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दाखिले के समय मूल दस्तावेज रखने वाले संस्थानों का रुकेगा अनुदान

दाखिले के समय विद्यार्थियों के मूल दस्तावेजों को जमा करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के खिलाफ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कड़ी कार्रवाई करेगा। इसके तहत ऐसे संस्थानों की अनुदान प्राप्त करने की उपर्युक्तता को वापस लेना, आबंटित अनुदान को रोकना और यूजीसी के सामान्य व विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त करने के लिए संस्थान को अपात्र घोषित करना शामिल है।

Author नई दिल्ली | November 9, 2018 6:16 AM
यूजीसी की अधिसूचना के मुताबिक, संस्थान द्वारा दाखिले के समय विद्यार्थियों के मूल दस्तावेजों को रखने जाने के संबंध में बड़ी संख्या में मिली शिकायतों को देखते हुए आयोग की ओर से नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। (Source: Indianexpress.com)

जनसत्ता संवाददाता

दाखिले के समय विद्यार्थियों के मूल दस्तावेजों को जमा करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के खिलाफ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कड़ी कार्रवाई करेगा। इसके तहत ऐसे संस्थानों की अनुदान प्राप्त करने की उपर्युक्तता को वापस लेना, आबंटित अनुदान को रोकना और यूजीसी के सामान्य व विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त करने के लिए संस्थान को अपात्र घोषित करना शामिल है। यूजीसी की अधिसूचना के मुताबिक, संस्थान द्वारा दाखिले के समय विद्यार्थियों के मूल दस्तावेजों को रखने जाने के संबंध में बड़ी संख्या में मिली शिकायतों को देखते हुए आयोग की ओर से नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ये निर्देश सभी पाठ्यक्रमों के प्रवेश पर लागू होंगे। आयोग के मुताबिक कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र जैसे अंक तालिका, विद्यालय छोड़ने का प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज को दाखिले के समय जमा नहीं करेगा। हालांकि इन दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियां जमा करना अनिवार्य होगा। संस्थान दाखिले के समय विद्यार्थी की उपस्थिति में मूल दस्तावेजों का सत्यापन करेगा। उनकी प्रमाणिकता के संबंध में संतुष्ट हो जाने पर प्रमाणित प्रतियों को रिकॉर्ड के लिए रखते हुए मूल दस्तावेजों को वापस करेगा। किसी भी स्थिति में संस्थान द्वारा विद्यार्थियों के मूल प्रमाणपत्र रखना वर्जित है।

यूजीसी ने इन नियमों के संबंध में एक शिकायत निवारण तंत्र भी विकसित करने के लिए संस्थानों को कहा है। जहां अधिकतम 30 दिनों में सभी शिकायतों को निवारण किया जाएगा। नियमों को लागू नहीं करने वाले संस्थानों के अनुदान रोकने के अलावा उनके खिलाफ समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किए जाएंगे, किसी कॉलेज/संस्थान के मामले में संबद्ध करने वाले विश्वविद्यालय को संबद्धता को वापस लेने की सिफारिश करना, सम विश्वविद्यालय संस्थान के मामले में, केंद्र सरकार को सम विश्वविद्यालय संस्थान के रूप में घोषणा को वापस लेने की सिफारिश करना, राज्य विश्वविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकारों से सिफारिश करना और आयोग द्वारा उसकी शक्तियों के भीतर ऐसी अन्य कार्रवाई करना जो आयोग उचित समझे।

दाखिले की अंतिम तिथि से 15 दिन पहले मिलेगी सौ फीसद फीस वापस: इसके साथ ही आयोग की ओर से प्रवेश रद्द कराने की स्थिति में दाखिला शुल्क वापस करने के नियम भी अधिसूचित कर दिए हैं। प्रवेश की अंतिम तिथि के एक महीने बाद तक 50 फीसद फीस वापस ली जा सकेगी। संस्थान प्रोसेसिंग फीस के नाम पर कुल फीस का अधिकतम 5 फीसद या 5 हजार रुपए ही काट सकते हैं। दाखिले की अंतिम तारीख से 15 दिन पहले तक प्रवेश रद्द करने का आवेदन करने वालों को 100 फीसद फीस वापस मिलेगी। 15 दिन पहले से प्रवेश की अंतिम तारीख तक दाखिला रद्द कराने वालों को 90 फीसद शुल्क वापस मिलेगा। अंतिम तारीख से 15 दिन बाद तक प्रवेश रद्द कराने वाले विद्यार्थियों को 80 फीसद फीस वापस मिल जाएगी। प्रवेश की अंतिम तारीख के एक महीने बार दाखिला रद्द कराने वाले विद्यार्थियों को उच्च शैक्षणिक संस्थान कोई पैसा वापस नहीं देंगे।

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