UPSC Centenary 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं और इस मौके पर आयोग ने सिविल सेवा भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव की दिशा में कुछ अहम संकेत दिए हैं। यूपीएससी चेयरमैन डॉ. अजय कुमार ने कहा कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था में उम्मीदवारों की रीजनिंग, परिस्थितियों के अनुसार तुरंत सोचने और अस्पष्ट परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
UPSC Exam Reform: रटे-रटाए जवाबों से आगे बढ़ने पर जोर
यूपीएससी की दो दिवसीय शताब्दी समारोह श्रृंखला ‘मंथन’ का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है। इसी दौरान आयोग के चेयरमैन ने परीक्षा सुधारों पर आयोग की सोच सामने रखी।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में ऐसे गुणों को परखने की जरूरत है जिन्हें पहले से तैयार या कोचिंग के जरिए रटे गए मॉडल उत्तरों से आसानी से नहीं मापा जा सकता। इनमें तर्क क्षमता, स्वत: सोचने की क्षमता और अनिश्चित परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि यूपीएसससी की ओर से फिलहाल किसी नई परीक्षा व्यवस्था या सिलेबस में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की गई है, बल्कि भविष्य की भर्ती और परीक्षा प्रणाली को लेकर आयोग ने अपना दृष्टिकोण बताया है।
UPSC के 100 साल पूरे, ‘Trust, Transparency और Technology’ पर फोकस
यूपीएससी चेयरमैन ने आयोग के अगले चरण के लिए तीन प्रमुख सिद्धांत बताए हैं
| सिद्धांत | फोकस |
|---|---|
| ट्रस्ट | आयोग और परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा |
| ट्रांसपेरेंसी | भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिताTechnology परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल |
| टेक्नोलॉजी | परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल |
आयोग का कहना है कि तकनीक और परीक्षा के तरीके समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन मेरिट, निष्पक्षता और समान अवसर जैसे संवैधानिक सिद्धांत महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
परीक्षा में किन क्षमताओं को ज्यादा महत्व देने की बात कही गई?
UPSC चेयरमैन के अनुसार भविष्य की परीक्षा प्रणाली में उम्मीदवार की केवल जानकारी या तैयार उत्तर लिखने की क्षमता ही पर्याप्त नहीं होगी। इन क्षमताओं पर भी जोर दिया जा सकता है:
Reasoning यानी तर्क क्षमता
Spontaneous Thinking यानी परिस्थितियों के अनुसार तुरंत सोचने की क्षमता
Judgement यानी निर्णय लेने की क्षमता
Ambiguous Situations में निर्णय लेने की क्षमता
रटे-रटाए या कोचिंग आधारित उत्तरों पर निर्भरता को कम करना
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यूपीएससी ने अभी यह नहीं बताया है कि इन क्षमताओं को जांचने के लिए सिविल सर्विस एग्जामिनेशन में कौन सा नया प्रश्न पैटर्न लागू होगा। इसलिए उम्मीदवारों को किसी प्रस्तावित बदलाव को मौजूदा परीक्षा पैटर्न का आधिकारिक बदलाव नहीं मानना चाहिए।
Digital Admit Card और Face Authentication पर भी जोर
यूपीएससी परीक्षा की सुरक्षा और पहचान सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डिजिटल ई-एडमिट कार्ड और फेस ऑथेंटिकेशन जैसे तकनीकी उपायों पर भी काम कर रहा है। इनका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और परीक्षा की अखंडता को मजबूत करना है।
UPSC ने 100 साल में क्या हासिल किया?
यूपीएससी ने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए हैं। शताब्दी समारोह का आयोजन ‘मंथन’ नाम से किया जा रहा है। इसमें सिविल सेवाओं की बदलती भूमिका, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में इनोवेशन और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा हो रही है।
समारोह में सिविल सेवा भर्ती और प्रशासन को भविष्य के अनुरूप तैयार करने, तकनीक के इस्तेमाल और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक परिणाम आधारित बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
