देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक जेईई एडवांस्ड 2026 का रिजल्ट 1 जून 2026 को जारी किया गया था। जेईई एडवांस्ड का रिजल्ट आने के बाद कई स्टूडेंट्स की ऐसी सक्सेस स्टोरी सामने आ चुकी हैं जो जेईई की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए एक प्रेरणादायक हैं। असल में सक्सेस स्टोरी उन्हीं छात्रों की होती है जो संघर्ष करके इस कठिन परीक्षा को पास करते हैं और देश के टॉप आईआईटी संस्थानों में एडमिशन लेते हैं। ऐसी ही एक कहनी यूपी के मोदीनगर में रहने वाले सागर की है जिन्होंने जेईई एडवांस्ड परीक्षा पास कर ली है और अब आईआईटी में एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं।

आर्थिक तंगी की वजह से बदला था स्कूल

सागर की कहानी इसलिए संघर्षपूर्ण है क्योंकि एक समय पर उन्हें आर्थिक तंगी के चलते इंग्लिश मीडियम स्कूल छोड़कर हिंदी मीडियम स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा और फिर 12वीं तक की पढ़ाई हिंदी मीडियम से ही की। मीडियम में आए इस बदलाव को सागर ने चुनौतीपूर्ण माना। सागर का कहना है कि हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई करते वक्त मैं देश के सबसे कॉम्पिटिटिव एंट्रेंस एग्जाम में से एक की तैयारी का प्रेशर झेल रहा था। 12वीं में सागर के 82 प्रतिशत मार्क्स आए। उन्होंने जेईई की तैयारी 11वीं क्लास से ही शुरू कर दी थी।

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‘जब भी सेल्फ डाउट होता तो मां की बातें याद करता था’

17 साल के सागर ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा है कि घर में पैसे की तंगी थी और तब इंग्लिश मीडियम से हिंदी मीडियम स्कूल में शिफ्ट होना पड़ा था। उस वक्त जेईई की तैयारी का प्रेशर था। फिर भी मुझे जब भी सेल्फ-डाउट होता, तो मुझे मां की बातें याद आती थी जो मेरी हिम्मत बढ़ाती थीं। मां का यह आसान सा भरोसा — “तुम जो भी करोगे वह सही होगा, बस पढ़ाई करते रहो” — सागर को JEE की तैयारी के कुछ सबसे मुश्किल पलों से निकलने में मदद करने वाली गाइड बन गया।

सागर का फैमिली बैकग्राउंड

यूपी के मोदीनगर के रहने वाले सागर बताते हैं कि उन्होंने एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और इसकी वजह थी परिवार की आर्थिक तंगी। सागर ने बताया कि उनके पिता हाउस पेंटर और मां दर्जी हैं। आर्थिक हालात खराब हुए इस वजह से 6वीं के बाद सरकारी स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा। फाइनेंशियल दिक्कतों ने उनके स्कूल के सालों में कई फैसलों पर असर डाला। एक समय पर वे इंग्लिश-मीडियम स्कूलिंग से हिंदी-मीडियम सरकारी स्कूल में चले गए।

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सबसे पहले आईआईटी के बारे में कब सुना?

सागर ने बताया कि IITs से उनका पहला परिचय उनके मिडिल-स्कूल के सालों में हुआ। क्लास 6 और 7 के आसपास उन्होंने उन इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के बारे में सुनना शुरू किया, जिनमें देश भर के कई स्टूडेंट शामिल होना चाहते हैं। वे कहते हैं कि इंजीनियरिंग हमेशा से ही वह रास्ता था जिसकी उन्होंने अपने लिए कल्पना की थी। क्लास 8 में एक टीचर ने उन्हें नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप (NMMS) एग्जाम देने के लिए हिम्मत दी। सागर स्कॉलरशिप के लिए क्वालिफाई हो गए और उन्हें हर साल लगभग 12 हजार रुपए मिलने लगे। इस आर्थिक मदद ने उन्हें काफी हेल्प की।

सागर ने अपनी तैयारी के बारे में क्या कहा?

सागर के लिए इस परीक्षा को क्रैक करना हैरान करने वाला रहा था। उनका कहना है कि रिजल्ट अपने आप में हैरान करने वाला था लेकिन “अनएक्सपेक्टेड नहीं” था। सागर ने बताया कि “मैंने इसके लिए प्लान बनाया था, और मैंने इस पर काम किया,” उन्होंने उस पल को याद करते हुए कहा जब उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में अपना JEE एडवांस्ड स्कोर चेक किया था।

सागर के लिए इस परीक्षा को क्रैक करना हैरान करने वाला रहा था। उनका कहना है कि रिजल्ट अपने आप में हैरान करने वाला था लेकिन “अनएक्सपेक्टेड नहीं” था। सागर ने बताया कि “मैंने इसके लिए प्लान बनाया था, और मैंने इस पर काम किया,” उन्होंने उस पल को याद करते हुए कहा जब उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में अपना JEE एडवांस्ड स्कोर चेक किया था।

सागर ने अपनी तैयारी के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने एक कोचिंग सेंटर से पढ़ाई की और सेल्फ स्टडी भी की। उन्होंने 11वीं क्लास से कोचिंग लेना शुरू कर दिया था। आखिरी स्टेज में उन्होंने दिन में लगभग आठ घंटे पढ़ाई की। साथ ही उन्हें बोर्ड एग्जाम की तैयारी को भी बैलेंस रखा। सागर ने बताया कि मुझे हर किसी ने सपोर्ट किया। परिवार, स्कूल और शिक्षक सभी का पूरा सहयोग मिला।

उन्हें आगे क्या करने के लिए प्रेरित किया? इसका जवाब उनकी मां से मिलता है। “मेरी मां कहती थीं कि तुम जो भी करोगे वह सही होगा। बस पढ़ाई करते रहो।”