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आडवाणी के बाद कटेगा जोशी का टिकट? समझें कानपुर बुंदेलखंड की सीटों का गणित

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): एक वक्त था जब बीजेपी के हर कार्यकर्ता की जुबां पर एक ही नारा था बीजेपी की तीन धरोहर अटल ,अडवाणी और मुरली मनोहर। लेकिन अब वक्त बदल गया है।

Author Published on: March 22, 2019 3:29 PM
अटल बिहारी वाजपेयी ,लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: 90 के दशक में बीजेपी के हर कार्यकर्ता की जुबां पर एक ही नारा था बीजेपी की तीन धरोहर अटल ,अडवाणी और मुरली मनोहर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के निधन के बाद बीजेपी के पास दो धरोहर लाल कृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी के रूप में बची है। लेकिन बीजेपी के बदले स्वरुप में बची दोनों धरोहरों को नकार दिया है। बीजेपी ने बीते गुरुवार 184 लोकसभा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। इस पहली लिस्ट में ही अपने बुजर्ग नेता लाल कृष्ण आडवानी की टिकट काट दी। वहीं कानपुर से बीजेपी सांसद डॉ मुरली मनोहर जोशी का भी टिकट कटना तय माना जा रहा है। जबकि डॉ जोशी लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके है।

यूपी की 80 सीटों में से 28 कैंडिडेट का नाम: बीजेपी ने बीते गुरुवार को 184 लोकसभा सीटो के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। जिसमे से उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 28 कैंडिडेट के नामों का एलान कर दिया गया है। यदि कानपुर बुंदेलखंड की बात की जाए तो पहली लिस्ट में मिश्रिख लोकसभा सीट से सांसद अंजूबाला का टिकट काट दिया गया। बीजेपी ने मिश्रिख लोकसभा सीट से अशोक रावत को कैंडिडेट बनाया है।

कानपुर बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों में बीजेपी नए चहरे उतार रही भाजपा: जानकारी के मुताबिक कानपुर बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों में बीजेपी नए चहरे उतारने जा रही है। कानपुर बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों में कानपुर ,अकबरपुर ,फरुखाबाद ,कन्नौज ,मिश्रिख ,इटावा ,जालौन ,झाँसी ,हमीरपुर ,बाँदा आती है। भारतीय जनता पार्टी कानपुर बुंदेलखंड को अपना सबसे मजबूत किला मानती है। अब बीजेपी अपने इस किले को बचाने के लिए नए सिपाहियों की नियुक्ति कर करने की योजना बना रही है। बीते 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कानपुर बुंदेलखंड की 10 लोकसभा सीटों में से 09 सीटों पर कब्ज़ा जमाया था। बीजेपी के हाथ से सिर्फ कन्नौज की सीट फिसल गई थी और सपा की डिम्पल यादव ने मोदी लहर के बावजूद भी जीत हासिल की थी । इसके साथ ही 2017 विधानसभा चुनाव में कानपुर बुंदेलखंड की 52 विधानसभा सीटों में 47 सीटों पर जीत हासिल की थी ।

अटल बिहारी वाजपेयी ,लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

बीजेपी की धरोहर : कानपुर बुंदेलखंड की कानपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी वर्तमान सांसद है । जिन्हें बीजेपी की धरोहर के रूप में जाना जाता है । बीजेपी ने बीते गुरुवार को अपने वरिष्ट नेता लाल कृष्ण अडवाणी की टिकट काट कर इस बात के संकेत दे दिए की अब बुजुर्ग नेताओ का पार्टी में कोई स्थान नही है । कानपुर से दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके डॉ मुरली मनोहर जोशी की यह इच्छा अधूरी रहने वाली है । कानपुर से सतीश महाना का नाम सबसे आगे चल रहा है । सतीश महाना उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री है और अपने से क्षेत्र लगातार 7 वी बार विधायकी का चुनाव जीते है । 2014 लोकसभा चुनाव में डॉ मुरली मनोहर जोशी ने कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को हराया था । श्रीप्रकाश जायसवाल लगातार तीन बार के सांसद थे उनके विजय रथ को रोकने का काम डॉ जोशी ने किया था ।

कानपुर लोकसभा सीट का गणित : 2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ मुरली मनोहर जोशी ने तीन बार सांसद व पूर्व केंद्रीय कोयलामंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को 2,22,946 वोटो से हराया था। डॉ मुरली मनोहर जोशी को 4,74,712 वोट मिले थे और पूर्व कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को 2,51,766 वोट हासिल हुए थे । लेकिन अब हालात बदल चुके है कांग्रेस का मानना है कि यदि डॉ जोशी कानपुर से दोबारा चुनाव लड़ते है तो इसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा। क्योंकि शहर की जनता में उनके खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।

 

मिश्रिख लोकसभा सीट का गणित: 2019 लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मिश्रिख लोकसभा सीट से मंजरी राही को कैंडिडेट बनाया है। वहीं बीजेपी ने सांसद अंजूबाला का टिकट काटते हुए अशोक रावत को कैंडिडेट बनाया है। मिश्रिख लोकसभा सीट वैसे तो बसपा की सीट मानी जाती है लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की अंजू बाला ने जीत हासिल की थी। बीजेपी की अंजू बाला को 412575 वोट मिले थे वही बसपा के अशोक कुमार रावत दूसरे नंबर पर रहे थे उन्हें 3,25,212 वोट हासिल हुए थे।

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