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संजय गांधी के जिस चीनी मिल के लिए दी थी 10 एकड़ जमीन, आज उसमें हैं मशीन ऑपरेटर, फंसा है 22 महीने का वेतन

सुल्तानपुर में संजय गांधी के द्वारा बनाई गई चीनी मील का मुद्दा चुनावों में नंबर वन पर था। यहां से बीजेपी की उम्मीदवार और दिवंगत नेता संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी ने वादा किया है कि वह चीनी मील की दशा को सुधारेंगी और मजदूरों की बकाया सैलरी भी दिलाएंगी।

इस तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

इंदिरा गांधी की सरकार में उनके बेटे संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक चीनी मिल खोलने का खाका तैयार किया था। 1983 में इंदिरा गांधी ने इस मिल का उद्घाटन भी कर दिया। लेकिन, आज की तारीख में जिन स्थानीय लोगों ने इस चीनी मिल के लिए अपनी जमीनें दीं, उनकी दुर्दशा में इस मिल का काफी योगदान रहा है। मिल और इसमें काम करने वाले लोगों की माली हालत आज की तारीख में बेहद खराब है। 1973 में शकील अहमद नाम के शख्स ने बेहतर जिंदगी की उम्मीद में अपनी 10 एकड़ ज़मीन चीनी मिल के नाम कर दिया। उस दौरान गांधी परिवार से उभरते हुए राजनेता संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी मिल बनाने का ब्लू-प्रिंट तैयार किया था।

गौरतलब है कि जब मारुती की फैक्टरी और और सुल्तानपुर चीनी मिल का उद्घाटन एक ही वक्त में किया गया। लेकिन, 35 साल बाद मारुती आज देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है, जबकि मिल की हालत किसी से छिपी नहीं है। आज इसी मिल में अपनी जमीन देने वाले अहमद बतौर मशीन ऑपरेटर काम करते हैं और उन्हें 22 महीने से पगार भी नहीं मिली है।

शकील अहमद मिल में मजदूर यूनियन के सचिव भी हैं और उनका अधिकांश वक्त अपने साथ 800 मजदूरों की पगार के लिए विरोध-प्रदर्शन में बीतता है। आईटीआई में स्नातक अहमद ने बिजनस स्टैंडर्ड से बातचीत में बताया है, “मैं अब 47 साल का हो चुका हूं और मुझे नई नौकरी की उम्मीद काफी कम है।” 70 एकड़ में फैला किसान कॉपरेटिव शुगर मिल एक वक्त में उत्तर प्रदेश की बड़ी मिलों में शुमार थी। इस मील ने पिछले पांच सालों में कोई भी मुनाफा हासिल नहीं किया है। वित्त वर्ष 2018 में इसका घाटा बढ़कर दोगुना 380 करोड़ रुपये हो गया। आज की तारीख में यह प्लांट अपनी क्षमता का आधा आउटपुट भी नहीं दे पा रहा है।

हालांकि, लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान इस मिल का मुद्दा प्रासंगिक हो चुका है। यहां से दिवंगत नेता संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं और शुगर मिल चुनाव का मुख्य एजेंडा बन गया है। राजनीतिक रैलियों में मेनका गांधी ने भी इस मिल की खोई हुई विरासत को वापस लाने का वादा किया है। मेनका गांधी ने यह भी वादा किया है कि ना सिर्फ वह मिल की व्यवस्था को ठीक करेंगी, बल्कि मजदूरों की बकाया सैलरी को भी दिलाएंगी। मेनका गांधी के आग्रह पर ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सितंबर 2018 तक मजदूरों की बकाया सैलरी के भुगतान के लिए 7 करोड़ रुपये जारी किए थे। गांधी कहती हैं कि उनके पति ने सुल्तानपुर के लिए मिल बनाया था, लेकिन उसे फिर से जिंदा करने का काम वह करेंगी।

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