देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए आयोजित होने वाली यूपीएससी की परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा (प्रीलिम्स) में उम्मीदवारों की संख्या लगातार घट रही है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की 74वीं सालाना रिपोर्ट (2023-24) यह दर्शाती है कि पिछले 3 साल में CSE प्रीलिम्स एग्जाम में कैंडिडेट्स की संख्या कम हो रही है जबकि मेन्स के लिए उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

यह रिपोर्ट CSE एग्जाम में कैंडिडेट्स की संख्या में आ रहे बदलाव को दर्शाती है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रीलिम्स में भले ही उम्मीदवारों की संख्या कम हो रही है, लेकिन मेन्स के लिए क्वालीफाई करने वाले कैंडिडेट्स की संख्या में इजाफा हो रहा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में सीएसई प्रीलिम्स परीक्षा देने वाले लगभग हर 70 उम्मीदवारों में से केवल 1 उम्मीदवार ही मेन्स परीक्षा तक पहुंच सका। यह अनुपात पिछले कुछ सालों से लगभग समान बना हुआ है, जबकि प्रीलिम्स में शामिल होने वाले कुल उम्मीदवारों की संख्या लगातार घट रही है।

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रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा में कुल 10,27,514 उम्मीदवार शामिल हुए। यह संख्या 2022-23 में 11,52,566 और 2021-22 में 11,12,318 थी। 2022-23 की तुलना में 2023-24 में करीब 1.25 लाख कम उम्मीदवारों ने प्रीलिम्स एग्जाम के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पिछले तीन सालों में यह प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की सबसे कम संख्या रही।

इसके दूसरी तरफ सिविल सर्विसेज (मेन) एग्जाम में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 2021-22 में 9,156 कैंडिडेट्स मेन्स एग्जाम में बैठे थे। 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 13,051 हो गई और 2023-24 में यह संख्या 14,579 हो गई। कमीशन द्वारा ट्रैक किए गए तीन साल के समय में यह मेन्स का सबसे अधिक टर्नआउट है।

यूपीएससी प्रीलिम्स में कम होते उम्मीदवारों की संख्या यह दिखाती है कि अब अभ्यर्थी अपने अटैम्पट का सोच-समझकर इस्तेमाल कर रहे हैं। वह केवल तभी परीक्षा दे रहे हैं, जब उन्हें लगता है कि उनकी तैयारी अच्छी है और सफल होने की संभावना ज्यादा है। यानी उम्मीदवार अब बिना तैयारी के सिर्फ अटेम्प्ट बचाने के लिए परीक्षा नहीं दे रहे, बल्कि पूरी तैयारी के साथ ही शामिल हो रहे हैं।

इस बदलाव का एक हिस्सा इस बात से भी जुड़ा है कि पिछले एक दशक में आयोग की ओर से निकाली जाने वाली वैकेंसी की संख्या भी कम हो रही है। 2014 के आसपास UPSC की वैकेंसी 1300 से अधिक अधिसूचित की थी। 2017 में यह संख्या 1056, 2018 में 812 और 2021 में सबसे कम 748 वैकेंसी अधिसूचित की गई।