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Lok Sabha Election 2019: नतीजों के बाद फिर छिड़ेगी बहस उस गठबंधन पर जो हुआ नहीं

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): चुनाव सर्वेक्षण को लेकर शीला दीक्षित ने कहा कि जब तक अंतिम तौर पर नतीजे घोषित नहीं हो जाते तब तक इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी एक्जिट पोल के नतीजों को खारिज किया है।

Author Published on: May 23, 2019 2:20 AM
अरविंद केजरीवाल और शीला दीक्षित। (file pic)

अजय पांडेय

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा के इस चुनाव में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित सहित पार्टी के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। दीक्षित खुद उत्तर-पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से पार्टी की उम्मीदवार हैं, जबकि उनके अलावा पार्टी के तीन प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, अरविंदर सिंह लवली और अजय माकन भी क्रमश: चांदनी चौक, पूर्वी दिल्ली और नई दिल्ली से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। इनके अलावा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया, कांग्रेस में पूर्वांचल का चेहरा कहे जाने वाले महाबल मिश्रा और सेलिब्रेटी के तौर पर चुनाव मैदान में उतारे गए अंतरराष्टÑीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह के दमखम की हकीकत भी चुनाव परिणामों से सामने आने वाली है।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष पद से अजय माकन का इस्तीफा स्वीकार कर अस्सी साल की उम्र में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को सूबे में कांग्रेस की कमान सौंप दी। दीक्षित को यह अहम जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे सबसे बड़ी दलील यह दी गई कि समूची दिल्ली यह मानती है कि अपने 15 वर्ष के कांग्रेसी शासनकाल में उन्होंने दिल्ली को चमकाने का काम किया और इस बात से विरोधी भी सरोकार रखते हैं। दीक्षित की उसी लोकप्रियता के अनुमान के आधार पर पार्टी ने उन्हें खुद ही चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार किया और उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से उम्मीदवार बना दिया जहां उनका मुकाबला प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडेय से है।

चुनाव सर्वेक्षण को लेकर शीला दीक्षित ने कहा कि जब तक अंतिम तौर पर नतीजे घोषित नहीं हो जाते तब तक इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी एक्जिट पोल के नतीजों को खारिज किया है। विभिन्न टीवी चैनलों पर 19 मई को प्रसारित इन एक्जिट पोल में एक-दो चैनलों को छोड़ बाकी तमाम ने दिल्ली की सातों सीटें भाजपा की झोली में डाल दी हैं।

कांग्रेस ने चांदनी चौक से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। अग्रवाल चांदनी चौक से पहले भी कई बार संसद का सफर तय कर चुके हैं। इस बार उनका मुकाबला भाजपा उम्मीदवार व केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन से है। आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता भी मुकाबले में हैं। इसी तरह नई दिल्ली में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार व सांसद मीनाक्षी लेखी से है। यहां पर आम आदमी पार्टी के बृजेश गोयल चुनाव मैदान में हैं। पूर्वी दिल्ली में एक अन्य पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली भाजपा के गौतम गंभीर व आम आदमी पार्टी की आतिशी से मुकाबला कर रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि गुरुवार को आने वाले चुनाव परिणामों से यह भी तय होना है कि प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित की अगुआई में पार्टी के जिन नेताओं ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन नहीं करने की जबरदस्त पैरवी की थी वे किस हद तक सही थे। यदि कांग्रेस बेहतर करती है तो जाहिर तौर पर उसका सेहरा दीक्षित के सिर बंधेगा लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं कि यदि पार्टी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई तो उसका ठीकरा भी दीक्षित और उनके करीबियों पर ही फोड़ने की कोशिश होगी।

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