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आखिरकार संघर्ष हुआ त्रिकोणीय

अकबरपुर सीट पर सामान्य वर्ग के मतदाता दूसरे नंबर तो तीसरे स्थान पर अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की है। अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या करीब एक लाख है। वर्ष 2009 में यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। तब राजाराम पाल ने बसपा प्रत्याशी को मात दी थी।

Author April 26, 2019 2:22 AM
अकबरपुर लोकसभा संसदीय सीट पर दिख सकता है कड़ा मुकाबला।

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर व कानपुर देहात की विधानसभा को जोड़कर बनाई गई अकबरपुर लोकसभा संसदीय सीट इस समय त्रिकोणीय संघर्ष में फंसती नजर आ रही है। जहां 2014 में मोदी लहर में देवेंद्र सिंह भोले ने इस सीट पर विजय पाई थी वही इस बार उन्हें पूर्व सांसद व कांग्रेस के उम्मीदवार राजाराम पाल और गठबंधन की निशा सचान से त्रिकोणीय मुकाबले में जूझना पड़ रहा है।

सीट का समीकरण

अकबरपुर सीट पर सामान्य वर्ग के मतदाता दूसरे नंबर तो तीसरे स्थान पर अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की है। अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या करीब एक लाख है। वर्ष 2009 में यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। तब राजाराम पाल ने बसपा प्रत्याशी को मात दी थी। वर्ष 2014 के चुनाव में भी बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। इसकी एक ही वजह है कि अनुसूचित वर्ग का लगभग सवा चार लाख वोटर है। इस बार सपा-बसपा गठबंधन के सामने परंपरागत वोटरों का बिखराव रोकना बड़ी चुनौती है। लोकसभा 2014 के चुनाव में भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले को 481584 , बहुजन समाज पार्टी के अनिल शुक्ला वारसी को 202587 तो समाजवादी पार्टी के लाल सिंह तोमर को 147002 वोट मिले थे। कांग्रेस का उम्मीदवार चौथे नंबर पर रहा था। सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि भाजपा की भारी जीत कांग्रेस के परंपरागत वोट के चले जाने से हुई थी।

मतदाताओं की संख्या
यहां कुल मतदाता 17,59010 है जिनमें पुरुष मतदाता 9,58,634 हैं तो महिला मतदाता 8,00,376 हैं।

स्टार प्रचारकों ने झोंकी ताकत
भाजपा से स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ, उमा भारती व मनोज तिवारी जैसे दिग्गज नेता अभिनेता देवेंद्र सिंह भोले को जिताने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं तो वही कांग्रेस के भी स्टार प्रचारक पीछे नहीं हैं। परचम फहराने के लिए खुद कमान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ प्रियंका ने संभाली हुई है।

बिखराव रोकने में जुटीं सपा-बसपा
2014 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के उतरने से वोटों में बिखराव था। अब ये दल गठबंधन में हैं। लिहाजा वह अपनी जीत को सुनिश्चित मान रहा है। लेकिन सपा बसपा के बीच अपने वोटरों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती है और इसके लिए दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेता जुटे हुए हैं।

भाजपा सरकार ने पांच साल में जितना विकास किया है उतना किसी अन्य पार्टी ने कभी नहीं किया। आम जनता दोबारा प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को देखना चाहती है। मैंने भी अपने क्षेत्र में बहुत सारे विकास कार्य कराए हैं। मुझे 2014 से ज्यादा प्यार 2019 में मिल रहा है।
-देवेंद्र सिंह भोले, भाजपा उम्मीदवार

जनता जुमलेबाजी से परेशान हो चुकी है। रोजगार का वादा किया, वह भी पूरा नहीं किया। विकास करने की बातें तो खूब करते हैं पर धरातल पर यह दिखाई नहीं दे रहा है। नोटबंदी का गुस्सा आज भी आम आदमी के भीतर देखा जा सकता है और नाराज लोग भाजपा को जवाब देने के लिए तैयार हैं।
-राजाराम पाल, कांग्रेस उम्मीदवार

चाहे कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही झूठे वादे करती हैं। भाजपा कार्यकाल में धरातल पर कोई भी विकास कार्य नहीं दिख रहा है। यहां की जनता बेहद परेशान है और नाराज हैै। जनता का प्यार गठबंधन को मिल रहा है और निश्चित तौर पर गठबंधन जीतने जा रहा है।
-निशा सचान,सपा-बसपा गठबंधन उम्मीदवार

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