देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी को “गेस पेपर लीक” आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सख्त एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद भी परीक्षा माफिया कैसे सक्रिय हैं। यहां जानें इस कानून से जुड़ी हर जरूरी जानकारी
क्या है एंटी पेपर लीक कानून?
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए “पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024” लागू किया। इसे आम भाषा में एंटी पेपर लीक लॉ कहा जाता है। संसद ने फरवरी 2024 में इसे पारित किया और 21 जून 2024 से यह देशभर में लागू हुआ।
NEET UG 2026 Paper Cancelled LIVE Update
यह कानून खास तौर पर उन परीक्षाओं पर लागू होता है जिन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड और केंद्र सरकार की अन्य गतिविधियां आयोजित करती हैं। NEET, JEE, CUET, UGC-NET जैसी परीक्षाएं भी इसके दायरे में आती हैं।
कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में पेपर लीक गैंग सक्रिय पाए गए। 2024 में UGC NET 2024 परीक्षा भी पेपर लीक आशंकाओं के चलते रद्द करनी पड़ी थी। उसी समय नीट विवाद ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक और कानूनी संकट खड़ा कर दिया था। सरकार का कहना था कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बचाने और संगठित नकल माफिया पर कार्रवाई के लिए कड़े केंद्रीय कानून की जरूरत थी।
कानून के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
पेपर लीक को गैर-जमानती अपराध- कानून के तहत पेपर लीक, फर्जी परीक्षा, सॉल्वर गैंग, डिजिटल हैकिंग और उम्मीदवार की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा दिलाना गंभीर अपराध माना गया है।
10 साल तक की जेल- संगठित पेपर लीक गिरोह चलाने वालों को 5 से 10 साल तक की सजा हो सकती है।
1 करोड़ रुपये तक जुर्माना- पेपर लीक नेटवर्क या परीक्षा सेवा प्रदाताओं पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
परीक्षा एजेंसियों पर कार्रवाई– यदि परीक्षा केंद्र, आईटी कंपनी या प्रिंटिंग एजेंसी की मिलीभगत पाई जाती है तो उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और उनकी संपत्ति तक जब्त हो सकती है।
CBI और विशेष जांच- केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर मामलों की जांच CBI जैसी एजेंसियों को सौंप सकती है और विशेष अदालतों में तेजी से सुनवाई कराई जा सकती है।
क्यों नहीं रुक रहे पेपर लीक?
नीट यूजी 2026 रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने सख्त कानून के बावजूद लीक कैसे हो रहे हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण बताते हैं:
संगठित परीक्षा माफिया- पेपर लीक अब स्थानीय स्तर का अपराध नहीं रह गया है। इसमें आईटी नेटवर्क, कोचिंग गिरोह, प्रिंटिंग चैन और अंदरूनी लोगों की मिलीभगत की आशंका रहती है।
परीक्षा प्रणाली में मानव हस्तक्षेप- पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट और सेंटर वितरण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लोग जुड़े होते हैं। किसी एक स्तर की चूक पूरी परीक्षा को प्रभावित कर सकती है।
डिजिटल सुरक्षा की चुनौती- अब लीक केवल फोटो कॉपी या व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं है। एन्क्रिप्टेड चैट, टेलीग्राम चैनल और डार्क वेब जैसे माध्यमों का भी इस्तेमाल होने लगा है।
कानून है, लेकिन तेजी से सजा नहीं- विशेषज्ञ मानते हैं कि कानून बनने के बावजूद कई मामलों में जांच और ट्रायल लंबा चलता है। जब तक दोषियों को जल्दी सजा नहीं मिलती, तब तक माफिया का डर खत्म नहीं होता।
परीक्षाओं का बढ़ता दबाव- नीट जैसी परीक्षाओं में लाखों छात्र कुछ हजार सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसी दबाव का फायदा उठाकर पेपर लीक गिरोह करोड़ों रुपये कमाने की कोशिश करते हैं।
NEET UG 2026 मामले में क्या हुआ?
नीट यूजी 2026 परीक्षा से पहले कई राज्यों में कथित “गेस पेपर” वायरल हुए थे। जांच में दावा किया गया कि इन गेस पेपर के 120 से अधिक प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। इसके बाद परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे और NTA ने परीक्षा रद्द कर दी। मामले की जांच अब CBI को सौंपी गई है।
