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Lok Sabha Election 2019: NCP प्रमुख शरद पवार के सामने ही भिड़ गए थे दो गुट, जानिए क्यों एक भी चुनाव नहीं हारने वाले क्षत्रप ने छोड़ा मैदान

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): सूत्रों के मुताबिक शरद पवार पार्टी के भीतर दो धड़ों के आपसी कलह से परेशान हैं। पवार नहीं चाहते कि वह मधा सीट पर ही उलझकर रह जाएं। क्योंकि, बतौर स्टार प्रचारक उन्हें अपनी बेटी सुप्रिया सुले के अलावा महाराष्ट्र की सभी 48 सीटों पर एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के लिए बैटिंग करनी है।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी में आपसी कलह के चलते शरद पवार ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. (फोटो सोर्स:PTI)

Lok Sabha Election 2019: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर लिया है। सोमवार को पुणे स्थित बारामती हॉस्टल में पार्टी नेताओं के साथ बैठक में उन्होंने इसका ऐलान भी कर दिया। चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा पार्टी के भीतर गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया और इसकी पहल खुद 14 बार सफल चुनावी जंग जीतने वाले एनसीपी मुखिया शरद पवार ने की। गौरतलब है कि सोमवार को पवार की घोषणा उनके उस बयान के ठीक उलट है, जिसमें उन्होंने एक महीने पहले ही ‘मधा’ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे। शरद पवार के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के पीछे पार्टी (एनसीपी) की आंदरूनी कलह बड़ी वजह हो सकती है।

1967 से चुनावी राजनीतिक की शुरुआत करने वाले शरद पवार आज तक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं। पिछली बार 2009 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। उस दौरान उन्होंने मधा लोकसभा सीट पर 3.14 लाख वोटों के भारी अंतर से अपने प्रतिद्वंदी को हराया था। लेकिन, इसके तीन साल बाद 2012 में सात बार सांसद रहे पवार ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी और 2014 लोकसभा चुनाव से नहीं लड़े। फिलहाल वह राज्यसभा से सांसद हैं और दो साल बाद उनका कार्यकाल खत्म हो जाएगा।

पिछले महीने एनसीपी ने फैसला लिया कि वरिष्ठ नेता शरद पवार को मधा सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा। वह इस दौरान संसदीय क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करने भी पहुंचे। मधा में आयोजित रैली के दौरान दो गुट आपस में ही भिड़ गए और मौखिक रूप से एक दूसरे पर हमला शुरू कर दिया। पवार ने  झगड़े को सुलझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहे। यह घटना उनके लिए सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी की बड़ी वजह बन गई। सूत्रों का कहना है कि एनसीपी प्रमुख ने महसूस किया कि यदि वह आपस में लड़ रहे दो गुटों को एक साथ लाने में नाकामयाब रहते हैं, तो उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में खूब पसीना बहाना पड़ेगा और यह पार्टी के लिए उचित नहीं होगा। क्योंकि, वह न सिर्फ पार्टी बल्कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के स्टार-प्रचारक हैं और उन्हें महाराष्ट्र की सभी 48 सीटों पर प्रचार करना है।

सोमवार को मीडिया से बातचीत में एनसीपी प्रमुख ने कहा कि उनका चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किसी हार के डर से नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने 14 चुनाव लड़े हैं (विधानसभा चुनाव भी) और कभी भी हार का सामना नहीं किया। इन चुनावों में मुझे किसी तरह की कोई चिंता नहीं रही, फिर आज ऐसा क्यों होना चाहिए।” सूत्रों के मुताबिक शरद पवार और उनके परिवार के करीबियों ने उन्हें सुझाव दिया है कि उनकी बेटी सुप्रिया सुले पर बारामती में बीजेपी के बढ़ते जनाधार से चिंतित हैं। सुले बारामती से ही लोकसभा सांसद हैं। 2014 में एनडीए की तरफ से राष्ट्रीय समाज पक्ष के महादेव जनकर ने सुले को काफी टक्कर दी थी। महादेव ने दोबारा बारामती से ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। ऐसे में पवार सिर्फ मधा लोकसभा सीट तक सिमट कर नहीं रह सकते, बल्कि उन्हें हर सीट पर बीजेपी के खिलाफ मुहिम चलानी है।

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