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Lok Sabha Election 2019: बीजेपी-शिवसेना से बोले अठावले, दलितों को हल्के में न लें, सम्मान दोगे तो मिलेगी इज्जत

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): आरपीआई (ए) पार्टी के नेता रामदास अठावले ने कहा, 'शिवसेना-भाजपा को दलितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। कम से कम एक सीट देकर हमारा मनोबल बढ़ाना चाहिए।'

union minister ramdas athawaleकेंद्रीय मंत्री रामदास अठावले फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

2019 Lok Sabha Election: केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री और आरपीआई-ए ( रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- ए) नेता रामदास अठावले ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में शिवसेना- भाजपा के गठबंधन ने उनकी पार्टी को नजरअंदाज किया है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में अठावले ने चेतावनी दी कि महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटों में शिवसेना-भाजपा को दलित सीटों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

सवालः शिवसेना- भाजपा गठबंधन में आरपीआई (ए) की क्या भूमिका है?

अठावलेः मैं आगामी 2019 लोकसभा चुनावों में शिवसेना-भाजपा की तरफ से हमारी पार्टी को नजरअंदाज करने से बेहद निराश हूं। महाराष्ट्र की कुल 48 लोकसभा सीटों पर शिवसेना 23 और भाजपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उन्हें कम से कम एक सीट आरपीआई (ए) को देनी चाहिए थी। मैंने मुंबई नॉर्थ ईस्ट या मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी।

सवालः शिवसेना- भाजपा ने आरपीआई (ए) की अनदेखी क्यों की?

अठावलेः मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा अध्यक्ष से इस संबंध में बात की थी तो उन्होंने जवाब दिया कि 2014 में मुझे राज्यसभा सांसद बनाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालांकि इसके बाद मुझे मोदी सरकार का हिस्सा बनने का मौका मिला और मुझे केंद्रीय राज्य मंत्री का पद प्राप्त हुआ। लेकिन महाराष्ट्र में राज्य विधान परिषद में दो आरपीआई (ए) सदस्यों को सीट देने का वादा किया गया था जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है।

सवालः क्या आप एनडीए से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं?

अठावलेः नहीं, इस समय इस तरह का कोई भी कदम उठाना सही होगा। मैं तो केवल महाराष्ट्र और भारत के अन्य हिस्सों में अपनी पार्टी के भीतर के आक्रोश को जाहिर कर रहा हूं। आरपीआई (ए) ने एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। लेकिन मैं भाजपा-शिवसेना को कहना चाहता हूं कि वह दलितों के समर्थन का सम्मान करेंगे तो बदले में उन्हें भी सम्मान मिलेगा। शिवसेना- भाजपा हमारे समर्थन को हल्के में न लें।

सवालः आप यह कैसे सुनिश्चत करेंगे?

अठावलेः हम केवल एक लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं। भाजपा-शिवसेना दोनों को अपने-अपने कोटे से हमारी मांगों पर विचार करना चाहिए। मेरा मानना है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी शिवसेना-भाजपा गठबंधन जारी रहेगा।

सवालः आप एनडीए 2014 और 2019 की तुलना किस प्रकार करेंगे?

अठावलेः साल 2014 में एनडीए ने छोटी पार्टियों को मौका दिया था जिनमें आरपीआई (ए) ने सतारा से चुनाव लड़ा था। हमारा मनोबल बना रहे इसके लिए कम से कम इस बार हमें एक सीट पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए।

सवालः क्या आप प्रकाश अंबेडकर की अगुवाई वाली वंचित बहुजन अगाधी पार्टी को राजनीतिक चुनौती समझते हैं?

अठावलेः नहीं। मेरा दलित वोट बरकरार है। प्रकाश अंबेडकर मेरे मित्र हैं और मुझे खुशी है कि उनके द्वारा बनाई गई पार्टी को जनता से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। अंबेडकर की राजनीति शिवसेना-भाजपा के लाभ के लिए काम करेगी।

सवालः देश भर में दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?

अठावलेः दलितों के खिलाफ देश में किसी भी प्रकार का अत्याचार हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसलिए हमने अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार संबंधी एक्ट में बदलाव नहीं होने दिया।

सवालः क्या कांग्रेस-एनसीपी ने उनके गठबंधन में शामिल होने के लिए आपसे संपर्क किया था?

अठावलेः मुझे हमेशा कांग्रेस-एनसीपी से खुला निमंत्रण मिला है। लेकिन हम अतीत में कांग्रेस-एनसीपी की तरफ से हमारे साथ किए गए दुर्व्यवहार को नहीं भूल सकते। यह कांग्रेस ही थी जिसने साल 2004 के लोकसभा चुनाव में मेरी हार की साजिश रची थी। साल 2009 में आरपीआई (ए) ने महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ गठबंधन करने का फैसला किया था। कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन न करने का एक कारण यह भी है कि उन्होंने हमेशा हमारे वोट बैंक का इस्तेमाल किया है, वहीं मोदी सरकार ने हमेशा दलितों के उत्थान के लिए काम किया है।

सवालः आरएसएस से मतभेद के बारें में आपके क्या विचार हैं?

अठावलेः मैं मानता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जहां हमारे आरएसएस के साथ मतभेद हैं लेकिन अगर हम केंद्र और राज्य दोनों में भारतीय राजनीति को देखें तो कोई अछूत नहीं है। साल 1970 के दशक में जनता पार्टी का जनसंघ के साथ गठबंधन हुआ और वे कांग्रेस के खिलाफ सत्ता में आए।

 

सवालः आप मतभेदों को कैसे सुलझाएंगे?

अठावलेः आरपीआई (ए) का भाजपा-शिवसेना के साथ गठबंधन है। यह एनडीए का हिस्सा है। हम जोर देकर कहेंगे कि भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में इस बात का उल्लेख हो कि भारतीय संविधान को नहीं बदला जाएगा और भविष्य में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) का आरक्षण बरकरार रहेगा। उन्हें भूमिहीन दलितों के लिए पांच एकड़ भूमि की हमारी मांग पर भी विचार करना चाहिए।

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