भारतीय इतिहास को अगर देखें तो देश के एजुकेशन सिस्टम में पेपर लीक की समस्या काफी पुरानी है। आजादी के बाद से ही पेपर लीक के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। पिछले 2 दशक में 50 के करीब पेपर लीक की घटनाएं ऐसी हुई हैं जिन्होंने एजुकेशन सिस्टम को शर्मसार किया है। पेपर लीक के मामले सामने आना ही अपने आप में शर्मनाक है और इससे भी अधिक शर्मनाक बात ये है कि इन 24 साल में सिर्फ एक मामले में ऐसा हुआ है जब कोर्ट ने आरोपियों को दोषी ठहराया और फिर सजा भी हुई। इसके अलावा कुछ-कुछ मामलों में गिने-चुने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है।
कौन से केस में आरोपी साबित हुआ दोषी?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2010 में रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट और असिस्टेंट स्टेशन मास्टर की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपी सतेंद्र मोहन शर्मा को हैदराबाद की सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहराया था। सतेंद्र उस वक्त आरआरबी मुंबई के चेयरमैन थे। कोर्ट ने उनके अलावा 9 अन्य आरोपियों को 30 जनवरी 2024 में दोषी ठहराया था। सभी दोषियों को 5 साल की सजा हुई थी और जुर्माना भी लगाया गया था। सतेंद्र मोहन शर्मा को बाद में तेलंगाना हाई कोर्ट ने 2 फरवरी, 2024 को जमानत दे दी थी।
इंडियन एक्सप्रेस के इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर श्यामलाल यादव ने ने 2002 और 2025 के बीच 45 बड़े पेपर लीक मामलों की जांच की है जिसमें सामने आया है कि इन 45 मामलों में से कुछ में ही अहम पदों पर बैठे अधिकारियों को हटाया गया या उन पर कार्रवाई हुई। यहां हम आपकों ऐसे कुछ मामलों के बारे में बता रहे हैं:-
2013
साल 2013 में राजस्थान लोक सेवा आयोग के चेयरमैन हबीब खान गौरान राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस की भर्ती से जुड़े मामले में आरोपी थे। उन्होंने उस वक्त इस्तीफा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्होंने सरेंडर किया था और फिर उन पर केस दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में उन्हें बेल मिल गई। मामला अभी ट्रायल के लिए पेंडिंग है। यह कहते हुए कि उनके खिलाफ “कोई सबूत” नहीं है, गौरान ने कहा कि वह बेल पर हैं।
2015
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के पूर्व चेयरमैन डॉ. अनिल कुमार यादव मुख्य रूप से अपनी विवादित नियुक्ति और भर्तियों में अनियमितताओं/जाति विशेष को फायदा पहुंचाने के आरोपों से घिरे थे। उनके खिलाफ CBI जांच चली थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2015 में UPPSC चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति रद्द कर दी थी। हालांकि अनिल यादव ने आरोपों को “प्रोपेगैंडा” बताया जो “किसी भी अदालत में साबित नहीं हुआ”।
2018
UPPSC एग्जाम कंट्रोलर अंजू लता कटियार को लापरवाही के आरोप में नौकरी से निकालकर गिरफ्तार कर लिया गया। 2019 से इस ट्रायल में सुनवाई के लिए कम से कम 202 लिस्टिंग हो चुकी हैं। कटियार को तब से बहाल कर दिया गया है और स्टेट रेवेन्यू बोर्ड में पोस्ट कर दिया गया है। कटियार ने आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए खारिज कर दिया, और “न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा” जताया।
2021 में आने वाले केस
- RPSC मेंबर रामू राम रायका को सब-इंस्पेक्टर भर्ती मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अभी वह बेल पर हैं। उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं दिया है।
2. वहीं 2021 में ही UP टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (UPTET) लीक के सिलसिले में UP के एग्जाम रेगुलेटरी अथॉरिटी के सेक्रेटरी संजय कुमार उपाध्याय पर केस दर्ज हुआ था। बाद में उन्हें सस्पेंड कर गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि बाद में उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया गया और उन्हें जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर प्रमोट कर दिया गया। पुलिस ने 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अभी ट्रायल चल रहा है। उपाध्याय ने कहा है कि डिपार्टमेंटल कार्रवाई में मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ।
3. साल 2021 में ही IAS ऑफिसर एस राजू ने 5 अगस्त, 2022 को उत्तराखंड सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन कमीशन के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने रिक्रूटमेंट टेस्ट लीक होने की “नैतिक ज़िम्मेदारी” लेते हुए यह इस्तीफा दिया था। 1984 बैच के रिटायर्ड ऑफिसर, वह सितंबर 2016 से UKSSSC के हेड थे। मामला अंडर ट्रायल है। इस्तीफे को अपना “अपना फैसला” बताते हुए, राजू ने कहा कि उन्होंने पिछले एग्जाम में उनके मार्क्स की तुलना लीक हुए टेस्ट से करने के बाद STF के साथ कैंडिडेट्स की एक लिस्ट शेयर की, जिससे केस को सुलझाने में “बहुत मदद” मिली। उन्होंने कहा, “मैंने एक एंटी-कॉपी कानून का ड्राफ्ट तैयार किया, जिसे सरकार ने लागू किया।”
4. साल 2021 में ही तत्कालीन CM अशोक गहलोत ने राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के चेयरमैन डी पी जारोली को राजस्थान एलिजिबिलिटी एग्जाम फॉर टीचर्स (REET) से जुड़े केस में हटा दिया था। इसके अलावा RBSE सेक्रेटरी अरविंद कुमार सेंगवा को सस्पेंड किया गया, लेकिननवंबर 2022 में उन्हें बहाल और फिर से पोस्ट किया गया। ED इस मामले की जांच कर रही है। जारोली ने कहा, “मेरे खिलाफ एक पॉलिटिकल साजिश के तहत मुझे नौकरी से निकाला गया था।
2022
साल 2022 में RPSC मेंबर बाबूलाल कटारा को सीनियर टीचर्स की भर्ती से जुड़े एक केस में गिरफ्तार किया गया था और जनवरी 2024 में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग पर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट फाइल की। कटारा अभी भी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं और ट्रायल चल रहा है।
2023
साल 2023 में बिहार पुलिस ने रिटायर्ड DG संजीव कुमार सिंघल को, जो रिटायरमेंट के बाद सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल्स के हेड थे, के खिलाफ लापरवाही के आरोप में डिपार्टमेंटल एक्शन की सिफारिश की। कोई एक्शन नहीं लिया गया। सिंघल ने कहा कि वह “सही समय पर” बात करेंगे।
2024
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के DG सुबोध कुमार सिंह को हटा दिया गया और लगभग चार महीने तक उन्हें आगे की नियुक्ति का इंतजार करना पड़ा। फिर उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर में वापस भेजने से पहले स्टील मिनिस्ट्री में एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया। सिंह ने कमेंट के लिए रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया।
साल 2024 में ही रिव्यू ऑफिसर और असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर पोस्ट के लिए प्रीलिम्स एग्जाम कराने में लापरवाही के आरोपों के बीच UP पब्लिक सर्विस कमीशन के एग्जामिनेशन कंट्रोलर अजय कुमार तिवारी को हटा दिया गया। पुलिस ने जुलाई 2024 में 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की; ED ने भी केस अपने हाथ में लिया। गिरफ्तार किए गए बारह आरोपियों को जून और सितंबर 2024 के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट से बेल मिल गई। मामला प्रयागराज कोर्ट में पेंडिंग है। तिवारी ने कमेंट करने से मना कर दिया।
