संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया में वर्ष 2026 के लिए एक बड़ा बदलाव घोषित किया है। पहली बार आयोग सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (CSE Prelims) के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी करेगा। यूपीएससी सीएसई प्रीलिम्स 2026 का आयोजन 24 मई 2026 को किया जाएगा।

यह फैसला आयोग ने इसी वर्ष घोषित किया था और इसे UPSC चेयरमैन Dr Ajay Kumar ने “नई शुरुआत” बताया है। यह कदम लंबे समय से अभ्यर्थियों द्वारा उठाई जा रही मांगों और सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दिए गए सुझावों के बाद सामने आया है। आयोग के अनुसार, इस सुधार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभ्यर्थियों के साथ समय पर संवाद सुनिश्चित करना है।

UPSC ने क्या बड़ा बदलाव किया है?

पहली बार यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी करेगा। अब तक आयोग सिविल सेवा परीक्षा चक्र की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आंसर-की, कट-ऑफ और अंक जारी करता था, जिसमें कई महीने लग जाते थे।

आयोग के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य है:

परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना

अभ्यर्थियों को जल्दी अपने प्रदर्शन का आकलन करने का मौका देना

अंतिम आंसर-की तैयार होने से पहले आपत्तियां दर्ज कराने की सुविधा देना

परीक्षा प्रणाली में अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना

यूपीएससी चेयरमैन अजय कुमार ने क्या कहा?

यूपीएससी चेयरमैन डॉ. अजय कुमार ने इस फैसले को “एक नई शुरुआत” बताया।

आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि यह पहल परीक्षा प्रक्रिया में “अधिक पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समयबद्ध संवाद” सुनिश्चित करने की दिशा में UPSC का प्रयास है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह नीति परीक्षा प्रक्रिया को “अधिक सहभागी” बनाने के साथ-साथ उसकी “पवित्रता, निष्पक्षता और मेरिट आधारित ढांचे” को बनाए रखेगी।

प्रोविजनल आंसर-की कब जारी होगी?

आयोग ने अभी सटीक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन कहा है कि परीक्षा आयोजित होने के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी जाएगी।

यह कदम सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दिए गए सुझावों के अनुरूप माना जा रहा है, जहां अमिकस क्यूरी ने परीक्षा के अगले दिन ही आंसर-की जारी करने की सिफारिश की थी।

अभ्यर्थी आंसर-की पर आपत्ति कैसे दर्ज कर सकेंगे?

प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार UPSC के समर्पित ऑनलाइन पोर्टल UPSC Online Question Paper Representation Portal (QPRep) के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे:

आयोग के अनुसार:

आपत्तियां 31 मई 2026 शाम 6 बजे तक दर्ज कराई जा सकेंगी

उम्मीदवारों को सही उत्तर बताना होगा

संक्षिप्त स्पष्टीकरण देना अनिवार्य होगा

तीन प्रमाणिक स्रोतों से दस्तावेज अपलोड करने होंगे

किस प्रकार के दस्तावेज जरूरी होंगे?

यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियों के समर्थन में “तीन प्रमाणिक स्रोतों” से सामग्री देना जरूरी होगा।

सुप्रीम कोर्ट में पहले दिए गए अपने जवाब में आयोग ने कहा था कि यदि आपत्तियां प्रामाणिक संदर्भों के बिना होंगी तो उन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जा सकता है।

आयोग यह तय करेगा कि प्रस्तुत किए गए संदर्भ प्रमाणिक और आधिकारिक माने जाएंगे या नहीं।

आपत्तियों की समीक्षा कौन करेगा?

आयोग ने कहा है कि अभ्यर्थियों से प्राप्त सभी आपत्तियों और प्रस्तुतियों की समीक्षा विषय विशेषज्ञों की टीम करेगी।

प्रेस नोट के अनुसार:

संबंधित विषय के विशेषज्ञ प्रत्येक आपत्ति की जांच करेंगे

उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाएगी

विवादित उत्तरों की शुद्धता पर विशेषज्ञ अपनी राय देंगे

सभी वैध प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद अंतिम आंसर-की तैयार की जाएगी

यही अंतिम आंसर-की यूपीएससी प्रीलिम्स रिजल्ट तैयार करने का आधार बनेगी।

क्या अंतिम आंसर-की भी जारी होगी?

हां। यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम आंसर-की सिविल सेवा परीक्षा चक्र के अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद जारी की जाएगी। यानी प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर-की उपलब्ध होगी, जबकि अंतिम सत्यापित आंसर-की बाद में जारी की जाएगी।

यह बदलाव क्यों किया गया?

प्रोविजनल आंसर-की जारी करने का फैसला सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से अभ्यर्थी मांग कर रहे थे कि आंसर-की, कट-ऑफ और अंक समय पर जारी किए जाएं ताकि मूल्यांकन में किसी त्रुटि की स्थिति में वे उचित समय पर राहत मांग सकें।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जहां अधिवक्ता सरोज त्रिपाठी और राजीव दुबे ने याचिका दायर कर कहा था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया खत्म होने तक आंसर-की और अंक रोक कर रखना अभ्यर्थियों के लिए प्रभावी कानूनी उपायों में बाधा बनता है।

इसके बाद कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया था, जिन्हें अधिवक्ता प्रांजल किशोर की सहायता प्राप्त थी। अमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया था कि परीक्षा के एक दिन बाद ही प्रोविजनल आंसर-की जारी की जानी चाहिए।

हालांकि शुरुआत में UPSC ने इस व्यवस्था से भ्रम और देरी बढ़ने की आशंका जताई थी, लेकिन बाद में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी करने और उम्मीदवारों से आपत्तियां आमंत्रित करने का “सचेत और सुविचारित निर्णय” लिया गया है।