International Day of Women and Girls in Science 2026: हर साल 11 फरवरी को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस मनाया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर 11 फरवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई? इस दिवस का मकसद विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी को बढ़ावा देना और जेंडर गैप पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना है।
11 फरवरी ही क्यों चुना गया? जानिए वजह
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 2015 को एक प्रस्ताव पारित कर 11 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस घोषित किया। यह तारीख प्रतीकात्मक रूप से इसलिए चुनी गई क्योंकि, यह दिन विज्ञान और शिक्षा से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के UN के एजेंडे के अनुरूप है और यह तारीख सतत विकास लक्ष्य-5 (लैंगिक समानता) और एसडीजी-9 (नवाचार और बुनियादी ढांचा) से सीधे जुड़ती है।
फरवरी का महीना पारंपरिक रूप से वैज्ञानिक संवाद, नीति चर्चा और शिक्षा से जुड़ी पहलों के लिए अहम माना जाता है, जिसके चलते संयुक्त राष्ट्र का मानना था कि एक स्थायी, निश्चित और वैश्विक तारीख तय करने से सदस्य देशों में जागरूकता अभियानों और नीतिगत पहलों को मजबूती मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस 2026 की थीम
2026 की आधिकारिक थीम है, “विज़न से इम्पैक्ट तक: जेंडर गैप को कम करके STEM को फिर से परिभाषित करना” “From Vision to Impact: Redefining STEM by Closing the Gender Gap”
UNESCO के अनुसार, यह थीम केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक बदलाव और प्रभाव पर केंद्रित है। इसमें उन नीतियों, योजनाओं और उदाहरणों को उजागर किया जा रहा है, जो पहले से ही STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में कारगर साबित हो रहे हैं।
इतिहास: इस दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
दिसंबर 2015: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित किया
2016: पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस मनाया गया
उद्देश्य: STEM क्षेत्रों में महिलाओं की कम भागीदारी और संरचनात्मक बाधाओं को उजागर करना
यह फैसला ऐसे समय लिया गया, जब दुनिया भर में यह साफ हो चुका था कि वैज्ञानिक प्रगति में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
UNESCO डेटा: क्यों जरूरी है यह दिवस?
UNESCO के आंकड़े बताते हैं कि जेंडर गैप अब भी गंभीर समस्या है। उच्च शिक्षा में दाख़िले में महिलाएं आगे, लेकिन विज्ञान स्नातकों में महिलाएं केवल 35% ही हैं। वैश्विक स्तर पर हर तीन में से केवल एक वैज्ञानिक महिला है लेकिन निजी वैज्ञानिक और टेक सेक्टर में पुरुषों का दबदबा कायम है और यही कारण है कि 11 फरवरी केवल उत्सव नहीं, बल्कि चेतावनी और आत्ममंथन का दिन भी है।
11 फरवरी का महत्व क्या है?
11 फरवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस:
लड़कियों को STEM करियर अपनाने के लिए प्रेरित करता है
नीति निर्माताओं को जेंडर-सेंसिटिव नीतियां बनाने के लिए प्रेरणा देता है
कार्यस्थलों पर समान अवसर और सुरक्षित माहौल की जरूरत को रेखांकित करता है
समाज में यह संदेश देता है कि विज्ञान केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं है
भारत के लिए क्यों अहम है 11 फरवरी?
भारत में महिला वैज्ञानिकों ने ISRO, मेडिकल रिसर्च और परमाणु विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बावजूद टेक्नोलॉजी और प्राइवेट R&D सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी सीमित है। ऐसे में 11 फरवरी भारत के लिए नीति, शिक्षा और सोच में बदलाव का संकेत देता है।
International Day of Women and Girls in Science 2026 FAQs
Q1. अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस 11 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है?
A. क्योंकि UN ने 2015 में इसे वैश्विक रूप से मान्यता देकर एक स्थायी तारीख तय की, ताकि जेंडर इक्वैलिटी और वैज्ञानिक विकास को जोड़कर देखा जा सके।
Q2. 2026 की थीम क्या है?
A. “From Vision to Impact: Redefining STEM by Closing the Gender Gap”
Q3. इस दिवस की शुरुआत कब हुई?
A. पहली बार 2016 में।
Q4. UNESCO की भूमिका क्या है?
A. UNESCO इस दिवस की योजना, डेटा, जागरूकता और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।
