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2019 Lok Sabha Election: आडवाणी-जोशी जैसे उम्रदराज नेताओं को इस बार भी टिकट दे सकती है BJP, पर रखी ये बड़ी शर्त

2019 Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने पार्टी में 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को भी टिकट देने का फैसला किया है।

लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

2019 Lok Sabha Election: आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने पार्टी में 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को भी टिकट देने का फैसला किया है। लेकिन अंतिम निर्णय ऐसे नेताओं पर छोड़ दिया गया है कि वे चुनाव लड़ना चाहते हैं या नहीं। बताया जा रहा है कि बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है, लेकिन इसके साथ ही पार्टी ने एक शर्त रखी है कि सरकार बनने के बाद ऐसे नेताओं को पार्टी या सरकार में कोई पद नहीं दिया जाएगा।

दरअसल, हाल ही में बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सपंन्न हुई। इस दौरान अमित शाह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, थावरचंद गहलोत, राम लाल जैसे तमाम बड़े नेता मौजूद थे। इसके बाद मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि बैठक में 75 साल से ज़्यादा उम्र वाले नेताओं को बीजेपी टिकट दे सकती है लेकिन उन्हें सरकार या पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। ऐसे में वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार जैसे नेताओं के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि पार्टी ने इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।

गौरतलब है कि मौजूदा लोकसभा में लालकृष्ण आडवाणी (91) सबसे उम्रदराज सदस्य हैं। वह 1991 से गुजरात की गांधीनगर लोकसभा सीट से सांसद है। बता दें कि आडवाणी पिछले पांच लोकसभा चुनावों से बड़े अंतर से जीत दर्ज करते आ रहे हैं। यदि आडवाणी इस बार चुनाव लड़ते हैं तो वह जनता दल- यूनाइटेड के राम सुंदर दास के सबसे उम्रदराज सांसद होने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। दास ने 2009 में 88 वर्ष की उम्र में हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव जीता था।

बात अगर मुरली मनोहर जोशी की करें तो वह 2014 में कानपुर से लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके पहले वह 1991 से 1993 के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने इलाहबाद और वाराणसी की लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व भी किया। जोशी 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद कानपुर से चुनाव लड़े थे। वहीं शांता कुमार कांगड़ा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे है। पूर्व सीएम शांता कुमार 1989, 1998, 1999 और 2014 में संसद के सदस्य रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने चुनाव लड़ने या न लड़ने का फैसला पार्टी के इन बड़े नेताओं पर छोड़ दिया है।

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