देश में नीट पेपर लीक को लेकर चल रहे बवाल के बीच 29 और 30 जून 2026 को आयोजित हुई यूजीसी नेट परीक्षा अब सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, हरियाणा के रोहतक के रहने वाले दो छात्र नेता दीपक धनखड़ व अंकित सिंह फोगाट ने यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लीक होने का दावा किया और उनका यह दावा अब सुर्खियों में इसलिए आ गया है क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके दावे को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला है।

यूजीसी नेट का पेपर हुआ लीक!

दरअसल, छात्र नेताओं ने 2-3 दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो रिलीज कर यह दावा किया था कि यूजीसी नेट का पेपर लीक हुआ है और कुछ विषयों के कथित प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही एक संगठित नेटवर्क के द्वारा वायरल कर दिए गए जो देश के अलग-अलग राज्यों में उम्मीदवारों तक पहुंच गए।

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समाजशास्त्र का पेपर वायरल

दीपक और अंकित ने इस वीडियो में समाजशास्त्र प्रश्न पत्र की सामग्री को स्क्रीन पर दिखाते हुए दावा किया कि अभ्यर्थियों को दो सेट पढ़ाए गए थे और उनमें से एक 100 प्रश्नों का सेट परीक्षा में आए प्रश्नों से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने यहां तक कहा है कि उनके द्वारा सार्वजनिक की जा रही सामग्री की NTA के मूल प्रश्नपत्र से आधिकारिक मिलान और स्वतंत्र डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जाए।

राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

छात्र नेताओं के इस दावे को उस वक्त हवा मिल गई जब राहुल गांधी ने उनके दावे को लेकर सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि पिछले सप्ताह हुई UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि NEET और NET में बार-बार सामने आए घोटालों के बाद भी मोदी सरकार आंखें मूंदकर सो रही है, क्योंकि लाखों छात्रों की रात-रात जागकर की गई सालों की मेहनत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

‘CJP के आंदोलन में मिले थे पेपर देने वाले लोग’

छात्र नेताओं ने अपने वीडियो में बताया है कि उन्होंने इस नेटवर्क तक पहुंचने के लिए इनके कुछ साथियों से पेपर प्राप्त करने को लेकर संपर्क किया था। दीपक धनखड़ ने बताया कि वह सरकारी परीक्षाओं UGC-NET, CSIR, HTET और ADA सहित विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध कराने का दावा करने वाले कुछ लोग उनके संपर्क में हैं। इसके बाद कुछ साथियों ने इस कथित नेटवर्क की सच्चाई सामने लाने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि हमारी मंशा पैसा कमाने या किसी अभ्यर्थी का पेपर करवाने की नहीं थी, बल्कि यह पता लगाना था कि कथित पेपर उपलब्ध कराने वाले लोग वास्तव में प्रश्नपत्र लेकर आते हैं या अभ्यर्थियों से ठगी करने वाला कोई गिरोह है।

असली पेपर से मैच कर गए सभी प्रश्न

दीपक धनखड़ ने बताया कि वह इस गिरोह के लोगों से 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट में मिले थे, जिसके बाद संबंधित विषयों के अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया। अगली रात उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली से जुड़े बताए जा रहे लगभग सात-आठ लोग पहुंचे, जिनके पास पेन ड्राइव में कथित प्रश्नपत्र था। इस प्रश्न पत्र के प्रश्न वास्तविक परीक्षा से 100 प्रतिशत मैच हुए। उनके पास ऐसे अभ्यर्थियों की जानकारी मौजूद है, जिन्होंने परीक्षा केंद्र से बाहर आने के बाद बताया कि परीक्षा से पहले पढ़ाए गए दो सेटों में से एक 100 प्रश्नों का सेट वास्तविक परीक्षा में आया था।