गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है। उत्तराखंड में हिमालय के पहाड़ों से निकलकर यह उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। गंगा नदी को बांग्लादेश में पद्मा के नाम से जाना जाता है।

अगर बात दुनिया की सबसे लंबी नदियों की करें तो गंगा का स्थान 35वें नंबर पर आता है। आइए आपको बताते हैं दुनिया की दस सबसे लंबी नदियों के बारे में…

दुनिया की दस सबसे लंबी नदियां

नील नदी: नील दुनिया की सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई लगभग 4132 मील यानी 6650 किलोमीटर है। नील नदी अफ्रीका के विक्टोरिया झील से निकलकर उतर में भूमध्यसागर में उतरती है। यह नदी दुनिया के दस देशों से होकर गुजरती है, इनमें तंजानिया, यूगांडा, सूडान, मिस्त्र, कांगो लोकत्रांतिक गणराज्य, केन्या जैसे कुछ प्रमुख देश शामिल हैं।

नील नदी की दो प्रमुख सहायक नदियां है: व्हाइट नील और ब्लू नील। व्हाइट नील दक्षिण सूडान से निकलती है तो वही ब्लू नील इथियोपिया से निकलती है। नील नदी के महत्व का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे अफ्रीकी नदियों का जनक भी कहा जाता है। मिस्त्र के लोगों के जीवन में नील नदी अहम भूमिका निभाती है। मिस्त्र देश की अधिकांश जमीन सूखी और बंजर है जबकि नील नदी के आस-पास का हिस्सा उपजाऊ है।

अमेजन नदी: अमेजन दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। जल प्रवाह की मात्रा के हिसाब से यह दुनिया की सबसे बड़ी नदी है। इसकी लंबाई लगभग 4 हजार मील यानी 6400 किलोमीटर है। अमेजन नदी साउथ अमेरिका पेरू के एंडीज पर्वतमाला से निकलकर पूर्व की ओर बहती है और अटलांटिक महासागर में मिलती है। यह नदी ब्राजील, पेरू, बोलविया और कोलम्बिया जैसे प्रमुख देशों से होकर बहती है। अमेजन नदी  अमेजन वर्षा वनों से घिरा हुआ है। इसे धरती का फेफड़ा भी कहा जाता है। 

यांग्तजे: यांग्तजे दुनिया की तीसरी और चीन व एशिया की सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई लगभग 3915 मील यानी 6300 किलोमीटर है। यह सीकांग के पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर पूर्वी चीन महासागर में गिरती है। चीन की स्थानीय भाषा में यांग्तजे नदी को चांग ज्यांग भी कहा जाता है।

मिसिसीपी मिसौरी: मिसिसीपी-मिसौरी दुनिया की चौथी और संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे लंबी नदी है। मिसौरी नदी, मिसिसिपी नदी की सहायक नदी है। इसकी लंबाई लगभग 4090 किलोमीटर है। मिसौरी नदी चट्टानी पर्वतमाला से निकलकर मिसिसिपी नदी में मिल जाती है। इसे ‘बिग मड्डी’ के नाम से भी जाना जाता है।

येनिसे-बाईकल-सेलेंगा: यह एक नदी प्रणाली है, जो मिलकर दुनिया की पांचवी सबसे लंबी नदी बनाती है। येनिसे नदी मंगोलिया के सायन पर्वतों से निकलकर आर्कटिक महासागर के कारा सागर में मिल जाती है। वहीं सेलेंगा नदी मंगोलियो से निकलकर बाइकल झील में गिरती है। बाइकल झील से अंगारा नदी निकलती है, यह आगे जाकर येनिसे नदी में मिल जाती है। इन तीनों नदियों को मिलाकर कुल लंबाई लगभग 5539 किलोमीटर है।

हौंग-हे (येलो नदी): येलो नदी चीन की दूसरी और विश्व की छठी सबसे लंबी नदी है। इसकी कुल लंबाई लगभग 5464 किलोमीटर है। पीले रंग की मिट्टी (लोएस) से भरे होने के कारण इसे येलो नदी कहा जाता है।

यह नदी तिब्बती पठार के बायन हार पर्वत से निकलकर चीन के कई प्रांतों और दो स्वायत्त क्षेत्रों से बहती हुई बोहाई सागर में गिरती है। इसे ‘चीनी सभ्यता का पालना’ कहा जाता है क्योंकि प्राचीन चीनी सभ्यता का विकास इसी नदी के किनारे हुआ था। अत्यधिक बाढ़ आने के कारण येलो नदी को ‘चीन का शोक’ भी कहा जाता है।

ओब-इरटिस: इर्तिश नदी, ओब नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह दोनों मिलकर दुनिया कि सातवीं सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई लगभग 5410 किलोमीटर है। इर्तिश नदी चीन के अल्ताई पर्वत से निकलकर कजाखस्तान और रुस से होते हुए अंत में ओब नदी से मिल जाती है।

पराना: यह दुनिया की आठवीं सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई लगभग 4880 किलोमीटर है। पराना नदी दक्षिण अमेरिका की प्रमुख नदी है। यह अमेजन नदी के बाद दक्षिण अमेरिका की दूसरी सबसे लंबी नदी है। पराना नदी ब्राजील के दक्षिण-पूर्वी मध्य पठार से निकलती है और उरुग्वे नदी से मिल जाती है।

कांगो: कांगो नदी नील नदी के बाद अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई लगभग 4700 किलोमीटर है। कांगो नदी जाम्बिया से चाम्बेशी नदी के रूप में शुरू होती है और अटलांटिक महासागर में जाकर मिलती है। कांगो नदी कैमरून, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, गैबॉन, भूमध्यरेखीय गिनी और अंगोला सहित कई देशों से होकर गुजरती है।

अमूर: अमूर दुनिया की दसवीं सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई करीब 2763 मीन यानी 4444 किलोमीटर है। शिल्का और आरगन नदी मिलकर अमूर नदी बनाती है। अमूर का उद्गम स्थल रूस में है, यह चीन और मंगोलिया से भी होकर गुजरती है और रूस व चीन के बीच लंबी सीमा भी तय करती है।

(यह लेख जनसत्ता के साथ इंटर्नशिप कर रही साक्षी राज ने लिखा है।)

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