दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में भारतीय रेलवे का चौथा स्थान है। पहले पर अमेरिका, दूसरे पर चीन और तीसरे पर रूस के बाद भारतीय रेल नेटवर्क इस मामले में चौथे स्थान पर है। भारतीय रेलवे की कुल लंबाई लगभग 68,000 किलोमीटर है। भारत में रेलवे नेटवर्क की अहमियत को कुछ ऐसे समझा जा सकता है कि 2017 से पहले भारत में रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया जाता था, लेकिन 2016 में मोदी सरकार बनने के बाद इसे आम बजट के साथ ही मिला दिया गया था।

रेलवे में सबसे बड़ा पद कौन सा है?

भारत का रेल नेटवर्क 19 रेलवे जोन में बंटा हुआ है और इन सभी जोन का संचालन एक बहुत बड़ी कार्य प्रणाली के सुचारू ढंग से चलाए जाने के साथ पूरा होता है। रेलवे में हर साल ग्रुप A, B, C और D के तहत हजारों भर्तियां निकलती हैं, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि रेलवे में सबसे बड़ा पद कौन सा होता है जो पूरे रेल नेटवर्क का संचालन करता है? भारतीय रेलवे में सर्वोच्च प्रशासनिक पद चेयरमैन और सीईओ का होता है जो कि रेलवे बोर्ड का प्रमुख होता है। वर्तमान में यह पद कैबिनेट सचिव के लेवल का होता है।

अभी रेलवे बोर्ड का चेयरमैन और सीईओ कौन है?

वर्तमान (18 फरवरी 2026 तक) में सतीश कुमार भारतीय रेलवे के इस सबसे बड़े पद पर आसीन हैं। सतीश कुमार ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ के रूप में कार्यभार 1 सितंबर 2024 को संभाला था। उनके कार्यकाल को बढ़ाकर 1 सितंबर 2026 तक किया जा चुका है। 1986 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर (IRSME) अधिकारी सतीश कुमार इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले दलित व्यक्ति हैं।

क्या काम होता है रेलवे बोर्ड के सीईओ और चेयरमैन का?

रेलवे बोर्ड का सीईओ और चेयरमैन पूरे रेल नेटवर्क के संचालन, नीति-निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता है।

रेलवे से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय भी अपने स्तर पर लेता है।

रेलवे बोर्ड का सीईओ और चेयरमैन, सभी जोन, मंडल और उत्पादन इकाइयों के कार्यों का समन्वय करता है।

रेल बजट, आधुनिकीकरण, सुरक्षा और विस्तार से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति भी रेलवे बोर्ड के सीईओ और चेयरमैन की होती है।

रेलवे में जोन स्तर पर सभी कार्यों की जिम्मेदारी महाप्रबंधक की होती है तो वहीं संपूर्ण भारतीय रेल के नेतृत्व और दिशा निर्धारण की सर्वोच्च जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के पास ही होती है।

रेलवे बोर्ड के सीईओ/चेयरमैन की चयन प्रक्रिया

भारतीय रेलवे के सबसे सर्वोच्च प्रशासनिक पद के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति किसी लिखित परीक्षा या फिर इंटरव्यू से नहीं होती। इस पद के लिए किसी का चयन भारतीय रेलवे की विभिन्न सेवाओं (जैसे IRSE, IRSME, IRTS आदि) के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से होती है। उम्मीदवार को उसकी वरिष्ठता, अनुभव और उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड के आधार पर चुना जाता है। यह नियुक्ति भारत सरकार की ओर से की जाती है और इस पद पर तैनात व्यक्ति सीधा रेल मंत्री को ही रिपोर्ट करता है।

नियुक्ति के लिए क्या चाहिए होती है योग्यता?

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ पोस्ट के लिए उम्मीदवार में यह योग्यताएं होनी चाहिए-

उम्मीदवार का चयन भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (IRMS) या पहले भारतीय इंजीनियरिंग सेवा के माध्यम से क्लास-1 अधिकारी के रूप में होना चाहिए।

उम्मीदवार के पास 20–25 साल से अधिक का प्रशासनिक व तकनीकी अनुभव होना चाहिए।

इस पद के लिए उम्मीदवार के पास किसी जोन के महाप्रबंधक (General Manager) या रेलवे बोर्ड के सदस्य के रूप में काम करने का अनुभव अनिवार्य है।

उम्मीदवार को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली Appointments Committee of the Cabinet की मंजूर की बाद नियुक्ति मिलती है।

उम्मीदवार का उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड, नेतृत्व क्षमता और नीति-निर्माण में योगदान का आकलन होगा।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ की सैलरी

इस पद पर बैठे अधिकारी की सैलरी 7वें वेतन आयोग के अनुसार इस पद के मूल वेतन पे लेवल 17 के अंतर्गत निर्धारित है। सभी भत्तों और सरकारी सुविधाओं को जोड़ने के बाद इस पद पर आसीन अधिकारी की कुल मासिक सैलरी लगभग 3 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियां

नई रेल नीतियां बनाना

बजट और बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी

सुरक्षा और आधुनिकीकरण योजनाएँ

हाई-स्पीड रेल और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट को देखना।

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