कल्पना कीजिए… एक ऐसा चेहरा जिस पर कोई जोरदार हंसी नहीं है। हंसने की कोई आवाज नहीं है। इसमें ठहाका नहीं होता है, लेकिन होठों पर एक बेहद शांत, ठहरा हुआ और कोमल भाव है। शुद्ध साहित्यिक हिंदी में इस खूबसूरत और मौन हास्य को व्यक्त करने के लिए एक बेहद सुंदर शब्द ‘स्मित’ है।
साहित्य और काव्यशास्त्र में हंसी के भी कई प्रकार बताए गए हैं। किसी के होठों पर तैरने वाली हल्की सी मुस्कराहट को केवल हंसी कह देना उसके सौंदर्य के साथ न्याय नहीं है। ‘स्मित’ शब्द का प्रयोग साहित्य से लेकर सामान्य लेखन तक किसी की मंद मुस्कान या हल्की हंसी के लिए किया जाता है। हालांकि, इसका अर्थ केवल मुस्कान तक सीमित नहीं है। संस्कृतनिष्ठ प्रयोग में ‘स्मित’ का संबंध खिलने, विकसित होने या प्रस्फुटित होने के भाव से भी जुड़ता है।
आखिर स्मित, हास्य और अट्टहास में क्या बारीक अंतर है? इस कोमल शब्द की रचना कैसे हुई है? आइए जानते हैं ‘स्मित’ का सटीक अर्थ, प्रयोग और शब्द-रचना। जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी के ऐसे शब्दों को सरल तरीके से समझाना है, जिनका प्रयोग हम प्रतिदिन की भाषा और साहित्य में करते हैं, लेकिन उनके सटीक अर्थ और सौंदर्य को लेकर कई बार अनजान रहते हैं।
‘स्मित’ का अर्थ क्या है?
स्मित का मुख्य अर्थ मंद-मंद मुस्कुराना, धीमी हंसी, मुस्कुराहट या मुस्कान है। अर्थात ऐसी हंसी या मुस्कान जो बहुत हल्की, सहज और शांत हो। इसके अलावा कुछ संदर्भों में ‘स्मित’ का अर्थ खिला हुआ, विकसित या प्रस्फुटित होता हुआ भी मिलता है। चेहरे का वह भाव जिसमें होंठ थोड़े खिलते हैं, चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है, लेकिन दांत नहीं दिखते और हंसने की कोई ध्वनि नहीं आती, उसे ‘स्मित’ कहा जाता है।
स्मित और अट्टहास में अंतर
- हिंदी काव्यशास्त्र और नाट्यशास्त्र में हंसी की तीव्रता और ध्वनि के आधार पर बहुत ही सूक्ष्म अंतर स्पष्ट किया गया है।
- स्मित: यह सबसे कोमल अवस्था है। इसमें केवल होंठ खिलते हैं, आंखें मुस्कुराती हैं, लेकिन न तो दांत दिखते हैं और न ही कोई आवाज आती है।
हास्य: जब मुस्कान थोड़ी चौड़ी हो जाए। हंसते समय थोड़े दांत दिखने लगें और हल्की सी आवाज भी आए तब उसे सामान्य हंसी या हास्य कहते हैं।
अट्टहास: जब कोई व्यक्ति जोर-जोर से, पूरी आवाज के साथ ठहाका मारकर हंसता है तब उसे अट्टहास कहा जाता है। जैसे रावण का अट्टहास।
शब्द रचना
यह विशुद्ध रूप से संस्कृत (तत्सम) शब्द है। स्मि का अर्थ हंसना, मुस्कुराना या खिलना होता है। इसमें त प्रत्यय लगा है, जो भाव या अतीत को दर्शाता है।
‘स्मित’ के दूसरे अर्थ
‘स्मित’ का एक अर्थ खिला हुआ, विकसित या प्रस्फुटित होता हुआ भी है। इस अर्थ में इसका संबंध किसी चीज के धीरे-धीरे खिलने या अपनी सुंदरता प्रकट करने से है। यही वजह है कि साहित्य में यह शब्द केवल चेहरे की मुस्कान का चित्र खींचने के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकृति और सौंदर्य के खिलने के लिए भी प्रभावी माना जाता है।
उदाहरण
- सुबह की धूप में फूलों का स्मित रूप मन को आकर्षित कर रहा था।
- पत्रकार के प्रश्न सुनकर उसने केवल स्मित किया और चुप रहा।
- बच्चे की मासूम बात सुनकर मां के चेहरे पर स्मित उभर आई।
- वह समारोह में स्मित मुख से सभी का अभिवादन कर रहे थे।
- उसकी स्मित ने माहौल की गंभीरता को कुछ कम कर दिया।
अभिप्राय
‘स्मित’ शब्द की खूबसूरती उसकी संयमित अभिव्यक्ति में है। जोर से हंसने के बजाय जब भाव चेहरे पर बहुत हल्के ढंग से दिखाई देता है, तब उस भाव को अधिक सटीकता से व्यक्त करने वाला शब्द स्मित है। यही कारण है कि साहित्य में किसी पात्र की मनःस्थिति, प्रेम, संकोच, प्रसन्नता या सहज स्वीकार को बताने के लिए ‘स्मित’ का प्रयोग प्रभावशाली लगता है।
दूसरी ओर, जब यही शब्द फूल या प्रकृति के संदर्भ में आता है तो वह खिलने और अपनी सुंदरता प्रकट करने का बिंब बन जाता है। इस तरह ‘स्मित’ में एक ओर मंद मुस्कान की कोमलता तो दूसरी ओर प्रस्फुटन और खिलने की सुंदरता है। यही इसके प्रयोग को सामान्य ‘मुस्कान’ से अधिक भावपूर्ण और साहित्यिक बनाता है। हिंदी की यही खूबसूरती है, एक शब्द और अर्थ की पूरी दुनिया।
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