UPSC: वीरेंद्र ने 35 साल की उम्र में पाई चौथी रैंक, दिन में इतने घंटे करते थे पढ़ाई

UPSC: कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वीरेंद्र ने साल 1994 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BE की डिग्री हासिल की थी।

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वीरेंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संगरूर के एक सरकारी हाई स्कूल से प्राप्त की है।

UPSC: पहले एक इंजीनियर, फिर पीसीएस अधिकारी और अब आईएएस। इस व्यक्ति ने सफ़लता की सीढ़ी चढ़ते हुए कभी भी अपनी विकलांगता को बाधा नहीं बनने दिया। हम बात कर रहे हैं पंजाब के रहने वाले वीरेंद्र शर्मा की जो कि 2 साल की उम्र से ही पोलियो से ग्रसित हैं। वीरेंद्र के माता-पिता दोनों ही शिक्षक हैं और वह संगरूर के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं। वीरेंद्र ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा संगरूर के एक सरकारी हाई स्कूल से प्राप्त की है। कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वीरेंद्र ने साल 1994 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BE की डिग्री हासिल की थी। उसी साल वीरेंद्र ने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में बतौर SDO नौकरी शुरू कर दी थी।

नौकरी के चार साल बाद वीरेंद्र की किस्मत ने तब पलटी मारी जब उन्होंने 1998 में PCS (एग्जीक्यूटिव) परीक्षा दी और पास करने में असफल रहे थे। उस साल हाई कोर्ट ने किसी कारण उस साल किए गए चयनों को रद्द कर दिया था और 1998 बैच के सभी उम्मीदवारों को फिर से परीक्षा देने का मौका दिया था। आखिरकार वीरेंद्र का चयन पीसीएस एलाइड सर्विसेज में हुआ और वह साल 2003 में डिस्ट्रिक्ट फूड और सप्लाईज ऑफिसर बनें। फिर साल 2008 में उन्हें डिस्ट्रिक्ट फूड और सप्लाईज कंट्रोलर के पद पर प्रमोट कर दिया गया था। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने लगे।

विजेंद्र ने अपना सपना पूरा करने के लिए अपनी पत्नी और दो बेटियों से दूर रहकर चंडीगढ़ में पढ़ाई शुरू कर दी थी। वह हर दिन लगभग 10 घंटे पढ़ाई किया करते थे। फिर साल 2019 में वीरेंद्र ने यूपीएससी परीक्षा का पहला और आखिरी अटेम्प्ट दिया। यह उनका आखिरी अटेम्प्ट इसलिए था क्योंकि उस वक्त वीरेंद्र की उम्र 35 साल थी। उन्होंने पहली बार में ही यूपीएससी परीक्षा में चौथी रैंक हासिल की थी। वीरेंद्र अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी को देते हैं जिन्होंने दूर रहकर भी हर तरह से वीरेंद्र का सहयोग किया।

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