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राजस्थान: विधानसभा हारने के बाद लोकसभा चुनाव जीतने के लिए क्या कर रही बीजेपी, जानिए

लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने संगठन में नेताओं की भूमिका पर भी विशेष बल दे रही है। इसके लिए पिछले महीने उसने 25 सीटों के लिए संयोजक, सह-संयोजक और प्रभारियों की नियुक्ति की। इस महीने अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अर्जुन राम मेघवाल ने दौरा किया।

Author February 11, 2019 2:03 PM
राजस्थान में विधानसभा चुनाव गंवाने के बाद बीजेपी का फोकस यहां की लोकसभा सीटों पर है. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

पिछले साल राजस्थान विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से हार का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की 25 लोकसभा सीटों पर अपना दबदबा कायम करने की तैयारी तेज़ कर दी है। वहीं, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार भी आगामी चुनाव को चुनौती और अवसर दोनों के रूप में देख रही है। यही वजह है कि सीएम अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पार्टी घोषणापत्र के दावों को जमीन पर उतारने की कोशिश में जुटे हैं। इतिहास गवाह है कि राजस्थान में जिस पार्टी की सरकार रही है, लोकसभा चुनाव में उसी की धाक देखने को मिली है। लेकिन, कुछ अपवाद भी रहे हैं जो इस सोच को गलत ठहराते हैं। 1998 में भारी बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाने वाली कांग्रेस को 1999 के लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। उस दौरान राज्य की 25 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस महज 9 सीटें हाथ लगी थीं। जबकि, उसके पहले कांग्रेस के पास 18 लोकसभा सीटें थीं।

विधानसभा चुनावों में मिली शिकस्त के बाद बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। बीजेपी की रणनीति में गहलोत सरकार की नीतियों में व्याप्त खामियों को उजागर करना और प्रदेश भर में उसके खिलाफ मुहिम खड़ा करना पहला लक्ष्य है। इसके अलावा बीजेपी लोगों में यह विश्वास पैदा कर रही है कि उसने सिर्फ 0.5 फीसदी वोटों के अंतर से हार नसीब हुई है। ख्याल रहे कि जैसे ही राजस्थान की गहलोत सरकार ने किसानों के कर्ज माफ किए उसी दौरान बीजेपी ने उसके सामने चुनौती पेश कर दी। बीजेपी का दावा है कि किसानों की वास्तविक कर्जमाफी में 18,000 करोड़ रुपये कम पड़ गए हैं। क्योंकि, कांग्रेस ने 59 लाख किसानों के 99,995 करोड़ रुपये माफ करने की बात कही थी। बीजेपी ने इसम मुद्दे को लेकर 28 जनवरी को प्रदेश व्यापी प्रदर्शन किया था और 8 फरवरी को इसके कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारियां भी दीं।

लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने संगठन में नेताओं की भूमिका पर भी विशेष बल दे रही है। इसके लिए पिछले महीने उसने 25 सीटों के लिए संयोजक, सह-संयोजक और प्रभारियों की नियुक्ति की। इस महीने अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अर्जुन राम मेघवाल ने दौरा किया। पार्टी का यूथ विंग भी अपने स्तर पर कई सारे कार्यक्रमों को आयोजित कर रहा है।

2017 के आखिर में जब राजस्थान में बीजेपी की सरकार थी, तब प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हुईं जिनकी वजह से एक बड़ा तबका पार्टी से नाराज हो चुका था। वाम दलों के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन, गाय को लेकर मॉब लिंचिंग, नोटबंदी और जीएसटी, गुर्जर आंदोलन, पदमावत मूवी और गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर जैसे मसलों ने चौतरफा ढंग से बीजेपी को नुकसान पहुंचाया और कांग्रेस को इसका लाभ मिला। अब बीजेपी किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस की सरकार पर लगातार हमले बोल रही है। स्थिति को समझते हुए प्रदेश सरकार भी किसानों के मसले पर अपनी संवेदनशीलता त्वरित गति से जाहिर कर रही है।

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