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UPSC: इतने संघर्षों के बावजूद भी नहीं रुके गौरव के कदम, ऐसे बनें यूपीएससी टॉपर

UPSC: गौरव की माता उनके बचपन में ही गुजर गई थी और जब गौरव 14 साल के हुए तो उनके पिता का भी निधन हो गया। जिसके बाद से पूरे घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी।

दिल्ली में गौरव ने नारायण आईआईटी एकेडमी में पढ़ाना शुरू कर दिया था।

UPSC: भरतपुर, राजस्थान के रहने वाले गौरव सिंह सोगरवाल एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एक हिंदी मीडियम स्कूल से प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने पुणे के भारती विद्यापीठ से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है।

गौरव की माता उनके बचपन में ही गुजर गई थी और जब गौरव 14 साल के हुए तो उनके पिता का भी निधन हो गया। जिसके बाद से पूरे घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्हें अब खेती के अलावा अपने भाई बहनों की भी देखभाल करनी पड़ती थी। इतनी जिम्मेदारियों और संघर्षों के बावजूद भी गौरव अपने जीवन में आगे बढ़ते रहे।

जहां उनके यार दोस्त कॉलेज के दिनों मौज मस्ती किया करते थे। वहीं, गौरव की शुरुआत सुबह 5 बजे से होती थी और दिन भर अपनी पढ़ाई के साथ साथ घर का खर्चा चलाने के लिए वह बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया करते थे। किसी तरह ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली आ गए थे। यहां उन्होंने नारायण आईआईटी एकेडमी में पढ़ाना शुरू कर दिया। इसी बीच उन्हें कोटा के एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में भी पढ़ाने का मौका मिला। इस नौकरी के बाद से उनका जीवन थोड़ा आसान हो गया था। यहां उन्होंने लगभग 2 साल काम किया और इसी बीच अपनी बहन की शादी की और छोटे भाई की पढ़ाई में मदद भी की। इन सबके बीच यूपीएससी की तैयारी कहीं पीछे छूट गई थी।

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अपनी जिंदगी को वापस पटरी पर ले आने के बाद गौरव यूपीएससी की तैयारी में जुट गए थे। यूपीएससी के पहले प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा में एक अंक से गौरव का चयन रुक गया था। जबकि, दूसरे प्रयास में वह एक अंक से मेन्स परीक्षा नहीं पास कर पाए थे। हालांकि, इस बीच उनका चयन असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में BSF में हो गया था। ट्रेनिंग के पहले दिन ही गौरव को खबर मिली कि उन्होंने 2015 की सिविल सेवा परीक्षा में 99वीं रैंक हासिल की है। गौरव ने अगले साल फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार उन्होंने 46वीं रैंक प्राप्त की थी। गौरव ने न केवल अपने घर को संभाला और जिम्मेदारियों को पूरा किया बल्कि कड़ी मेहनत और लगन के चलते अपने पिता का भी सपना पूरा किया।

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