हुआ गठबंधन आम लोगों का है। मैं समझता हूं कि मुलायम यह बात जानते हैं कि आज देश बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। जो परिस्थितियां आज देश के सामने है, वे दूसरी हैं। संविधान पर सीधी चोट हो रही है और और संविधान से मिले हुए अधिकारों को छीना जा रहा है'।

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दिनेश शाक्य

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भाजपा के विजय रथ को रोकने की दिशा में सपा-बसपा और रालोद के गठबंधन को लेकर काफी उत्साहित अखिलेश यादव से सैफई स्थित आवास पर जनसत्ता से बातचीत की।

सवाल : मुलायम और मायावती को मिलाकर गठबंधन बनाने में कितनी मेहनत करनी पड़ी आपको?
’ नेताजी और मायावती एक साथ आए यह बड़ा संदेश है और रालोद के साथ हुआ गठबंधन आम लोगों का है। मैं समझता हूं कि मुलायम यह बात जानते हैं कि आज देश बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। जो परिस्थितियां आज देश के सामने है, वे दूसरी हैं। संविधान पर सीधी चोट हो रही है और और संविधान से मिले हुए अधिकारों को छीना जा रहा है। आज अगर हम देखें तो पूरा का पूरा भाजपा का प्रचार झूठ पर है। पुराने वादे याद नहीं किए जा रहे। जनता उनसे पूछना चाहती है कि 2014 में जो वादे किए थे वे कितने पूरे हुए अच्छे दिन के नारे का क्या हुआ।

सवाल : सपा-बसपा-आरएलडी के गठबंधन में अगर कांग्रेस साथ में होती तो कितना फायदा होता?
’ कांग्रेस गठबंधन में नहीं आना चाहती थी और मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस को जरूरत है क्योंकि उसका अपना रास्ता है। उसकी अपनी समझ है। वह भाजपा को रोकना नहीं चाहती। यूपी में कांग्रेस कैसे मजबूत हो उसका वह लक्ष्य है।

सवाल : गठबंधन अगर जीतता है तो फिर कौन प्रधानमंत्री होगा?
’ गठबंधन की कोशिश है कि देश में नई सरकार बने और नई सरकार के नए प्रधानमंत्री बनें। हम किसी को हटाना नहीं चाहते, अगर उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखे तो वे नोटबंदी पर कुछ बताना नही चाहते हैं। जीएसटी को सही ढंग से लागू नहीं किए जाने से व्यापारी नाराज हैं इसलिए तालकटोरा में व्यापारियों को मनाने की कोशिशें की गई। मैं इसका जबाब पहले ही दे चुका हूं कि देश मे नई सरकार बने, नया प्रधानमंत्री बने। भाजपा नया देश नही बना सकती है। नई पार्टी और नया प्रधानमंत्री इस देश को नया बनाएगा ।

सवाल : आपके चाचा (शिवपाल यादव) आप के गठबंधन को चुनौती दे रहे हैं तो इससे मुकाबला कैसे करेंगे?
’ हमारे गठबंधन का मुकाबला भाजपा से है। मैं यह समझता हूं कि इसके आसपास कोई दल है ही नहीं। जनता उनको बिल्कुल नकार देगी क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही तय करेगी और जनता के फैसले से ही जनमत मिलेगा ओर जनता ने करके भी दिखाया है। अभी उपचुनाव जब हुए थे तब इसी गठबंधन ने भाजपा का हरा दिया था। कभी कल्पना नही कर सकते थे कि गोरखपुर सीट भी भाजपा हार सकती है।

सवाल : आजमगढ़ संसदीय सीट पर भाजपा ने आप के मुकाबले कमजोर उम्मीदवार दिया है, ऐसा लगता है?
’ कुछ लोकसभा सीटें ऐसी होती हैं, जहां से समाजवादी हमेशा जीतते रहे हैं या फिर उस विचारधारा से वहां के लोग जुड़ जाते हैं। मैं समझता हूं कि मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, फिरोजाबाद, बदायूं के बाद समाजवादियों के सबसे करीब कोई सीट है तो वह आजमगढ़ की सीट है। पिछले चुनाव में नेताजी इस सीट से चुन कर आए थे।

सवाल : भाजपा के लोग आप की सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि आपने अपनी सरकार में अपराधियों को संरक्षण दिया। उन सभी को मौजूदा सरकार ने जेल में भेज दिया है।
’ भाजपा नेताओं को देखना चाहिए कि चुनाव आयोग में उन्होंने जो अपने दस्तावेज जमा किए, उसमें क्या क्या है। राज्य स्तरीय नेताओं की बात तो अलग राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को भी देख लें। वे लोग नफरत को बढ़ा रहे हैं। वे एक-दूसरे के दिलों में खाई खोदने का काम कर रहे हैं उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं। यह भाजपा है जो आज अपराधी बना रही है और अपराधियों का भी सम्मान कर रही है।

सवाल : सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन 2022 में भी जारी रहेगा?
’ यह गठबंधन आगे भी चलेगा। इसी तरह से चलता रहेगा क्योंकि यह विचारों का संगम है। यह दिलो का गठबंधन है।

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