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अविश्वास प्रस्ताव: जानें कैसे होता है सदन में पेश, अब तक लोकसभा में कितनी बार हुआ इसका इस्तेमाल

No Confidence Motion: दरअसल अविश्वास प्रस्ताव एक प्रकार का प्रस्ताव है। जिसे आमतौर पर विपक्षी दल द्वारा सरकार को हराने के लिए पेश किया जाता है। इसके साथ ही कुछ विशेष परिस्थितियों में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों द्वारा भी लाया जा सकता है।

सांकेतिक तस्वीर।

No Confidence Motion: केवल 14 महीने में ही कर्नाटक की सरकार अविश्वास प्रस्ताव के कारण अंततः गिर गई। तकरीबन एक सप्ताह तक चले सियासी नाटक को विपक्षी दल भाजपा ने अपनी ओर मोड़ लिया। दरअसल भाजपा सदन में कांग्रेस-जेडीएस सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। जिसके बाद सरकार गिर गई। कर्नाटक में सरकार गिरने के पीछे की वजह जेडीएस के विधायकों का इस्तीफा देना था। विधायकों के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी की सरकार बहुमत साबित नहीं कर सकी। परंतु, सत्ता के गलियारों में जिस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर इतनी उठापटक हुई वह आखिर है क्या? साथ ही इसके नियम क्या हैं? और अब तक देश में कितनी बार लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है? बता दें कि अविश्ववास प्रस्ताव को लेकर अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में सवाल पूछे जाते हैं। आइए जानते हैं इसे।

किसे कहते हैं अविश्वास प्रस्ताव: दरअसल अविश्वास प्रस्ताव एक प्रकार का प्रस्ताव है। जिसे आमतौर पर विपक्षी दल द्वारा सरकार को हराने के लिए पेश किया जाता है। इसके साथ ही कुछ विशेष परिस्थितियों में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों द्वारा भी लाया जा सकता है। ऐसा तब होता है जब उन्हें सरकार के ऊपर से विश्वास उठ गया हो। भारत के संविधान में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कोई कानून का प्रावधान नहीं है, लेकिन अनुच्छेद 118 के तहत यह व्यवस्था है कि हर सदन अपनी-अपनी व्यवस्था बना सकता है। इसके अलावा नियम 198 में के अनुसार कोई भी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरोध में नोटिस दे सकता है।

इस प्रकार सदन में रखा जाता है प्रस्ताव: सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष को लिखित जानकारी देना आवश्यक होता है। फिर इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष इसे किसी सदस्य को पेश करने के लिए कहता है। ऐसा उसी परिस्थिति में संभव हो सकता है जब किसी दल को यह लगता है कि सरकार सदन का बहुमत/विश्वास हो चुका है।

ऐसे स्वीकार किया जाता है अविश्वास प्रस्ताव: अविश्वास प्रस्ताव को पारित करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना आवश्यक है। जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की अनुमति मिलने के बाद 10 दिनों के भीतर इस पर चर्चा होती है। इस पर चर्चा होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष इसके पक्ष में वोटिंग करा सकता है या कोई फैसला ले सकता है।

पहली बार 1963 में पंडित नेहरू सरकार के खिलाफ पेश हुआ था अविश्वास प्रस्ताव: देश में सबसे पहले अविश्वास प्रस्ताव 1963 में पेश किया गया था। उस समय केंद्र में पंडित नेहरू की सरकार थी। जिनके विरुद्ध जेबी कृपलानी ने अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए। प्रस्ताव के पक्ष में 62 वोट पड़े, जबकि विरोध में 347 वोट पड़े थे।

सबसे अधिक अविश्वास प्रस्ताव इसके खिलाफ: भारत के इतिहास में सबसे अधिक बार अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का श्रेय माकपा सांसद ज्योतिर्मय बसु को प्राप्त है। उन्होंने कुल मिलाकर 4 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। ये चारों अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के विरोध में पारित किए गए थे।

बता दें कि देश के संसदीय इतिहास में अब तक 26 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए हैं, जिसमें से 24 बार सरकारें बच गईं। जबकि दो ही बार सरकार गिरने की परिस्थिति आई।

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