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योगी सरकार के NCERT किताबें पढ़ाने के आदेश के बाद ऐसा होगा मदरसों का पाठ्यक्रम!

रिपोर्ट्स के मुताबिक मदरसों के पाठ्यक्रम में इन बदलावों को शामिल किए जाने की चर्चा है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (फाइल)

उत्तर प्रदेश सरकार सदरसों में भी एनसीईआरटी की किताबें लागू करवाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में एनसीआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह जानकारी राज्य के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने खुद 30 अक्टूबर को ट्वीट के जरिए दी। दिनेश शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि मदरसा बोर्ड मदरसों में एनसीआरटी सिलेब्स लागू करने की योजना बना रहा है। मदरसों में अब उच्च स्तर पर गणित और साइंस को अनिवार्य किया जाएगा। आधुनिक विषयों के साथ स्कूलों के साथ बराबरी करने की मदरसा तैयारी कर रहा है। मदरसों के पाठ्यक्रम को लेकर राज्य सरकार दूसरे राज्यों के मदरसों के पाठ्यक्रम का भी अध्ययन कर रही है। न्यूज वेबसाइट आज-तक की खबर के मुताबिक मदरसों के पाठ्यक्रम में इन बदलावों को शामिल किए जाने की चर्चा है।

– 1 से 5 कक्षा के छात्रों के लिए दीनी तालीम के साथ अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गणित और सामाजिक विज्ञान प्रस्तावित है।

-6 से 8 कक्षा के छात्रों के लिए दीनी तालीम के साथ अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गणित, सामाजिक विज्ञान और अरबी और फारसी।

– 9 से 10 कक्षा के छात्रों के लिए ऊपर बताए गए सभी विषयों के साथ होम साइन्स।

– 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए अंग्रेजी, उर्दू और दीनी तालीम जरूरी विषय होंगे, इसके अलावा मासियात के अलावा साईंस या आर्ट्स वैकल्पिक विषय होंगे।

– साइंस में फिजिक्स, कैमेस्ट्री और मैथ अनिवार्य होंगे और आर्ट्स में भूगोल, इतिहास और राजनीतिक शास्त्र आवश्यक विषय होंगे।

बता दें कुछ वक्त पहले राज्य सरकार द्वारा मदरसों के पाठ्यक्रम में सुधार लाने के लिए 40 सदस्यों की एक कमिटी का गठन करने की खबर सामने आई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की उस रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार मदरसों में एक स्तर पर हिंदी, अंग्रेजी, गणित, साइंस और समाजिक विज्ञान जैसे विषयों को लागू करने पर विचार किया जा रही थी। योगी सरकार के इस नए आदेश का सूबे के 16 हजार मदरसों पर प्रभाव पड़ेगा। 40 सदस्यों की इस कमिटी में एनसीआरटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक-एक सदस्य शामिल हैं। इनके अलावा अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के ख्वाजा मोइनूद्दीन चिस्ती उर्दू के कई सदस्य शामिल हैं। वहीं इस फैसले पर कई धर्म गुरुओं ने ऐतराज जताया है।

 

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