देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को सीबीएसई बोर्ड को यह निर्देश दिया था कि वह APAAR ID से जुड़े सहमति (Consent) फॉर्म में ओडिशा हाईकोर्ट के साल 2025 में दिए उस आदेश को लागू करे जिसमें यह कहा गया था कि APAAR ID के सहमति (Consent) फॉर्म में यह स्पष्ट विकल्प होना चाहिए कि माता-पिता चाहें तो APAAR ID बनवाने से मना कर सकते हैं। अभी तक फॉर्म में स्पष्ट रूप से ऐसा कोई विकल्प नहीं था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह साफ हो गया कि अपार आईडी देश में पूरी तरह से स्वैच्छिक है। छात्र/अभिभावक की मर्जी है कि वह इस आईडी को बनाना चाहते हैं या नहीं।

इस आर्टिकल में हम आपको अपार आईडी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। इस आर्टिकल में अपार आईडी क्या है और इसे कैसे बनवाया जा सकता है और इसके क्या फायदे हैं? इन सभी सवालों के जवाब देंगे।

क्या है अपार कार्ड?

अपार कार्ड की फुल फॉर्म है ऑटोमेटेड पर्मानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्रेशन (APAAR), अपार आईडी भारत के सभी छात्रों के लिए एक विशेष पहचान प्रणाली है। यह एक 12 अंकों का कोड होता है जिसके जरिए छात्र की हर शैक्षणिक जानकारी उसके अंदर होती है। जैसे कि मार्कशीट, डिग्री, सर्टिफ़िकेट, पुरस्कार, छात्रवृत्ति, और अन्य क्रेडिट डिजिटल रूप से उस कार्ड में समाहित रहती हैं। यह कार्ड बनवाना स्टूडेंट्स के लिए ऑप्शनल है।

पैरेंट्स की सहमति से आधार से होता है लिंक

अपार आईडी माता-पिता की सहमति लेने के बाद स्टूडेंट के आधार से लिंक हो जाती है और इसे DigiLocker और एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स (ABC) के साथ इंटीग्रेट किया जाता है। इसका मकसद एकेडमिक रिकॉर्ड की एक परमानेंट डिजिटल रिपॉजिटरी बनाना है जिसे स्कूलों, बोर्ड और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में एक्सेस किया जा सके।

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अपार कार्ड क्यों है जरूरी?

अपार कार्ड के जरिए छात्रों का एकेडमिक रिकॉर्ड एक जगह रखा जा सकता है। इस कार्ड के होने से आपको अपने एकेडमिक सर्टिफिकेट कहीं लेकर जाने नहीं पड़ेंगे। बस इस कार्ड के होने से आपका सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन निकलकर आ जाएगा। जैसे आधार कार्ड के जरिए हमारी पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है वैसे ही अपार कार्ड के जरिए किसी स्टूडेंट की एकेडमिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

APAAR ID बनाने के लिए चाहिए ये दस्तावेज

अपार कार्ड बनवाने के लिए उम्मीदवारों के पास आधार कार्ड होना चाहिए और डिजिलॉकर पर एक अकाउंट होना चाहिए जिसका इस्तेमाल KYC के लिए किया जाएगा।

स्कूलों और कॉलेजों को अपने छात्रों के लिए APAAR ID कार्ड के लिए पंजीकरण केवल माता-पिता की सहमति प्राप्त करने के बाद ही शुरू करना चाहिए।

माता-पिता किसी भी समय अपनी सहमति वापस भी ले सकते हैं। स्कूलों और कॉलेजों को बच्चों को एक प्रारूप फ़ॉर्म देना चाहिए, जिसे माता-पिता को भरकर जमा करना चाहिए। माता-पिता की सहमति प्राप्त करने के बाद, स्कूल APAAR ID कार्ड बनाएंगे।

कैसे बनवा सकते हैं अपार कार्ड?

यह कार्ड उन स्टूडेंट्स का बनता है जो कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक पढ़ रहे हैं। हालांकि छात्र स्वंय इस कार्ड को नहीं बनवा सकते। इसकी प्रक्रिया स्कूल के द्वारा ही पूरी की जाती है। स्कूल के द्वारा एक सहमति फॉर्म दिया जाता है जिसे स्टूडेंट्स के पैरेंट्स के द्वारा भरा जाएगा। उस फॉर्म के साथ माता-पिता और बच्चे का आधार कार्ड लगेगा। इसके बाद स्कूल की ओर से अपार आईडी के लिए आवेदन किया जाएगा जिसके बाद अपार कार्ड छात्र के डिजिलॉकर पर उपलब्ध होगा।

12वीं के बाद अगर आप इस कार्ड के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस कार्ड के लिए डिजिलॉकर ऐप में जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।

अपार कार्ड के फायदे

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अपार कार्ड बनवाने का मकसद यही है कि स्टूडेंट का पूरी जिंदगी डिजिटल एकेडमिक रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

एडमिशन और ट्रांसफर के दौरान कागजी काम कम करना पड़ता है। स्कूलों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के बीच आसानी से उन दस्तावेजों का आदान-प्रदान हो जाता है।

सर्टिफिकेट, रिपोर्ट कार्ड और एकेडमिक अचीवमेंट को डिजिटली स्टोर किया जा सकता है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के इंटीग्रेटेड स्टूडेंट रिकॉर्ड के विजन को लागू करने में मदद करना।