UPSC: आईएएस अधिकारी बनने के बाद बिहार को तरक्की की राह पर ले आए प्रत्यय अमृत, जानिए इनकी कहानी

UPSC: प्रत्यय ने अपने दूसरे प्रयास में ही इतिहास और साइकोलॉजी विषय से सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी।

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प्रत्यय को भारत सरकार की तरफ से भी लोक प्रशासन में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है।

UPSC: प्रत्यय अमृत 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह अपने काम को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। प्रत्यय ने अपनी कड़ी मेहनत और काबिलियत की बदौलत बिहार में विकास कार्य को संभव बनाया है। आज हम आपको प्रत्यय अमृत के जीवन और उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में बताएंगे।

प्रत्यय अमृत का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था। उनके पिता रिपुसूदन श्रीवास्तव बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी में फिलॉसफी के प्रोफ़ेसर थे और उनकी माता कविता वर्मा भी एक प्रोफेसर थीं। प्रत्यय ने स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पूरा किया है। इसके बाद प्रत्यय ने प्राचीन इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया और दिल्ली विश्वविद्यालय में भी टॉप किया। उन्हें दिल्ली के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज से लेक्चरर का भी ऑफर आया था। हालांकि, बाद में प्रत्यय ने अपने दूसरे प्रयास में ही इतिहास और साइकोलॉजी विषय से सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी।

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आईएएस अधिकारी बनने के बाद प्रत्यय ने दी गई जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। उन्होंने बिहार में ‌इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे रोड कनेक्टिविटी और विद्युत आपूर्ति जैसी अहम जिम्मेदारी संभाली है।‌ वह बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड का नेतृत्व करने वाले पहले आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने जब यह पद संभाला था तब वहां के हालात काफी खराब थे। हालांकि, सही रणनीति और कुशल नेतृत्व के चलते उन्होंने बिहार को तरक्की की राह पर ले आकर खड़ा कर दिया। कहा जाता है कि प्रत्यय ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के जरिए शहरों में सड़कों और फ्लाईओवर का जाल बिछा दिया। इसके अलावा उन्होंने गांव गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए भी कार्य किया है।

हाल ही में जब बिहार कोरोना महामारी की चपेट में था तब राज्य सरकार में आपदा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। बता दें कि साल 2011 में प्रत्यय को भारत सरकार की तरफ से भी लोक प्रशासन में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है।

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