देशभर में 21 जून को दोबारा आयोजित होने वाली नीट यूजी परीक्षा को लीक होने से बचाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से लेकर केंद्र सरकार हर ठोस कदम उठा रही है। सरकार ने पहले ही इस पेपर को लीक होने से बचाने के लिए वायुसेना की मदद से क्वेश्चन पेपर को एग्जाम सेंटर तक पहुंचाने का फैसला लिया था। वहीं पेपर बनाने वाले अधिकारियों को परीक्षा हो जाने तक किसी अज्ञात जगह पर रखा गया है। इसके अलावा एनटीए ने एग्जाम सेंटर पर तैनात होने वाले परीक्षा केंद्र अधीक्षकों और निरीक्षकों के लिए ‘परीक्षा कर्मयोगी’ के नाम से एक डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इन स्टेप्स को लिए जाने का सीधा उद्देश्य यही है कि पेपर को लीक होने से बचाया जा सके।
सरकार ने टेलीग्राम पर लगाई अस्थाई रोक
इस बीच मंगलवार (16 जून 2026) को केंद्र सरकार की ओर से नीट पेपर को लेकर एक और अहम फैसला लिया गया। दरअसल, सरकार ने NEET की दोबारा परीक्षा को लेकर भारत में टेलीग्राम मैसेजिंग एप के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को प्रेस रिलीज जारी कर इसकी जानकारी दी। साथ ही एनटीए ने ये भी बताया कि टेलीग्राम पर रोक क्यों लगाई गई है?
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टेलीग्राम पर क्यों हुआ यह एक्शन
एनटीए के मुताबिक, नीट यूजी पेपर से पहले टेलीग्राम के इस्तेमाल पर लगी अस्थाई रोक 30 जून तक लागू रहेगी। सरकार ने इस एप के मैसेज-एडिटिंग टूल के एक्सेस पर भी रोक लगा दी है। एनटीए की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हाल की परीक्षाओं में पेपर लीक के नकली सबूत बनाने के लिए टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल किया गया था। टेलीग्राम का यह फीचर ना सिर्फ मैसेज को एडिट करने की सुविधा देता है बल्कि इसमें PDF जैसी अटैच्ड फाइलों को भी बदला जा सकता है।
मैसेज एडिटिंग टूल का कैसे होता है इस्तेमाल?
एजेंसी ने कहा कि मैसेज एडिटिंग टूल के जरिए एडमिनिस्ट्रेटर के लिए परीक्षा खत्म होने के बाद एक पुराने मैसेज को एडिट करना और उसमें असली क्वेश्चन पेपर डालना मुमकिन हो गया था। एडिट किए गए पोस्ट के स्क्रीनशॉट को फिर इस कथित सबूत के तौर पर फैलाया जा सकता था कि पेपर परीक्षा से पहले उपलब्ध था। NTA ने कहा कि इन एडिट किए गए पोस्ट का इस्तेमाल क्वेश्चन पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की झूठी बातें फैलाने के लिए किया गया गया था।
एजेंसी ने कहा, “अभी के फॉर्म में यह फ़ीचर चैनल एडमिनिस्ट्रेटर को पहले पोस्ट किए गए मैसेज के कंटेंट को एडिट करने की इजाजत देता है, जिसमें PDF जैसी अटैच्ड फाइलों को भी बदलना भी शामिल है, जबकि ओरिजिनल सेंड-टाइम स्टैम्प बना रहता है।” इस फीचर को बंद करने का फैसला 21 जून को होने वाली NEET (UG) 2026 की दोबारा परीक्षा के बाद के समय में ऐसे बेबुनियाद ‘पेपर लीक’ के सबूत बनने से रोकने के लिए किया गया है।
टेलीग्राम पर अस्थाई रोक लगने पर NTA की प्रतिक्रिया
टेलीग्राम पर लगी अस्थाई रोक को लेकर एनटीए ने डिटेल में बताया है कि ये फैसला क्यों लिया गया। एनटीए के मुताबिक, सरकार ने यह कदम पब्लिक ऑर्डर के हित में लिया है क्योंकि 21 जून 2026 को होने वाले NEET (UG) 2026 री-एग्जाम में बैठने वाले कैंडिडेट्स को धोखा देने के लिए चीटिंग रैकेट्स के चंगुल से बचाया जा सके। NTA स्टूडेंट्स के हित में समय पर की गई इस कार्रवाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय का शुक्रिया अदा करता है, जिससे NTA को 21 जून 2026 को सुरक्षित परीक्षाएं कराने में बहुत मदद मिलेगी।
एनटीए ने बताया है कि इस फैसले को लिए जाने से पहले गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने NEET (UG) 2026 कैंडिडेट्स को टारगेट करने वाले टेलीग्राम-बेस्ड फ्रॉड और गलत जानकारी के ऑपरेशनल रिस्पॉन्स को कोऑर्डिनेट करने वाली मुख्य नोडल एजेंसी के तौर पर काम किया है। NTA, बिहार, गुजरात और राजस्थान की पुलिस फोर्स समेत राज्य की कानून लागू करने वाली एजेंसियों और पब्लिक चैनलों और प्लेटफॉर्म की अपनी लगातार मॉनिटरिंग से मिले इनपुट पर कार्रवाई करते हुए I4C ने काफी संख्या में टेलीग्राम चैनल और ग्रुप को तुरंत हटा दिया है।
टेलीग्राम पर ही क्यों लीक होते हैं पेपर?
पेपर लीक के अधिकतर मामले टेलीग्राम पर ही सामने आते हैं। इसकी वजह है कि इस प्लेटफॉर्म पर लाखों सदस्यों वाले चैनल और बड़े ग्रुप आसानी से बनाए जा सकते हैं। इससे लीक सामग्री बहुत तेजी से हजारों लोगों तक पहुंच जाती है। साथ ही पीडीएफ, फोटो, वीडियो और दस्तावेज आसानी से साझा किए जा सकते हैं। प्रश्नपत्र की तस्वीरें या स्कैन कॉपी तुरंत अपलोड हो जाती हैं।
इसके अलावा यहां कई चैनल एडमिन अपनी पहचान छिपा सकते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए शुरुआती स्तर पर स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। एक बार किसी चैनल पर लीक सामग्री आने के बाद उसे दूसरे चैनलों और ग्रुपों में फॉरवर्ड करना बेहद आसान होता है।
हालांकि टेलीग्राम की सभी चैट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होतीं, लेकिन इसकी प्राइवेसी सुविधाओं के कारण लोग इसे सुरक्षित मानते हैं और कई अवैध गतिविधियों के लिए इस एप्लीकेशन का दुरुपयोग किया जाता है।
