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UGC Dual Degree: डुअल डिग्री प्रोग्राम को लेकर यूजीसी ने जारी की गाइडलाइंस, जानें सभी डिटेल्स

UGC Dual Degree Programmes: भारतीय और विदेशी संस्थान जल्द ही ज्वॉइंट डिग्री और डुअल डिग्री प्रोग्राम की शुरूआत करेंगे।

UGC Dual Degree: डुअल डिग्री प्रोग्राम को लेकर यूजीसी ने जारी की गाइडलाइंस, जानें सभी डिटेल्स
छात्र विदेशी संस्थानों से 30 प्रतिशत से अधिक ‘क्रेडिट’ प्राप्त कर सकेंगे।

UGC Dual Degree Programmes: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने डुअल डिग्री और ज्वॉइंट डिग्री प्रोग्राम को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी है। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने इससे जुड़ी कंफ्यूजन को दूर करते हुए कहा कि भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान जल्द ही ज्वॉइंट डिग्री और डुअल डिग्री प्रोग्राम की पेशकश कर सकते हैं। यूजीसी ने इन कार्यक्रमों के लिए नियमों को मंजूरी दे दी है।

मंगलवार को उच्च शिक्षा नियामक की बैठक में यह फैसला लिया गया। इक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत छात्र विदेशी संस्थानों से 30 प्रतिशत से अधिक ‘क्रेडिट’ प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नियमों के तहत किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान और भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान के बीच किसी भी प्रकार की ‘फ्रेंचाइजी’ व्यवस्था या अध्ययन केंद्र की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यूजीसी की गाइडलाइंस के अनुसार, डुअल डिग्री एक सहयोगात्मक व्यवस्था होगी जिसके तहत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान में नामांकित छात्र यूजीसी नियमों का पालन करते हुए विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान में अध्ययन कर सकते हैं। इस तरह के डुअल डिग्री कार्यक्रमों के तहत दी जाने वाली डिग्री भारतीय संस्थान द्वारा प्रदान की जाएगी।

छात्रों को मिलेगी एक डिग्री
उन्होंने कहा कि ज्वॉइंट डिग्री प्रोग्राम के लिए पाठ्यक्रम भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाएगा और कार्यक्रम के पूरा होने पर दोनों संस्थानों द्वारा एक ही प्रमाणपत्र के साथ डिग्री प्रदान की जाएगी। कुमार ने कहा कि इसके तहत प्रदान की गई डिग्री भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली किसी भी संबंधित डिग्री के बराबर होगी।

बढ़ेगी छात्रों की संख्या
कुमार ने कहा, ”यह प्रयास हमारी उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीयकरण की ओर ले जाएगा। यह हमारे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक पाठ्यक्रम के माध्यम से बहु-विषयक शिक्षा प्राप्त करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा। इससे उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कुमार के मुताबिक, कम से कम चार करोड़ विदेशी छात्र भारत में पढ़ते हैं और यह संख्या बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।

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