2021 में हिंदी या मैथिली में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की मुख्य परीक्षा देने वाले केवल 10 उम्मीदवारों को आईएएस और आईपीएस पदों के लिए अनुशंसित किया गया था। यह संख्या 2022 में बढ़कर 27 हो गई, फिर 2023 में घटकर 14 और 2024 में पांच रह गई।

यह जानकारी कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सांसद संजय यादव के एक सवाल के लिखित जवाब में दी। यह सवाल हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के बारे में था।

जवाब के अनुसार, हिंदी और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भाषाओं में सीएसई मुख्य परीक्षा देने वाले और अंततः आईएएस और आईपीएस के लिए चुने गए उम्मीदवारों की संख्या इस प्रकार थी:

यूपीएससी सीएसई: हिंदी/मैथिली माध्यम के उम्मीदवारों को आईएएस/आईपीएस के लिए अनुशंसित किया जाता है।

सीएसई वर्षआईएएस/आईपीएस के लिए अनुशंसित उम्मीदवार
202110
202227
202314
20245

यूपीएससी सीएसई: हिंदी और आठवीं अनुसूची की अन्य भाषाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले उम्मीदवार:

202153826
202258771
202359957
20241,13350


मंत्री के जवाब में उन उम्मीदवारों के आंकड़े भी शामिल थे जो हिंदी और आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भाषाओं में सीएसई मुख्य परीक्षा में शामिल हुए और सफल हुए। सरकार ने बताया कि ऐसे उम्मीदवारों की संख्या 2021 में 538, 2022 में 587, 2023 में 599 और 2024 में 1,133 थी। इनमें से 2021 में 26, 2022 में 71, 2023 में 57 और 2024 में 50 उम्मीदवार सफल हुए।

हालांकि, केंद्र ने सीएसई प्रारंभिक परीक्षा के लिए भाषा-वार विवरण नहीं दिया। सरकार ने कहा कि यह परीक्षा भाषा-निरपेक्ष (मीडियम-न्यूट्रल) है, क्योंकि टेस्ट बुकलेट/प्रश्न पत्र अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में दिया जाता है और उम्मीदवार ओमआर शीट पर अपने जवाब चिह्नित करते हैं।

ये आंकड़े 2021 से सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में दिए गए थे। सरकार ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए बिहार के उम्मीदवारों का साल-वार डेटा भी उपलब्ध कराया। यह संख्या 2021 में 54 से बढ़कर 2022 में 63 और 2023 में 82 हो गई, और फिर 2024 में घटकर 72 रह गई।

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भारत में केवल एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूलों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। UDISE रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश में ऐसे स्कूलों की संख्या 1,04,125 थी, जो 2025-26 में घटकर 1,00,843 रह गई। इस तरह एक साल के भीतर देश भर में एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या में 3,282 की शुद्ध कमी आई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…