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यूपी बोर्ड ने बदला कक्षा 9 का सिलेबस, यहां जानिए डिटेल्स

UPMSP, UP Board Class 9 Syllabus: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 9वीं कक्षा के सिलेबस में बदलाव होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूपी बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2018-19 से 9वीं कक्षा से प्रारम्भिक गणित विषय को समाप्त करने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
UPMSP ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर अधिसूचना जारी कर सिलेबस में बदलाव करने का ऐलान किया है।

UPMSP, UP Board Class 9 Syllabus: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 9वीं कक्षा के सिलेबस में बदलाव होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूपी बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2018-19 से 9वीं कक्षा से प्रारम्भिक गणित विषय को समाप्त करने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। UPMSP ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर अधिसूचना जारी कर इसका ऐलान किया। इसके मुताबिक, दिनांक 01 अप्रैल, 2018 से प्रारम्भ हो रहे शैक्षणिक सत्र 2018-19 में कक्षा 8 से कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों का प्रवेश अब केवल अनिवार्य विषय ‘गणित’ में ही लिया जाएगा। वहीं छात्राएं जो अनिवार्य गणित विषय नहीं लेना चाहती हैं उन्हें गृह विज्ञान (होम साईन्स) विषय का चयन करने की सुविधा रहेगी।

जिन छात्रों ने पिछले सत्र (2017-18) में प्रारम्भिक गणित विषय चुना था वे इस विषय की पढ़ाई जारी रख सकेंगे और 2019 की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे। साल 2020 में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में प्रारम्भिक गणित विषय की परीक्षा नहीं होगी। बता दें UPMSP ने मार्च महीने में ही सिलेबस में बदलाव करने का ऐलान कर दिया था। बोर्ड ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन, रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) का सिलेबस लागू करने का फैसला लिया है। 2018 की हाई स्कूल परीक्षाओं के लिए 25,21,353 छात्रों ने प्राथमिक गणित विषय का विकल्प चुना था।

गौरतलब है शैक्षणिक सत्र 2017-18 की 10वीं-12वीं यूपी बोर्ड परीक्षाएं 6 फरवरी से 12 मार्च 2018 तक आयोजित हुई थीं। परीक्षा परिणाम अप्रैल महीने के अंत तक घोषित होने के कयास लगाए जा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 1.46 लाख परीक्ष नियुक्त किए गए हैं। इस वर्ष लगभग 66.37 लाख छात्रों ने UP board परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। 36,55,691 छात्र 10वीं और 29,81,327 छात्र 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित हुए थे। वहीं लगभग 11,28,250 छात्रों ने परीक्षा ही नहीं दी थी। इसे लेकर परीक्षा अधिकारियों का दावा है कि नकल रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदम के चलते बड़ी तादाद में छात्र परीक्षा में सम्मिलित नहीं हुए थे।

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