आर्थिक तंगी के कारण स्कूल छोड़ने और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए मजबूर होने के 37 साल बाद, 59 वर्षीय सिल्वेस्टर शाडप मेघालय में परीक्षा हॉल में लौटने की तैयारी कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि वे आखिरकार 1989 में अधूरी छोड़ी गई कक्षा 10 की शिक्षा को पूरा कर पाएंगे।

री भोई जिले के थाड्रैंग उमंगम गांव के रहने वाले शाडप, मेघालय के ‘सेकंड चांस लर्निंग प्रोग्राम’ के तहत सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SSLC) परीक्षा के लिए प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर रजिस्टर हुए 9767 पूर्व स्कूल ड्रॉपआउट्स में सबसे उम्रदराज हैं। दिसंबर में होने वाली यह परीक्षा राज्य भर के सीखने वालों को पारंपरिक फुल-टाइम स्कूल में लौटे बिना 10वीं कक्षा पूरी करने का एक और मौका देगी।

यह कार्यक्रम मेघालय सरकार, मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ( एमबीओएसई ) और मेघालय प्रोग्राम फॉर एडोलसेंट वेलबीइंग, एम्पावरमेंट एंड रेजिलियंस (एमपीओडब्ल्यूईआर) की एक संयुक्त पहल है। इसमें उम्र की कोई ऊपरी सीमा नहीं है और इसमें सभी 12 जिलों से किशोरों, युवाओं और अधिक उम्र के सीखने वालों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

शाडप के लिए, यह वापसी औपचारिक शिक्षा से दशकों दूर रहने के बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मुश्किलों के कारण उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा और परिवार का सहारा बनना पड़ा। सालों बाद, उन्होंने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने का फैसला किया, साथ ही उन्हें उम्मीद है कि वे युवा लोगों और दूसरों को भी शिक्षा में लौटने के लिए प्रोत्साहित कर सकेंगे।

परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं रहा- शाडप

परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं रहा है। 37 साल के अंतराल के बाद, शाडप को ऐसे पाठ्यक्रम (सिलेबस) के साथ तालमेल बिठाना पड़ा है जो उस पाठ्यक्रम से काफी अलग है जिसे उन्होंने पहले पढ़ा था। उन्होंने कहा कि बदलावों के साथ तालमेल बिठाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन वे परीक्षा की तैयारी करने के लिए दृढ़ हैं।

इस प्रोग्राम ने पूरे मेघालय में 171 लर्निंग और असेसमेंट सेंटर बनाए हैं, जिनमें री भोई में 690 रजिस्टर्ड कैंडिडेट शामिल हैं। एमबीओएसई शैक्षणिक और परीक्षा से जुड़े ढांचे के लिए जिम्मेदार है, जबकि MPOWER कम्युनिटी को जोड़ने, मेंटरिंग, रजिस्ट्रेशन, सीखने वालों को ट्रैक करने और फॉलो-अप में मदद करता है।

शिक्षार्थियों को खासी, गारो, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी और स्वास्थ्य विषयों में निःशुल्कसेल्फ-स्टडी मटीरियल भी उपलब्ध कराई गई है। इस पहल का उद्देश्य उन लोगों की सहायता करना है जिन्होंने आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक जिम्मेदारियों, प्रवास, कम उम्र में विवाह, भौगोलिक बाधाओं या अन्य परिस्थितियों के कारण शिक्षा बीच में ही छोड़ दी थी।

दूसरा मौका पाने का रास्ता SSLC परीक्षा के साथ ही खत्म नहीं होता। सफल छात्रों को उच्च माध्यमिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा सकता है, जिससे उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने या रोजगार से संबंधित कौशल विकसित करने के रास्ते मिलते हैं।

यह भी पढ़ें: 10वीं क्लास के पासिंग क्राइटेरिया को लेकर CBSE ने दूर किया कन्फ्यूजन, पास होने के लिए कितने चाहिए होंगे मार्क्स?

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एकेडमिक ईयर 2026-27 के लिए कक्षा 10वीं के पासिंग क्राइटेरिया को स्टूडेंट और पैरेंट्स में जो भ्रम की स्थिति बनी हुई थी उसे दूर करने का काम किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 के छात्रों के लिए पास होने के नियमों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले साल जो क्राइटेरिया था इस साल भी वहीं लागू होगा। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर….